न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

संविधान के अनुच्छेद 15.2 उल्लंघन करके सबरी माला मन्दिर पर हमला किया जा रहा है- हिन्दू संगठन
संविधान का अनुच्छेद 15.2 धर्म लिंग के आधार पर होटलों, रेस्टोरेन्ट में भेदभाव की मनाही करता है। यह मन्दिरों पर लागू ही नहीं होता- हिन्दू संगठन
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्ना कुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में सबरीमाला मन्दिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश देने से राकने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में हो रही सनवाई संविधान के अनुच्छेद 15.2 का सरासर उल्लंघन बताया।
बैठक में दारा सेना के अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि हमने इस मामले में एक पत्र याचिका सर्वोच्च न्यायालय में लगाई है, जिसे सुनवाई कर रहे सभी 9 न्यायधीशों को भेजा गया। जिसमें हमने लिखा है कि संविधान के अनुच्छेद 15.2 में उन स्थानों का स्पष्ट उल्लेख है कि नागरिको को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता। संविधान में उल्लेख किये इन स्थानों में मन्दिर है ही नहीं। साफ सी बात हे कि संविधान के अनुसार मन्दिर में प्रवेश करने से किसी भी व्यक्ति को धर्म या लिंग के आधार पर रोका जा सकता है। उसके बावजूद भी हमारे केरल के वकीलों की संस्था ने सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा डाला हैं। जिसके जरिये पूर्व की 5 सदस्यीय संविधान पीठ और इस 9 सदस्यीय संविधान पीठ का अमूल्य समय बर्बाद करके न्यायालय में लम्बित मामलों की सुनवाई में ओर विलम्ब किया जा रहा है।
बैठक में हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विष्णु गुप्ता ने कहा कि हमारे वकील और न्यायधीश संविधान का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन करके हिन्दू धर्म पर साजिशन हमला कर रहे हैं। लगता है कि इन्हांने संविधान कभी पढ़ा ही नहीं। दीवाली के पटाखों से वायु गुणवत्ता सूचकांक में किसी भी प्रकार का परिवर्तन न होने के बावजूद भी हिन्दू विरोधी जज अभय श्रीनिवास ओका और ईसाई आंगस्टीन जॉर्ज मसीह दिवाली के पटाखों पर रोक लगाते है। हिन्दू धर्म को न मानने वाला जज जे बी पारदीवाला हमारे भैरव की सवारी कुत्तो पर अत्याचार करता है। कानून का उल्ंलघन करके उन्हे पकड़े गये स्थान पर न छोड़ने का आदेश देता हैं। सुनवाई पूरी होने के बावजूद भी ये जज सबरीमाला मन्दिर, दिवाली के पटाखो और कुत्तो पर अत्याचार सम्बन्धी पुनर्विचार याचिका को साजिशन जानबूझकर लटकाकर हिन्दू धर्म पर हमला जारी रखे हुए है। जो बर्दास्त से बाहर है।
हिन्दू संगठनो ने सर्वौच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश श्री सूर्य कान्त शर्मा जी से अनुरोध किया कि वें सी आई ए की साजिश और फंडिंग से सर्वोच्च न्यायालय में हिन्दू धर्म के खिलाफ जजों और वकीलों की साजिश को वक्त रहते नेस्तनाबूत करने की कृपा करे। अंग्रेजों ने भी हिन्दू और मुस्लिम सैनिकों को गाय और सूअर की चर्बी लगे कारतूस दांतों से कुतरने का आदेश दिया था जिसके बहुत भंयकर दुष्परिणाम हुए थे।

