न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

आने वाली फिल्म Dhurandhar में अपने आइकॉनिक किरदार के लिए चर्चित राकेश बेदी पूरे जोश और ऊर्जा के साथ मंच पर पहुंचे और तुरंत ही दर्शकों का दिल जीत लिया। अपनी खास अंदाज़ में उन्होंने बातचीत की शुरुआत मशहूर डायलॉग “अस्सलाम-ओ-अलैकुम, ल्यारी दिल्ली में है!” से की, जिसे सुनकर पूरा हॉल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने महिला सशक्तिकरण पर एक बेहद भावनात्मक और प्रभावशाली कविता सुनाई, जिसमें महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और गरिमा का सुंदर वर्णन किया गया।
राकेश बेदी वर्ष 2020 से Cittamindful Trust के साथ जुड़े हुए हैं और लगातार मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और भावनात्मक कल्याण के मिशन का समर्थन करते आ रहे हैं। इस संस्था की स्थापना Dr. Manika Pal और Dr. Aditi Grover ने की थी।
Cittamindful Trust का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को हर व्यक्ति तक पहुँचाना है। यह संस्था ग्रामीण और शहरी दोनों समुदायों के लोगों को निःशुल्क काउंसलिंग सेवाएँ प्रदान करती है। अब तक यह ट्रस्ट 78,000 से अधिक लोगों को मानसिक और भावनात्मक रूप से सहयोग और उपचार प्रदान कर चुका है, जिससे लोगों को अपनी भावनाएँ साझा करने, बेहतर होने और आगे बढ़ने के लिए एक सुरक्षित मंच मिला है।
यह कॉन्क्लेव इस बात का एक सशक्त संदेश था कि सामूहिक संवेदना, जागरूकता और मिलकर किए गए प्रयास समाज में सकारात्मक और सार्थक बदलाव ला सकते हैं।

