डार्ट मैनिपुलेशन से नए डिजाइन विकसित करना एक ही बेसिक पैटर्न से अनेक आकर्षक डिजाइन तैयार करने की महत्वपूर्ण तकनीक

फैशन डिजाइनिंग लेखमाला — 7
फैशन डिजाइनिंग में किसी परिधान की सुंदरता केवल अच्छे कपड़े या रंग पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी सही फिटिंग और डिजाइन संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। परिधान को शरीर के आकार के अनुरूप फिट करने में डार्ट (Dart) की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब इसी डार्ट को उसकी मूल स्थिति से किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करके नए डिजाइन विकसित किए जाते हैं, तो इस तकनीक को डार्ट मैनिपुलेशन (Dart Manipulation) कहा जाता है। पैटर्न मेकिंग सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह विषय अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि इसके माध्यम से एक ही बेसिक बोडिस ब्लॉक से अनेक डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं।
डार्ट क्या है?
डार्ट पैटर्न में बनाया गया एक नियंत्रित फोल्ड या वेज आकार होता है, जो सपाट कपड़े को शरीर के उभार और आकार के अनुसार ढालने में सहायता करता है। महिलाओं के बोडिस में सामान्यतः बस्ट, कमर और शोल्डर क्षेत्र में डार्ट का प्रयोग किया जाता है। डार्ट का मुख्य उद्देश्य परिधान को बेहतर फिटिंग देना है। सही डार्ट के कारण कपड़ा शरीर पर अनावश्यक रूप से ढीला या खिंचा हुआ दिखाई नहीं देता।
डार्ट मैनिपुलेशन का सिद्धांत
डार्ट मैनिपुलेशन का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि डार्ट की जगह बदली जा सकती है, लेकिन उसकी कुल मात्रा और फिटिंग का प्रभाव समान रहना चाहिए। उदाहरण के लिए, कमर पर स्थित डार्ट को शोल्डर, नेकलाइन, आर्महोल या साइड सीम की ओर स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे परिधान का बाहरी डिजाइन बदल जाता है, जबकि उसकी मूल फिटिंग बनी रहती है।
डार्ट को स्थानांतरित करने की दो प्रमुख विधियां प्रचलित हैं—स्लैश एंड स्प्रेड (Slash and Spread) तथा पिवट मेथड (Pivot Method)। स्लैश एंड स्प्रेड में पैटर्न को निर्धारित दिशा में काटकर पुराने डार्ट को बंद किया जाता है, जिससे नई जगह पर डार्ट खुल जाता है। पिवट विधि में बेसिक पैटर्न को एक निश्चित बिंदु पर घुमाकर डार्ट की नई स्थिति निर्धारित की जाती है।
डिजाइन विकास में उपयोग
डार्ट मैनिपुलेशन केवल फिटिंग की तकनीक नहीं, बल्कि रचनात्मक डिजाइन विकसित करने का प्रभावी माध्यम भी है। डार्ट को प्लीट, गेदर, टक, प्रिंसेस लाइन या स्टाइल लाइन में बदला जा सकता है। इससे साधारण बोडिस को आकर्षक और आधुनिक रूप दिया जा सकता है। डिजाइनर नेकलाइन, कमर, कंधे या आर्महोल के आसपास डार्ट की दिशा बदलकर अलग-अलग दृश्य प्रभाव पैदा कर सकता है।
उदाहरण के लिए, बस्ट डार्ट को नेकलाइन की ओर ले जाकर वहां छोटे गेदर बनाए जा सकते हैं। कमर के डार्ट को प्रिंसेस सीम में परिवर्तित करके शरीर के अनुरूप सुंदर फिटिंग प्राप्त की जा सकती है। इसी प्रकार शोल्डर डार्ट को प्लीट या सजावटी सीम के रूप में प्रस्तुत करके डिजाइन को नया रूप दिया जा सकता है।
विद्यार्थियों के लिए प्रैक्टिकल अभ्यास
शिक्षकों को विद्यार्थियों से पहले एक सही बेसिक बोडिस ब्लॉक तैयार करवाना चाहिए। उसके बाद एक ही ब्लॉक की अलग-अलग प्रतियां बनाकर डार्ट को शोल्डर, नेकलाइन, आर्महोल, साइड सीम और कमर की ओर स्थानांतरित करने का अभ्यास कराया जा सकता है। प्रत्येक परिवर्तन के बाद विद्यार्थियों से यह जांच करवाना आवश्यक है कि बस्ट पॉइंट, सीम लाइन और डार्ट की कुल मात्रा सही बनी हुई है या नहीं।
विद्यार्थियों को यह भी समझना चाहिए कि वास्तविक सिलाई में डार्ट का अंतिम सिरा सामान्यतः शरीर के सर्वाधिक उभरे हुए बिंदु पर समाप्त नहीं किया जाता, बल्कि उचित दूरी पहले समाप्त किया जाता है। यह दूरी परिधान, आकार और डिजाइन के अनुसार निर्धारित होती है।
रचनात्मकता और सही फिटिंग का मेल
डार्ट मैनिपुलेशन में दक्षता प्राप्त करने के बाद विद्यार्थी केवल तैयार डिजाइन की नकल करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वयं नए पैटर्न विकसित कर सकते हैं। यही पैटर्न मेकिंग की रचनात्मक शक्ति है। नियमित अभ्यास, सटीक माप और बेसिक ब्लॉक की समझ के साथ डार्ट मैनिपुलेशन विद्यार्थियों को साधारण पैटर्न से व्यावसायिक स्तर के विविध डिजाइन विकसित करना सिखाता है।
कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग
इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा

