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न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से

 
 न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना की कलम से
 नई दिल्ली, 29 सितंबर  नन्हीं कुमारी में बसती है माँ की महाशक्तिनवरात्र में कन्या पूजन का शास्त्रीय और सामाजिक महत्त्व* 

हेरिटेज एंड कल्चर के प्रेसिडेंट डॉ. राघव नाथ झा ने कहा कि नवरात्रि केवल माँ दुर्गा की अर्चना का ही पर्व नहीं है, बल्कि यह नारी-शक्ति के सम्मान का भी महान अवसर है। शास्त्रों में नन्हीं बालिकाओं को माँ दुर्गा की महाशक्ति का स्वरूप माना गया है।डॉ. झा ने कहा कि नवरात्र के नौ दिनों में यदि संभव हो तो प्रतिदिन कुमारी पूजन किया जाना चाहिए, अन्यथा महा सप्तमी, महा अष्टमी अथवा महानवमी के दिन नौ कन्याओं का पूजन कर महापर्व का समापन करना चाहिए। उन्होंने कहा—
“आज के व्यस्त जीवन में हम अक्सर केवल एक बार कन्या पूजन करके इसे परंपरा पूर्ण मान लेते हैं, जबकि इसका वास्तविक स्वरूप केवल नौ दिन का अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन भर नारी-शक्ति के सम्मान के आचरण से जुड़ा है।”शास्त्रीय सन्दर्भशिवपुराण में कहा गया है कि—
“कन्याभिः पूजिता देवी पूजिता सर्वदेवताः।”
अर्थात कन्याओं के पूजन से सभी देवताओं की पूजा होती है और माता प्रसन्न होती हैं।देवी भागवत महापुराण में लिखा गया है—
“कन्यापूजनमात्रेण सर्वपापैः प्रमुच्यते।”
अर्थात कन्या पूजन करने से मनुष्य पापों से मुक्त होकर अपार पुण्य और समृद्धि प्राप्त करता है।पूजन का विधानशास्त्रीय नियम के अनुसार एक से दस वर्ष तक की कन्याओं का पूजन श्रेष्ठ माना गया है। इसके अंतर्गत कन्याओं के चरण धोकर गंध, पुष्प और अक्षत अर्पित किए जाते हैं, उन्हें मिष्ठान्न भोजन कराकर तथा वस्त्र और दक्षिणा देकर सम्मानित किया जाता है।डॉ. झा ने आह्वान किया कि समाज को सनातन परंपरा के इस अमूल्य संदेश को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन में निभाना चाहिए। यही हमारी संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है