Pal Pal India

न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

  ऐतिहासिक सम्मान: मानवाधिकार योद्धा सरदार चरणजीत सिंह स्वामी IHRA के ग्लोबल सचिव पद पर आसीन!
 
 न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

ई दिल्ली, 21 जनवरी  समाज सेवा की मिसाल कायम करने वाले और मानवाधिकारों के अटूट योद्धा सरदार चरणजीत सिंह स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द हिंदी समाचार पत्र को आज एक नई ऊंचाई मिली है। IHRA (International Human Rights Commission) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम. यू. दुआ ने उन्हें संगठन का ग्लोबल सचिव पद पर मनोनीत कर सम्मानित किया।
यह ऐतिहासिक समारोह भारत के सुप्रीम कोर्ट में आयोजित हुआ, जहां राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह नियुक्ति न केवल सरदार चरणजीत सिंह की 40 वर्षों की अथक समाज सेवा का सम्मान है, बल्कि मानवाधिकारों के क्षेत्र में भारत की मजबूत आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करेगी।सरदार चरणजीत सिंह, जो दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द हिंदी समाचार पत्र के स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक और संपादक हैं, समाज के हर वर्ग की सेवा में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
एक फिजिशियन डॉक्टर के रूप में उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान दिया है, जबकि राजनीतिक मोर्चे पर वे 1996 से पश्चिम दिल्ली से सांसद चुनाव लड़ते हुए देशभक्ति की मिसाल पेश कर रहे हैं।
एक राजनेता और अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में, वे लगातार सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते रहे हैं, जो उन्हें इस प्रतिष्ठित पद के लिए आदर्श बनाती है।

इस नियुक्ति के अवसर पर IHRA अध्यक्ष एम. यू. दुआ ने कहा कि सरदार चरणजीत सिंह की समाज सेवा और मानवाधिकारों के प्रति समर्पण अद्वितीय है। उन्होंने पिछले चार दशकों में समाज के कमजोर वर्गों के लिए जो कार्य किया है, वह प्रेरणादायक है।
समारोह में उपस्थित गणमान्यों ने इस फैसले की सराहना की और इसे वैश्विक मानवाधिकार आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
सरदार चरणजीत सिंह की उपलब्धियां किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं।
वे एक सच्चे देशभक्त के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने अनेक चर्चित मामलों में न्याय की आवाज बुलंद की है।
सबसे यादगार संघर्ष रहा तीन कृषि कानूनों के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में भारत सरकार के विरुद्ध उठाया गया मुद्दा।
इस केस में उनकी दृढ़ता के कारण भारत सरकार को मुंह की खानी पड़ी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीनों कानून वापस लेने पड़े।
यह किसानों की जीत थी, जो सरदार चरणजीत सिंह की नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।इसके अलावा, वे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों को ब्रिटिश सरकार से मुआवजा दिलवाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।
महाराष्ट्र में इटली से आयातित जनविरोधी केमिकल फैक्ट्री को बंद करवाने की प्रक्रिया भी उनके प्रयासों से आगे बढ़ रही है।
NTPC से 96 पूर्व सैनिकों को उनके हक दिलवाने का संघर्ष जारी है, जबकि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के माध्यम से सिख समुदाय की सभी विरासतों को बचाने की लड़ाई में वे दिल्ली की संगत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
यह नियुक्ति न केवल सरदार चरणजीत सिंह के व्यक्तिगत सम्मान की बात है, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों का प्रतीक है जो न्याय और समानता की लड़ाई लड़ रहे हैं।
दैनिक रुस्तम-ए-हिन्द परिवार इस गौरवपूर्ण क्षण पर गर्व महसूस कर रहा है और सरदार चरणजीत सिंह को हार्दिक बधाई देता है।
यह पद उन्हें वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा करने का नया अवसर प्रदान करेगा, और हम आशा करते हैं कि उनके नेतृत्व में IHRA नई ऊंचाइयों को छुएगा।