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फैशन फोरकास्टिंग और ट्रेंड रिसर्च : बदलते बाजार को समझने की कला

 फैशन डिजाइनिंग के विद्यार्थियों के लिए केवल सुंदर परिधान बनाना ही पर्याप्त नहीं, आने वाले रंग, फैब्रिक, स्टाइल और ग्राहकों की पसंद को पहले से समझना भी जरूरी
 
 फैशन फोरकास्टिंग और ट्रेंड रिसर्च : बदलते बाजार को समझने की कला

 कंचन मेहता

एम.ए. फैशन डिजाइनिंग

 प्रशिक्षक 
सीडीएलयू सिरसा 

फैशन की दुनिया लगातार बदलती रहती है। जो रंग, डिजाइन या परिधान आज लोगों की पहली पसंद है, जरूरी नहीं कि कुछ महीनों बाद भी उसकी मांग वैसी ही बनी रहे। मौसम, फिल्मों, सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी संस्कृति, सामाजिक बदलाव, नई तकनीक और उपभोक्ताओं की जीवनशैली फैशन को तेजी से प्रभावित करती है। ऐसे में फैशन डिजाइनिंग के विद्यार्थियों के लिए केवल डिजाइन तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह समझना भी जरूरी है कि आने वाले समय में बाजार किस दिशा में जाने वाला है। इसी अध्ययन को फैशन फोरकास्टिंग और ट्रेंड रिसर्च कहा जाता है।

भविष्य की पसंद का अनुमान है फैशन फोरकास्टिंग

फैशन फोरकास्टिंग का अर्थ आने वाले फैशन रुझानों का व्यवस्थित अनुमान लगाना है। इसमें यह जानने का प्रयास किया जाता है कि अगले सीजन में कौन से रंग अधिक पसंद किए जा सकते हैं, किस प्रकार के कपड़े की मांग बढ़ेगी, किस तरह की सिलुएट, प्रिंट, कढ़ाई और स्टाइल लोकप्रिय हो सकती है तथा ग्राहकों की खरीदारी की आदतों में क्या बदलाव आएगा।

एक सफल फैशन डिजाइनर केवल वर्तमान बाजार को देखकर डिजाइन नहीं बनाता, बल्कि भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर अपना कलेक्शन तैयार करता है। यही समझ उसे सामान्य डिजाइनर से आगे ले जाकर एक पेशेवर फैशन विशेषज्ञ बनाती है।

ट्रेंड रिसर्च से मिलती है बाजार की दिशा

ट्रेंड रिसर्च में विद्यार्थियों को बाजार, फैशन शो, सोशल मीडिया, फिल्मों, ऑनलाइन खरीदारी, स्ट्रीट फैशन और विभिन्न आयु वर्ग के ग्राहकों की पसंद का अध्ययन करना सिखाया जाना चाहिए। इसके साथ ही स्थानीय बाजार का अध्ययन भी बेहद महत्वपूर्ण है। महानगर में लोकप्रिय डिजाइन जरूरी नहीं कि सिरसा, हिसार या किसी छोटे शहर के ग्राहक की भी पहली पसंद हो। इसलिए स्थानीय संस्कृति, मौसम, त्योहार, विवाह परंपराओं और लोगों की क्रय क्षमता को समझना भी ट्रेंड रिसर्च का हिस्सा होना चाहिए।

विद्यार्थियों को बाजार में जाकर दुकानों, बुटीक और ग्राहकों से बातचीत करने, सर्वे करने तथा अलग-अलग सीजन की मांग का विश्लेषण करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाए। इससे वे किताबों के साथ वास्तविक बाजार को भी समझ सकेंगे।

सोशल मीडिया बना ट्रेंड पहचानने का बड़ा माध्यम

आज इंस्टाग्राम, यूट्यूब, पिंटरेस्ट और अन्य डिजिटल मंच फैशन ट्रेंड को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोई नया रंग, ब्लाउज डिजाइन, साड़ी ड्रेपिंग स्टाइल या फ्यूजन ड्रेस बहुत कम समय में लोकप्रिय हो सकती है। विद्यार्थियों को डिजिटल मंचों पर उभरते ट्रेंड का अध्ययन करना और यह पहचानना सिखाया जाना चाहिए कि कौन-सा ट्रेंड थोड़े समय की लोकप्रियता है और कौन-सा लंबे समय तक बाजार में टिक सकता है।

रोजगार और व्यवसाय दोनों में उपयोगी

फैशन फोरकास्टिंग का ज्ञान नौकरी के साथ स्वरोजगार में भी उपयोगी है। यदि कोई विद्यार्थी अपना बुटीक या ऑनलाइन फैशन ब्रांड शुरू करता है तो उसे पहले से समझ होना चाहिए कि अगले विवाह या त्योहारों के सीजन में ग्राहक क्या खरीदना पसंद कर सकते हैं। इससे वह सही समय पर सही कलेक्शन तैयार कर सकता है और अनावश्यक स्टॉक तथा आर्थिक नुकसान से बच सकता है।

इसलिए बी.एससी. फैशन डिजाइनिंग में फैशन फोरकास्टिंग और ट्रेंड रिसर्च को केवल सैद्धांतिक विषय न रखकर बाजार सर्वेक्षण, ट्रेंड रिपोर्ट, मूड बोर्ड, ग्राहक अध्ययन और वास्तविक कलेक्शन तैयार करने से जोड़ा जाना चाहिए। उद्देश्य ऐसा विद्यार्थी तैयार करना होना चाहिए जो फैशन के पीछे चलने के बजाय आने वाले फैशन को पहचान सके और उसे व्यवसायिक अवसर में बदल सके।