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नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

 अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्टार्टअप एवं उद्यमी संघ के तत्वावधान में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली में “निदेशक एवं मार्गदर्शक महासम्मेलन 2.0” का भव्य आयोजन
 
 नई दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से
 विकसित भारत 2047, नवाचार, वैश्विक उद्यमिता एवं युवा नेतृत्व पर हुआ व्यापक राष्ट्रीय मंथन
 नई दिल्ली 28 मई

अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्टार्टअप एवं उद्यमी संघ के तत्वावधान में भारत के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के प्रौद्योगिकी नवाचार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन सभागार में आयोजित “निदेशक एवं मार्गदर्शक महासम्मेलन 2.0” अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं ज्ञानवर्धक वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह विशेष महासम्मेलन विकसित भारत, नवाचार, वैश्विक उद्यमिता, नेतृत्व, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप संस्कृति एवं राष्ट्रनिर्माण जैसे समसामयिक विषयों पर गंभीर विमर्श का प्रभावशाली मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में देश-विदेश से पधारे शिक्षाविदों, उद्योग-जगत के विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, युवा उद्यमियों, शोधकर्ताओं एवं विविध क्षेत्रों के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर “विकसित भारत 2047” के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने की दिशा में अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान एवं नवाचार-आधारित उद्यमों के मध्य सुदृढ़ समन्वय स्थापित करने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ते हुए भारत को ज्ञान, विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में विश्व नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता प्रतिपादित की गई।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार स्टार्टअप एवं उद्यमी संघ के अध्यक्ष डॉ. अंशुमान सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत आज केवल उपभोग का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, नवाचार एवं युवा शक्ति के बल पर विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर एक उदीयमान शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी एवं उत्तरदायी उद्यमिता का होगा, जिसमें भारतीय युवाशक्ति विश्व समुदाय को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षण संस्थानों, उद्योग-जगत एवं नवाचार मंचों के मध्य सुदृढ़ सहभागिता ही आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला बनेगी। उद्यमिता को केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित न रखकर उसे सामाजिक परिवर्तन, कौशल-विकास, रोजगार-सृजन एवं राष्ट्रहित से जोड़ना वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता है।
महासम्मेलन में उपस्थित विभिन्न विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने ज्ञान-विनिमय, वैश्विक सहयोग, तकनीकी उन्नयन, अनुसंधान, स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार तथा उत्तरदायी नेतृत्व जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक उन्नति से नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान, नवाचार एवं मानवीय मूल्यों के समन्वित विकास से निर्मित होगा।
इस गरिमामय अवसर पर आदरणीय राज कुमार श्रीवास्तव, सुशील कुमार सिंघल, डॉ. आर. पद्मनाभन, डॉ. तपस डे, डॉ. अमरेन्द्र पाणि, डॉ. शिखा धवन, डॉ. पूनम वर्मा, प्रो. डॉ. सौरभ त्रिवेदी, डॉ. नीलाद्रि चौधुरी, आलूर चिन्मय साई गणेश (हैदराबाद), मोहम्मद शहजाद आलम तथा राहुल झा सहित अनेक विशिष्ट विद्वानों, शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने तथा भारत को विश्वस्तरीय नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु अनेक महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए गए। साथ ही विभिन्न संस्थानों एवं विशेषज्ञों के मध्य भविष्य में संयुक्त सहयोग एवं सहभागिता को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों के प्रति सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन हेतु आभार व्यक्त किया गया। उपस्थित प्रतिभागियों ने इस प्रकार के बौद्धिक एवं प्रेरणादायी आयोजनों को विकसित, आत्मनिर्भर, ज्ञानसमृद्ध एवं विश्वगुरु भारत के निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।