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फादर्स डे विशेष पिता को आखिर चाहिए क्या? — मनोविज्ञान की दृष्टि से काउंसलर कंचन मेहता

 
  फादर्स डे विशेष पिता को आखिर चाहिए क्या? — मनोविज्ञान की दृष्टि से काउंसलर कंचन मेहता

आज का आधुनिक युग अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और बेहतर जीवन की तलाश में लोग अपने घरों और परिवारों से दूर होते जा रहे हैं। महानगरों की व्यस्त दिनचर्या, लंबी यात्राएं, बढ़ता कार्यभार और मोबाइल आधारित जीवनशैली ने समय को इतना सीमित कर दिया है कि परिवार के लिए कुछ पल निकालना भी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे समय में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले लोगों में हमारे माता-पिता शामिल हैं।
फादर्स डे के अवसर पर यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से मन में आता है कि आखिर एक पिता को अपने बच्चों से क्या चाहिए?
मनोविज्ञान बताता है कि जीवन के उत्तरार्ध में व्यक्ति की सबसे बड़ी आवश्यकता भौतिक सुविधाएं नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव, सम्मान, अपनापन और अपनेपन का एहसास होती है। जिस पिता ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए जीवनभर संघर्ष किया, वह वृद्धावस्था में महंगे उपहारों की अपेक्षा नहीं करता। उसे केवल इतना चाहिए कि उसके बच्चे उसके साथ कुछ समय बिताएं, उसकी बात सुनें और उसे यह महसूस कराएं कि वह आज भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मनोविज्ञान में इसे "भावनात्मक मान्यता" (Emotional Validation) कहा जाता है। जब माता-पिता महसूस करते हैं कि उनकी उपस्थिति, अनुभव और भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है, तो उनके भीतर संतोष, सुरक्षा और आत्मसम्मान की भावना मजबूत होती है। इसके विपरीत, लगातार उपेक्षा या संवाद की कमी उन्हें अकेलेपन, निराशा और अवसाद की ओर ले जा सकती है।
आज मोबाइल और सोशल मीडिया ने संचार को आसान बनाया है, लेकिन कई बार भावनात्मक दूरी भी बढ़ा दी है। हम दिनभर सैकड़ों संदेश पढ़ लेते हैं, पर माता-पिता से कुछ मिनट की आत्मीय बातचीत नहीं कर पाते। जबकि उनके लिए एक फोन कॉल, एक वीडियो कॉल या कुछ समय साथ बैठकर की गई बातचीत किसी बड़े उपहार से कम नहीं होती।
माता-पिता की देखभाल का अर्थ केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है। उनके साथ समय बिताना, उनकी बातों को ध्यान से सुनना, स्वास्थ्य की चिंता करना, निर्णयों में उनकी राय लेना और समय-समय पर उनसे मिलना भी उतना ही आवश्यक है। यह व्यवहार उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि वे परिवार के लिए आज भी महत्वपूर्ण हैं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो वृद्धावस्था में व्यक्ति अपने जीवन का मूल्यांकन करता है। यदि उसे अपने बच्चों का प्रेम, सम्मान और साथ मिलता है, तो उसके भीतर संतुष्टि और मानसिक शांति की भावना विकसित होती है। यही भावनात्मक सुरक्षा उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होती है।
फादर्स डे हमें यह याद दिलाता है कि पिता को हमारी सफलता से अधिक हमारी संवेदनशीलता की आवश्यकता है। उन्हें बड़े उपहारों से अधिक कुछ पल का साथ चाहिए। जीवन की व्यस्तताओं के बीच यदि हम प्रतिदिन कुछ मिनट भी अपने माता-पिता के लिए निकाल सकें, तो यह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।
क्योंकि सच तो यह है कि माता-पिता को हमारे धन की नहीं, हमारे समय की आवश्यकता होती है। और समय वह उपहार है जो एक बार खो जाने पर कभी वापस नहीं आता।

– काउंसलर कंचन मेहता
मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता
फादर्स डे पर सभी पिताओं को सादर नमन। 🌹