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पश्चिम बंगाल में 100 से अधिक मतदान केंद्रों से मतदाता सूचियों के रिकॉर्ड लापता

 
  पश्चिम बंगाल में 100 से अधिक मतदान केंद्रों से मतदाता सूचियों के रिकॉर्ड लापता
-कोलकाता, 13 अगस्त  पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। वर्ष 2002 में विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद तैयार की गई मतदाता सूचियों के रिकॉर्ड लगभग 100 से अधिक मतदान केंद्रों से गायब हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार यह मामला चुनाव आयोग के संज्ञान में लाया जाएगा और आयोग से अनुमति मांगी जाएगी कि 2003 के प्रारूप मतदाता सूची को आधार बनाकर नए पुनरीक्षण की प्रक्रिया की जाए।
सूत्रों ने बताया कि कई बूथों के 2002 के रिकॉर्ड पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। कुछ सूचियां इस कदर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं कि उन्हें आयोग के सर्वर पर अपलोड करना भी संभव नहीं है। जिन बूथों के रिकॉर्ड नहीं मिल रहे, उनमें अधिकांश दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, हावड़ा और बीरभूम जिलों के हैं। ये जिले पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस के गढ़ माने जाते हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच चार चुनाव अधिकारियों के निलंबन को लेकर टकराव जारी है। आयोग ने दो विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता सूची में गड़बड़ी करने के आरोप में चार अधिकारियों को निलंबित किया था। लेकिन राज्य सरकार ने आयोग को सूचित कर दिया कि वह फिलहाल इस आदेश का पालन नहीं करेगी। इसके बाद आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव मनोज पंत को बुधवार शाम 5 बजे तक दिल्ली स्थित मुख्यालय में तलब किया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी शुरू से ही आयोग के इस आदेश को चुनौती दी है। उनका कहना है कि चारों अधिकारी राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इन अधिकारियों पर आरोप है कि मतदाता सूची के आवेदन निपटाने के दौरान उन्होंने निर्वाचन रजिस्ट्रेशन डेटाबेस की लॉगिन आईडी और पासवर्ड अनधिकृत व्यक्तियों को साझा कर डेटा सुरक्षा नीति का उल्लंघन किया। इसकी वजह से कई विधानसभा क्षेत्रों में हजारों नाम बिना वेरिफिकेशन के वोटर लिस्ट में शामिल कर दिए गए। माना जा रहा है कि ऐसा बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए किया गया है।
अगर आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों को न्यूनतम तीन महीने से लेकर अधिकतम दो वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है