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न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

 “लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ संकट में: पत्रकारों के अधिकार, सम्मान और अस्तित्व की निर्णायक लड़ाई” 🔥
 
 न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से
 “आज के पत्रकारों को भारतीय पत्रकारिता के मूल्यों और इतिहास को समझना अनिवार्य” – सरदार चरणजीत सिंह
 नई दिल्ली | 26 अप्रैल 2026

भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) दिल्ली प्रदेश की एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली बैठक का आयोजन राजधानी दिल्ली के टैगोर गार्डन स्थित रुस्तम-ए-हिन्द मीडिया हाउस में किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अवध नारायण पत्रकार ने की, जिसमें देश के विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े वरिष्ठ पत्रकारों, संपादकों और मीडिया प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बैठक में वरिष्ठ पत्रकार रमेश चंद्र द्विवेदी, सुशील खन्ना, रुस्तम-ए-हिन्द के संपादक सरदार चरणजीत सिंह, प्रमोद कुमार चौहान, सुमित भोजगी, रजनीश कुमार, रवि समानियाँ, अनिल कुमार शर्मा, वरुण कथूरिया, आर.के. राठौर, सत्य प्रकाश सक्सेना, महेंद्र सिंह विर्दी, वंदना शर्मा, पंकज भट्टी, लक्ष्मी वर्मा, सोनम ठाकुर, सौरभ गुप्ता, ऋषभ सहित अनेक पत्रकारों ने सहभागिता करते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।

📰 पत्रकार: समाज की आँख और कान, लेकिन खुद असुरक्षित क्यों?

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, लेकिन आज यही स्तम्भ कई गंभीर चुनौतियों और संकटों से घिरा हुआ है। पत्रकार निस्वार्थ भाव से समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अन्याय, कुरीतियों और असामाजिक गतिविधियों को उजागर करते हैं, जनता की आवाज बनते हैं—लेकिन उनकी अपनी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है।

⚖️ पत्रकारों के संवैधानिक और मौलिक अधिकार

भारत में पत्रकारों को प्रत्यक्ष रूप से अलग से कोई विशेष “पत्रकार कानून” भले न हो, लेकिन उन्हें संविधान द्वारा निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:

अनुच्छेद 19(1)(a) – अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21 – जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार
सूचना का अधिकार (RTI Act, 2005) – सूचना प्राप्त करने का अधिकार
कार्यस्थल पर सुरक्षा और गरिमा का अधिकार

👉 इन अधिकारों के बावजूद, जमीनी स्तर पर पत्रकारों को अक्सर इनका लाभ नहीं मिल पाता।

🚨 पत्रकारों की प्रमुख समस्याएं – एक कड़वी सच्चाई

आज देशभर में पत्रकार निम्नलिखित गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं:

1. आर्थिक असुरक्षा
छोटे और मध्यम समाचार पत्रों को सरकारी विज्ञापन नहीं मिलते
कई पत्रकारों को महीनों तक वेतन नहीं मिलता
फ्रीलांस पत्रकारों के लिए कोई स्थायी आय नहीं
2. सुरक्षा का अभाव
रिपोर्टिंग के दौरान हमले, धमकियां, हत्या तक की घटनाएं
पुलिस और प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा नहीं
3. राजनीतिक और कॉर्पोरेट दबाव
खबरों को दबाने या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने का दबाव
स्वतंत्र पत्रकारिता पर नियंत्रण
4. कानूनी संरक्षण की कमी
मानहानि और फर्जी मुकदमों में फंसाना
पत्रकारों के लिए कोई विशेष सुरक्षा कानून का अभाव
5. मान्यता और सम्मान की कमी
छोटे मीडिया हाउस और ग्रामीण पत्रकारों को मान्यता नहीं
प्रेस कार्ड और सरकारी सुविधाओं में भेदभाव
🧭 पत्रकारिता के मूल्यों और इतिहास को समझना जरूरी

इस अवसर पर रुस्तम-ए-हिन्द के संपादक सरदार चरणजीत सिंह ने कहा:

“आज के पत्रकारों को भारतीय पत्रकारिता के मूल्यों, इतिहास और उसकी गरिमा को समझना होगा। पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि निष्पक्षता, सत्यता, निर्भीकता और जनहित—ये चार स्तम्भ पत्रकारिता की आत्मा हैं, जिन्हें हर पत्रकार को अपनाना चाहिए।

🤝 संगठन ही शक्ति है – एकजुटता का संदेश

भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अवध नारायण पत्रकार ने स्पष्ट किया कि पत्रकारों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए संगठित होना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में दिल्ली प्रदेश की एक मजबूत टीम के गठन पर भी चर्चा की गई, जिससे पत्रकारों की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।

🏅 सम्मान और सहयोग का संकल्प

इस बैठक में विशेष अतिथि के रूप में दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग उपस्थित रहे। उन्होंने पत्रकारों को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और सभी को अपने कार्यालय आने का निमंत्रण भी दिया।

इस अवसर पर उन्होंने पत्रकारों को “रुस्तम-ए-हिन्द वेस्ट पत्रकार अवॉर्ड” मैडल पहनाकर सम्मानित किया, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान का प्रतीक है।

📢 अंतिम आह्वान: पत्रकारों को अब उठना होगा

आज समय की मांग है कि सभी पत्रकार—चाहे वे छोटे हों या बड़े मीडिया संस्थानों से जुड़े—एक मंच पर आएं और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करें।

👉 अगर पत्रकार ही कमजोर हो जाएगा, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी।
👉 अगर कलम पर दबाव होगा, तो सच्चाई दब जाएगी।

इसलिए—एकजुट हों, संगठित हों, और अपने अधिकारों के लिए खड़े हों।