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हाई कोर्ट ने डीडीए पार्क में रामलीला की इजाज़त देने से किया इनकार

 
  हाई कोर्ट ने डीडीए पार्क में रामलीला की इजाज़त देने से किया इनकार

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर  दिल्ली उच्च न्यायालय की डिवीजन पीठ ने एक मामले में सुनवाई करते हुए पार्क में रामलीला आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पार्क की हरियाली बनाए रखना जरूरी है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे की डिवीजन पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी की अपील खारिज कर दी।
रामलीला कमेटी ने सिंगल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें नारायणा स्थित चिंटू पार्क में वार्षिक रामलीला आयोजित किए जाने की अनुमति देने की मांग को दरकिनार करते हुए पार्क की भूमि को हरित क्षेत्र के रूप में बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था।
रामलीला कमेटी ने 19 अगस्त के आदेश में बदलाव की मांग करते हुए दलील दी कि वह पिछले 53 साल से इसी परिसर में रामलीला का आयोजन करती रही है। कमेटी ने कहा कि वह जमीन को पहले जैसी स्थिति में बहाल करने के लिए आश्वासन देने को तैयार है और हरे-भरे पौधों की भरपाई करना भी सुनिश्चित करेगी। डीडीए ने रामलीला कमेटी की इस मांग का विरोध किया और कहा कि न्यायालय के निर्देशों के बाद पार्क के सुधार पर काफी धन खर्च हुआ है। दोबारा इस तरह के आयोजन से फिर हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंच सकता है। डीडीए ने कहा कि कमेटी को किसी खास उद्देश्य के लिए इस जमीन का स्थाई रूप से उपयोग करने का पूर्ण अधिकार नहीं है।
सुनवाई के दौरान डिवीजन पीठ ने वहां की तस्वीरों का भी अवलोकन किया। न्यायालय ने कहा कि इस काम पर पहले ही काफी सरकारी धन खर्च किया जा चुका है। डिवीजन पीठ को सिंगल पीठ के फैसले को बदलने के लिए कोई ठोस आधार नहीं मिला इसलिए कमेटी की याचिका को खारिज कर दिया।