नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से। "सुनो एक बेटी की पुकार — अरावली हमें पुकारे "

सृष्टि ने बताया कि हालिया समय में सुप्रीम कोर्ट की एक व्याख्या के बाद चिंता बढ़ गई है, जिसमें कहा गया है कि 100 मीटर से कम ऊँचाई वाले पहाड़ों को अरावली मानने से इंकार किया जा रहा है। इस पर सृष्टि ने सरकार और न्यायालय से निवेदन किया है कि अरावली को पर्वत माना जाए तथा उसकी कटाई और अवैध अतिक्रमण पर रोक लगाई जाए।
सृष्टि गुलाटी का संदेश (कविता/नारे):
- "अरावली को बचाओ, अरावली हमारी साँस है।"
- "पेड़ लगाओ, अरावली बचाओ।"
- "अरावली हमारी माँ है।"
- "पानी — हवा देती है तो अरावली, इसे काटने से रोको।"
- "प्लास्टिक का उपयोग बंद करो, अरावली को साफ़ रखो।"
सृष्टि ने कहा कि अरावली की रक्षा हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है और हर समुदाय, सरकार व न्यायालय को मिलकर इसे बचाने का संकल्प लेना चाहिए। वे लोगों से अपील करती हैं कि सार्वजनिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाएं, पेड़ लगाएं, प्लास्टिक का उपयोग घटाएं और अरावली की मिट्टी व वनस्पति की रक्षा के लिए आवाज उठाएँ।

