न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

स्वामी ओम जी की चेतावनी जज! सबरी माला मन्दिर को अपवित्र करने से बाज आयें अन्यथा महाप्रलय आयेगा सच हुई थी।
स्वामी ओम का श्राप सबरीमाला अय्यप्पा भगवान के ब्रह्मचर्य व्रत में खलल डाल रहे|
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुन्ना कुमार शर्मा जी की अध्यक्षता में हुई हिन्दू संगठनों की बैठक में सबरीमाला मन्दिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश देने से राकने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय में हो रही सनवाई पर चर्चा की गई।
बैठक में श्री मुन्ना कुमार शर्मा ने चिन्ता जतायी कि जिस प्रकार से सबरी माला मन्दिर मामले में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों ने संविधान का उल्लंघन करके अपने आपको कानून और सरकार से उपर समझकर सबरीमाला मन्दिर की पवित्रता को नष्ट करने की साजिश रची उससे भगवान अय्यप्पा के कोप का भाजन केरल को होना पड़ा था और केरल में 8 अगस्त 2018 को महाप्रलय आया।
बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने बताया कि सबरी मन्दिर मामले में मैं और स्वामी ओम जी भी पक्षकार थे। मैंने दीपक मिश्रा जी की पीठ के समक्ष दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 15.1 के अनुसार मन्दिर में लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। मन्दिर में स्त्री और पुरूष दोनों जा सकते है। केवल 10 से 50 साल की रजस्वला व्य की स्त्रियों को प्रवेश की मनाही है। इसी संविधान का अनुच्छेद 15.3 कहता है कि औरतों ओर बच्चों के लिये अलग नियम बनाये जा सकते हैं। जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने माना था। वैसे भी कोई भी रजस्वला महिला हिन्दू धर्म का पालन करते हुए किसी भी मन्दिर में नहीं जाती। स्वामी ओम जी ने भी सर्वोच्च न्यायालय की तत्कालीन प्रधान न्यायधीश दीपक मिश्रा जी की पीठ के समक्ष 1 अगस्त 2018 को कहा था कि 2 दिन पूर्व सोमवार को भगवान अय्यप्पा ने उन्हें दर्शन देकर कहा कि तुम जजों को जाकर समझाओं कि वें मेरे मन्दिर में रजस्वला व्य की महिलाओं को भेजकर मन्दिर को अपवित्र कराने की अपनी जिद छोड़ दे अन्यथा महा प्रलय आयेगा। किन्तु भगवान और हिन्दुत्व से नफरत करने वाले दीपक मिश्रा और धनन्जय यशवन्त चन्द्रचूड़ ने भगवान अय्यप्पा की चेतावनी का उपहास उड़ाकर मुझे और स्वामी ओम जी को सुरक्षाकर्मी बुलाकर न्यायालय ये बाहर निकलवा दिया। जिससे भगवान अय्यप्पा कूपित हुए और केरल में एक सप्ताह बाद ही महाप्रलय आ गया। केरल के इतिहास में इतनी बड़ी बाढ़ कभी नहीं आयी थी। स्वामी ओम जी इन जजों को श्राप भी दिया था कि यें जज नपुंसक हो जायेंगे।
बैठक में अटल जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बम बम महाराज ने कहा कि 2018 में सी आई ए के ऐजेन्ट इन्डियन यंग लायर्स एसोसिएशन के मुस्लिम वकील नदीम अहमद और सी आई ए की फन्डिंग से जजों को मैनेज करने वाली सर्वोच्च न्यायालय की नक्सली आतंकवादी वकील इन्दिरा जयसिंह की सबरीमाला मन्दिर में रजस्वला महिलाओं को प्रवेश कराने सम्बन्धी याचिका 373/2006 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों ने जिस प्रकार से संविधान के धार्मिक मूलाधिकार सम्बन्धी अनुच्छेद 25 और 26 ख का हनन् किया वह भारत के लोकतन्त्र के लिये गम्भीर खतरा है। श्री बम बम महाराज ने बताया कि न्यायधीश अच्छी प्रकार से जानते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 26 ख के तहत अपने धार्मिक कार्यो के प्रबन्धन का मूल अधिकार धार्मिक संस्थाओं का है और लोक व्यवस्था बिगाडकर किसी भी व्यक्ति या महिला को अनुच्छेद 25 में दिये अपने धार्मिक मूलाधिकार का पालन करने की अनुमति भी भारतीय संविधान नहीं देता।
बैठक में हिन्दू संगठनों ने आशा व्यक्त की कि सर्वोच्च न्यायालय की 9 न्यायधीशों की पीठ स्वामी ओम जी द्वारा बताई भगवान अय्यप्पा की जल प्रलय की चेतावनी के फलीभूत होने और मन्दिर की पवित्रता नष्ट करने की सोच रखने वाले जजों के नपुंसक होने के स्वामी ओम जी के श्राप को ध्यान में रखते हुए ऐसा कोई कदम नहीं उठायेंगे जिससें इस बार सर्वोच्च न्यायालय के जजों को भगवान अय्यप्पा के कोप का भाजन होना पड़े।

