एसजीटीयू के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज ने 20 गांवों में चलाया जन-जागरूकता अभियान

गुरुग्राम। 20 सितंबर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसजीटी विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ डेंटल साइंसेज द्वारा ‘ग्रामीण जन साक्षरता अभियान’ की शुरुआत की गई है। ‘ग्रामीण जन साक्षरता अभियान–विकसित भारत की नींव’ गतिविधि के माध्यम से विश्वविद्यालय ने राष्ट्र निर्माण और ‘विकसित भारत’ के संकल्प में अपनी सहभागिता को और मजबूत किया।
जुलाई 2026 से शुरू हुए इस अभियान के अंतर्गत फैकल्टी सदस्यों और डेंटल विद्यार्थियों ने करीब 20 गांवों का दौरा कर ग्रामीणों के साथ स्वास्थ्य जागरूकता सत्र आयोजित किए। इन सत्रों में पोषण, शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता, महिला स्वास्थ्य, बाल स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, सड़क सुरक्षा, स्वच्छता, वित्तीय साक्षरता, साइबर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, स्वस्थ दैनिक आदतों, निवारक स्वास्थ्य देखभाल, संतुलित आहार, सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता तथा एनीमिया से बचाव जैसे विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।
अभियान के तहत ग्रामीण निवासियों की स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, ज्ञान और व्यवहार का आकलन करने के लिए एक संरचित सर्वेक्षण प्रपत्र भी तैयार किया गया। इसमें सामान्य स्वास्थ्य स्थिति, उपचार के लिए चिकित्सकीय सहायता लेने की प्रवृत्ति, मौखिक स्वच्छता संबंधी आदतें, तंबाकू के प्रति जागरूकता एवं उपयोग, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के स्रोत तथा स्वास्थ्य शिक्षा में रुचि जैसे विषय शामिल किए गए।
सर्वेक्षण के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार लगभग 48 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की जानकारी दी, जबकि 42 प्रतिशत ने दिन में दो बार दांत साफ करने की बात कही। करीब 65 प्रतिशत लोग दांतों की सफाई के लिए टूथब्रश और टूथपेस्ट का उपयोग करते पाए गए। तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति लगभग 73 प्रतिशत लोगों में जागरूकता पाई गई, जबकि करीब 27 प्रतिशत वर्तमान में तंबाकू का सेवन करने वाले पाए गए। लगभग 69 प्रतिशत ग्रामीणों को यह जानकारी थी कि अच्छी मौखिक स्वच्छता दंत रोगों से बचाव में सहायक है।
सर्वेक्षण के निष्कर्षों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य साक्षरता को और मजबूत करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। केवल करीब 24 प्रतिशत लोगों ने डॉक्टर या डेंटिस्ट को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का प्रमुख स्रोत बताया, जबकि 52 प्रतिशत लोगों ने मौखिक स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में रुचि व्यक्त की। इसके अलावा 43 प्रतिशत लोगों ने पोषण तथा 39 प्रतिशत ने मधुमेह और रक्तचाप से संबंधित जागरूकता में रुचि दिखाई।
इन निष्कर्षों के आधार पर अभियान के आगामी चरणों में मौखिक स्वास्थ्य शिक्षा एवं स्क्रीनिंग, तंबाकू मुक्ति परामर्श, पोषण संबंधी जागरूकता, गैर-संचारी रोगों (एनसीडीज) की जागरूकता एवं स्क्रीनिंग, व्यक्तिगत स्वच्छता को बढ़ावा देने तथा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और डिजिटल माध्यमों के टजरिए स्वास्थ्य संचार को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभियान के तहत समय-समय पर किए जाने वाले फॉलो-अप सर्वेक्षणों के माध्यम से ग्रामीणों के स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान और व्यवहार में होने वाले बदलावों का आकलन किया जाएगा। इससे गांव स्तर पर संचालित स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने और भविष्य की गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से नियोजित करने में मदद मिलेगी।

