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इसी साल दिसंबर में होगा गगनयान का पहला परीक्षणः वी नारायणन

 
  इसी साल दिसंबर में होगा गगनयान का पहला परीक्षणः वी नारायणन
नई दिल्ली, 21 अगस्त भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि गगनयान का पहला परीक्षण इसी साल दिसंबर में किया जाएगा। यह परीक्षण गगनयान 2027 का हिस्सा है, जिसमें एक रोबोट को अतंरिक्ष में भेजा जाएगा। गुरुवार को मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में वी. नारायणन ने बताया कि भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन श्रृंखला की तैयारी के लिए लगभग 80 प्रतिशत तकनीकी परीक्षण पूरे हो चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष के अंत तक शेष 20 प्रतिशत परीक्षण भी पूरा करने का लक्ष्य है। गगनयान का पहला मानवरहित परीक्षण, जिसमें सेंसर से लैस एक मानवरूपी रोबोट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस प्रेसवार्ता में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और ग्रुप कैप्टन प्रशांत बी. नायर भी मौजूद रहे।
इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने अंतरिक्ष एजेंसी की चल रही और आगामी परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट ने 30 जुलाई को प्रतिष्ठित नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) उपग्रह को सफलतापूर्वक स्थापित किया। नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) और इसरो के इस संयुक्त उपग्रह का संचालन सुचारू रूप से हो रहा है। अगले दो से तीन महीनों में इसरो अमेरिका के लिए अपने एक प्रक्षेपण यान से 6500 किलोग्राम का संचार उपग्रह प्रक्षेपित करेगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति मिली है। नारायणन ने कहा कि 10 साल पहले देश में सिर्फ एक स्पेस स्टार्टअप था, लेकिन आज प्रधानमंत्री मोदी कार्यकाल में 300 से ज्यादा स्टार्टअप्स अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं। निजी कंपनियों ने अब तक दो सब-ऑर्बिटल मिशन पूरे किए हैं। यह दिखाता है कि भारत की स्पेस इकोनॉमी लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इसका और विस्तार होगा।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने इस मौके पर खुलासा किया कि एक्सिओम स्पेस के एएक्स-4 मिशन की लॉन्चिंग से पहले ऐन वक्त पर यदि इसरो के वैज्ञानिकों ने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो यह "विनाशकारी" हो सकता था और मिशन में शामिल सभी चार अंतरिक्ष यात्रियों की जान जा सकती थी। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) ले जाने वाले रॉकेट की मुख्य फीड लाइन में एक दरार पाई गई थी, जिसे इसरो के वैज्ञानिक ने ठीक किया।