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चंडीगढ़ से लेकर हरियाणा गठन तक चौधरी रणजीत सिंह ने खोले इतिहास के अनछुए पन्ने

 क्षेत्रीय दलों का दौर ढल रहा है, देश दो-दलीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है: चौधरी रणजीत सिंह
 
 चंडीगढ़ से लेकर हरियाणा गठन तक चौधरी रणजीत सिंह ने खोले इतिहास के अनछुए पन्ने
 --पल पल न्यूज: सिरसा, 31 मई।

पल-पल के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया के साथ विशेष बातचीत में हरियाणा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल पूर्व मंत्री एवं पूर्व सांसद चौधरी रणजीत सिंह ने विभाजन के बाद पंजाब, हरियाणा के गठन, चंडीगढ़ की स्थापना, भाखड़ा-नांगल परियोजना तथा प्रदेश की राजनीति के अनेक अनछुए पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत में चौधरी रणजीत सिंह ने इतिहास, राजनीति और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को सहज शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि देश के विभाजन के बाद पंजाब की राजधानी पहले शिमला रही, लेकिन बाद में शिवालिक पर्वतमाला की तलहटी में आधुनिक शहर चंडीगढ़ बसाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह केवल एक शहर नहीं था, बल्कि नए भारत के निर्माण की महत्वाकांक्षा का प्रतीक था। इसी दौर में भाखड़ा-नांगल बांध जैसी विश्वस्तरीय परियोजना अस्तित्व में आई, जिसने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कृषि एवं औद्योगिक विकास की दिशा बदल दी। बातचीत में पूर्व मंत्री चौ. रणजीत सिंह ने संयुक्त पंजाब की राजनीति का भी उल्लेख हुआ। चौधरी रणजीत सिंह ने बताया कि किस प्रकार चौधरी देवीलाल संयुक्त पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने और उस समय के मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरों के साथ उनके राजनीतिक मतभेद चर्चा का विषय बने। हालांकि राजनीतिक संघर्ष के बावजूद दोनों नेताओं के व्यक्तिगत संबंधों में कटुता नहीं आई। उन्होंने एक रोचक प्रसंग सुनाया कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद चौधरी देवीलाल स्वयं सुबह-सुबह प्रताप सिंह कैरों के निवास पर पहुंचे, दोनों ने साथ बैठकर चाय पी और आपसी मतभेदों को पीछे छोड़ दिया। हरियाणा गठन के समय की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए चौधरी रणजीत सिंह ने बताया कि किस प्रकार भगवत दयाल शर्मा, चौधरी देवीलाल और अन्य नेताओं के बीच राजनीतिक खींचतान के माहौल में चौधरी बंसीलाल पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने उस दौर की राजनीतिक रणनीतियों और नेतृत्व की शैली का भी उल्लेख किया। बातचीत केवल राजनीति तक सीमित नहीं रही। चौधरी रणजीत सिंह ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को सांझा किया और बताया कि किस प्रकार बादल परिवार के साथ उनके पारिवारिक संबंध रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मंत्री स्वर्गीय जगदीश नेहरा तथा देश के अनेक वरिष्ठ नेताओं के साथ बिताए समय को भी याद किया। अंत में सुरेंद्र भाटिया ने उनसे वर्तमान और भविष्य की राजनीति पर सवाल किया। जिसका उत्तर देते हुए चौधरी रणजीत सिंह ने कहा कि देश धीरे-धीरे दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी पार्टियां मजबूत हो रही हैं, जबकि क्षेत्रीय दलों का प्रभाव समय के साथ सीमित होता जा रहा है। इतिहास, राजनीति और व्यक्तिगत अनुभवों का यह संगम न केवल नई पीढ़ी को अतीत से परिचित कराता है, बल्कि यह भी बताता है कि राजनीति में मतभेदों के बावजूद संवाद और संबंधों की गरिमा किस प्रकार बनाए रखी जा सकती है।

बॉक्स-1

चंडीगढ़ और भाखड़ा-नांगल: नए भारत की पहचान

विभाजन के बाद पंजाब की नई राजधानी के रूप में चंडीगढ़ का निर्माण।

शिवालिक की तलहटी में आधुनिक शहर बसाने का निर्णय।

भाखड़ा-नांगल परियोजना ने उत्तर भारत की कृषि और उद्योग को नई दिशा दी।

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के विकास में ऐतिहासिक योगदान।

बॉक्स-2

हरियाणा गठन और बंसीलाल का उदय

हरियाणा गठन के समय राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव।

भगवत दयाल शर्मा और चौधरी देवीलाल के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा।

परिस्थितियों के बीच चौधरी बंसीलाल का मुख्यमंत्री के रूप में उभरना।

हरियाणा की प्रशासनिक और विकासात्मक राजनीति का नया अध्याय