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न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

 
 न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से
 ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के तत्वावधान में दिल्ली-एनसीआर की ट्रांसपोर्ट यूनियनों की अहम निर्णय

सी. ए. क्यू. एम  और दिल्ली सरकार द्वारा NGT टैक्स में भारी वृद्धि तथा बी.एस. IV  कमर्शियल वाहनों पर 01.11.2026 से दिल्ली में प्रतिबंध के विरोध में 21.05.2026 से 23.05.2026 तक दिल्ली एन.सी.आर.  के समस्त परिवहन संगठनों द्वारा 
तीन दिवसीय सांकेतिक चक्काजाम|

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (ए.आई.एम.टी.सी. ) भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र के माल एवं यात्री दोनों वर्गों के हितों की रक्षा हेतु वर्ष 1936 से कार्यरत एक शीर्ष संस्था है। एआईएमटीसी लगभग 95 लाख ट्रक चालकों और लगभग 26 लाख निजी बस, टैक्सी एवं मैक्सी-कैब संचालकों का प्रतिनिधित्व करती है, जो देशभर में फैली लगभग 3500 तालुका, ज़िला एवं राज्य स्तरीय परिवहन संघों एवं यूनियनों की शीर्ष इकाई हैं।

डॉ हरीश सभरवाल,  राष्ट्रीय अध्यक्ष - ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (ए.आई.एम.टी.सी.) के नेत्रत्व में 26-04-2026 दिल्ली एवं एनसीआर की सभी प्रमुख ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों और यूनियनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई । इस बैठक में सी.ए.क्यू.एम  एवं दिल्ली सरकार द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ई.सी.सी.) में की गई भारी बढ़ोतरी तथा बी.एस. IV  कमर्शियल वाहनों पर 01.11.2026 से दिल्ली में प्रतिबंध पर विस्तार से चर्चा की गई और इस फैसले के खिलाफ सभी परिवहन संगठनों के पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया और रोष प्रकट किया | 

डॉ हरीश सभरवाल,  राष्ट्रीय अध्यक्ष - ए.आई.एम.टी.सी. ने ई.सी.सी. बढ़ोतरी पर ट्रांसपोर्ट सेक्टर की प्रमुख चिंताएं से अवगत करते हुए कहा “सी. ए. क्यू. एम  की सिफारिश के अनुसार, जो ट्रक दिल्ली में न तो लोड करते हैं और न ही अनलोड, बल्कि सिर्फ दिल्ली को एक कॉरिडोर की तरह पार करके दूसरे राज्यों में माल लेकर जाते हैं, उन्हें ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर भेजने के लिए इस शुल्क में बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया था। इसका ए.आई.एम.टी.सी. ने भी समर्थन किया था।“

माननीय सुप्रीम कोर्ट के भी आदेश के अनुसार ई.सी.सी. बढ़ाने का उद्देश्य केवल उन ट्रकों को हतोत्साहित करने का था, जो बिना किसी काम के दिल्ली से ट्रांजिट होकर गुजरते हैं  | यह व्यवस्था सिर्फ ट्रांजिट वाहनों पर लागू होनी थी, न कि दिल्ली में सामान लाने-ले जाने वाले वाहनों पर, जो दिल्ली की अर्थव्यवस्था को सुचारु बनाने और यहाँ के निवासियों के लिए आवश्यक सामान लाने और ले जाने का कार्य करते हैं।   

लेकिन सी. ए. क्यू. एम  और दिल्ली सरकार ने यह ई.सी.सी. बढ़ोतरी सभी वाहनों पर लागू कर दी है, यहां तक कि उन ट्रकों पर भी जो दिल्ली में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए जरूरी रूप से आते हैं और यहां के निवासियों को आवश्यक सामान पहुंचाते हैं।

यह ट्रक ऑपरेटर्स के साथ अन्याय और विश्वासघात है। यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर चोट करती है| सरकार का यह कदम जमीनी हकीकत से दूर है और दिल्ली में आने वाली सभी आवश्यक वस्तुओं की  सप्लाई चेन पर नकारात्मक असर पड़ेगा |”

 कुलतारण सिंह अटवाल, अध्यक्ष – फेडरैशन ऑफ संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर, दिल्ली एव पूर्व अध्यक्ष - ए.आई.एम.टी.सी., ने दिल्ली में कमर्शियल वाहनों पर सी.ए.क्यू.एम  व दिल्ली नगर निगम द्वारा पर्यावरण शुल्क (ई.सी.सी.) हल्के कमर्शियल वाहनों (एल.सी. वी.) पर 1400 रुपये से बढ़ाकर करीब 2000 रुपये कर दिया गया है, वहीं भारी ट्रकों के लिए यह शुल्क 2600 रुपये से बढ़ाकर सीधे  बताया कि “राजधानी 4000 रुपये तक पहुंच गया है | कुल मिलाकर इस फैसले से 40 से 55 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है| इस फैसले को लेकर देशभर के परिवहन संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है और विरोध तेज होने के संकेत भी मिल रहे हैं |”

 गुंजीत सिंह सांघा, अध्यक्ष – ट्रांसपोर्ट वेल्फेयर सोसाइटी,  संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर ने कहा “2015 से ई.सी.सी. के नाम पर हमसे करोड़ों रुपये वसूले गए हैं लेकिन इसके बावजूद वायु गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं देखने को मिला है| यह करोड़ों रुपये का ई.सी.सी. का दिल्ली में प्रदूषण कि रोकथाम में कहाँ उपयोग हुआ, कुछ पता नहीं |

 ई.सी.सी. सिर्फ राजस्व अर्जित करने का माध्यम बन गया है |”

डॉ हरीश सभरवाल,  राष्ट्रीय अध्यक्ष – ए.आई.एम.टी.सी. ने बताया कि “सी. ए. क्यू. एम  के संशोधित आदेश संख्या 88 (पत्र क्रमांक फ़. नं. ए-11018/01/2021-सी. ए. क्यू. एम -1430, दिनांक 17.10.2025) के तहत 01 नवम्बर 2026 से दिल्ली-एनसीआर में बी.एस.-VI, सी.एन.जी.  एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को छोड़कर अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत बी.एस.-IV और उससे नीचे के मानकों के कमर्शियल वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।

बी.एस.-IV एवं उससे नीचे के मानकों के कमर्शियल वाहनों पर लगाए गए इस पूर्ण प्रतिबंध से देश के लाखों छोटे एवं माध्यम वर्ग  के परिवहन संचालकों की आजीविका, आर्थिक स्थिति और लॉजिस्टिक प्रणाली पर गंभीर एवं व्यापक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।  साथ ही उनके परिवारों की आजीविका और भरण-पोषण इस पूर्ण प्रतिबंध से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा|

उक्त आदेश अंतर्विरोध से युक्त है, क्योंकि देशभर में बी.एस.-VI वाहन 1 अप्रैल 2020 से लागू किए गए थे। उससे पूर्व बी.एस.-IV वाहन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित थे और उन्हें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 15 वर्षों की वैधता प्रदान की गई थी, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 10 वर्षों तक सीमित है|”

 श्याम सुन्दर, अध्यक्ष – दिल्ली एन.सी.आर.  ट्रांसपोर्ट एकता मंच “वर्तमान स्थिति में बी.एस.-IV एवं बी.एस.-VI वाहन, जिनका दिल्ली में कोई कार्य नहीं है, एक्सप्रेसवे के माध्यम से सफलतापूर्वक डायवर्ट हो रहे हैं।  बी.एस.-IV वाहन, जो एड-बल्यू तकनीक का उपयोग करते हैं, को स्वच्छ ईंधन विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया था। ऐसे वाहनों पर, वैध पी.यू.सी.सी. प्रमाणपत्र होने के बावजूद, दंडात्मक कार्रवाई न केवल अनुचित है, बल्कि नीतिगत असंगति भी दर्शाती है। यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के भी विपरीत है, जिसमें बीएस-4 वाहनों को दिल्ली-एनसीआर में 10 वर्षों तक संचालित करने की अनुमति दी गई है|

 केवल रजिस्ट्रेशन कैटेगरी के आधार पर बी.एस.-IV वाहनों पर प्रतिबंध लगाना वैज्ञानिक रूप से भी सही तरीका नहीं है और इस विषय पर कोई वैज्ञानिक स्टडी नहीं है। किसी वाहन से निकलने वाला धुआं (प्रदूषण) केवल उसकी उम्र पर नहीं, बल्कि उसके मेक, मॉडल, चले हुए किलोमीटर और उसकी फिटनेस पर भी निर्भर करता है|”

 मोहन सिंह, अध्यक्ष – राष्ट्रीय ट्रक ऑपरेटरस वलफ़ेयर एसोसिएशन (आर.टी.ओ.डब्ल्यू.ए.) ने कहा कि “हल्के शहरी ट्रैफिक में बी.एस.-IV और बी.एस.-VI डीज़ल वाहनों का प्रदूषण लगभग समान होता है। बी.एस.-IV और बी.एस.-VI दोनों वाहनों में एग्जॉस्ट आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम लगे होते हैं। सरकार को कार्रवाई वास्तविक प्रदूषण (टेलपाइप एमिशन) के आधार पर करनी चाहिए, जैसा कि मोटर वाहन अधिनियम में प्रावधान है, न कि सभी बी.एस.-IV या उससे नीचे के वाहनों पर एकसमान प्रतिबंध लगाना चाहिए।
इस आदेश के लागू होने से 2020–21 मॉडल के बी.एस.-4 वाहनों की आयु प्रभावी रूप से केवल 5 वर्ष रह जाएगी, जो अत्यंत अन्यायपूर्ण है और इससे  ईएमआई डिफॉल्ट, आर्थिक संकट, सिबिल स्कोर में गिरावट एवं दिवालियापन जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है|”

डॉ हरीश सभरवाल,  राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि “पहले से ही महंगाई और बढ़ती ईंधन कीमतों से जूझ रहे ट्रांसपोर्टर्स पर यह निर्णय अतिरिक्त बोझ डालेगा, माल ढुलाई महंगी होने से आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे, जिसका सीधा असर आम जनता और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर पड़ेगा | उन्होंने जोर दिया कि बी.एस.-VI वाहन अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं और प्रदूषण कम करते हैं, इसलिए उन पर ई.सी.सी. लगाना उचित नहीं है।

उन्होने कहा कि “दिल्ली एन.सी.आर.  के लगभग 62 संगठनों ने भाग लिया और सभी ने गहरी चिंता और रोष व्यक्त करते हुए माना है कि उक्त तुकलकी फरमान से परिवहन व्यवसाय पर, और विशेषकर छोटे व्यवसाइयों पर, गंभीर आर्थिक बोझ पड़ेगा और पूरे व्यापार तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

 सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि सी. ए. क्यू. एम  और दिल्ली नगर निगम द्वारा दिल्ली में आने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर ई.सी.सी. में की गई बढ़ोतरी को वापस नहीं लिया गया और इसे केवल ट्रांजिट वाहनों तक सीमित नहीं किया गया, तथा बी.एस.-IV वाणिज्यिक वाहनों के दिल्ली में 01.11.2026 से प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस नहीं लिया गया, तो दिल्ली-एनसीआर के समस्त परिवहन व्यवसायी 21.05.2026 से 23.05.2026 तक अपना परिवहन कार्य बंद कर सांकेतिक हड़ताल करेंगे।

डॉ. हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष - ए.आई.एम.टी.सी. ने बताया कि दिल्ली एन.सी.आर.  की समस्त ट्रांसपोर्ट संस्थाएं ट्रांसपोर्ट एकमत हैं कि अगर सरकार उनकीं मांगें नहीं मानतीं तो वे अनिश्चितकालीन चक्का जाम पर जाने पर मजबूर होंगें |

प्रमुख मांगें :

दिल्ली गंतव्य वाले ट्रकों या खाली वाहन जो दिल्ली में लोडिंग के लिए आते हैं उन पर बढ़ा हुआ ई.सी.सी. लागू न किया जाए।

बढ़ा हुआ ई.सी.सी. सिर्फ ट्रांजिट वाहनों पर ही लागू हो|
ट्रांजिट वाहनों की पहचान के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

बी.एस.-VI वाहनों को ई.सी.सी. से पूरी तरह छूट दी जाए।

दिल्ली-एनसीआर में सी. ए. क्यू. एम  द्वारा बी.एस.-IV वाहनों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को वापस लिया जाए, क्योंकि यह छोटे ऑपरेटरों के लिए अन्यायपूर्ण और आजीविका पर आघात है ।

 वैध पी.यू.सी.सी. धारक बी.एस.-IV वाणिज्यिक वाहनों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत जीवनकाल तक दिल्ली-एनसीआर में संचालन की अनुमति दी जाए 

चरणबद्ध प्रतिबंध नीति अपनाई जाए - जैसे-जैसे बी.एस.-IV वाहन 10 वर्षों की आयु पूरी करें, वैसे-वैसे उन्हें दिल्ली-एनसीआर से हटाया जाए ।

डॉ हरीश सभरवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट काँग्रेस पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन ऐसे निर्णय जो लाखों परिवहन संचालकों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, उन्हें संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ लागू किया जाना चाहिए।