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ड्रेपिंग से रचनात्मक परिधान निर्माण

 
 ड्रेपिंग से रचनात्मक परिधान निर्माण

 लेखमाला भाग–12

कपड़े को सीधे ड्रेस फॉर्म पर आकार देकर कल्पना को आकर्षक परिधान में बदलने की कला

फैशन डिजाइनिंग में किसी नए परिधान की रचना केवल कागज पर स्केच बनाने तक सीमित नहीं होती। डिजाइनर के लिए यह समझना भी आवश्यक है कि कपड़ा शरीर पर किस प्रकार गिरेगा, कहां फिट होगा और किस स्थान पर प्लीट, गेदर या आकर्षक फॉल देने से डिजाइन अधिक प्रभावशाली बनेगा। ड्रेपिंग (Draping) ऐसी ही तकनीक है, जिसमें कपड़े को सीधे ड्रेस फॉर्म पर व्यवस्थित करके एक रचनात्मक परिधान का स्वरूप विकसित किया जाता है।

रचनात्मक ड्रेपिंग क्या है?

सामान्य पैटर्न मेकिंग में पहले कागज पर पैटर्न बनाया जाता है और उसके आधार पर कपड़ा काटा जाता है। इसके विपरीत ड्रेपिंग में डिजाइनर कपड़े को सीधे ड्रेस फॉर्म पर रखकर पिन, फोल्ड, प्लीट और गेदर की सहायता से आकार देता है। इससे डिजाइन को उसी समय त्रि-आयामी रूप में देखा और आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है।

रचनात्मक ड्रेपिंग में डिजाइनर किसी निश्चित पैटर्न तक सीमित नहीं रहता। वह कपड़े के स्वभाव, उसकी फॉल और अपनी कल्पना के अनुसार नए आकार विकसित कर सकता है। यही कारण है कि हाई फैशन और विशेष अवसरों के लिए तैयार किए जाने वाले परिधानों में ड्रेपिंग का विशेष महत्व है।

कपड़े का सही चुनाव जरूरी

ड्रेपिंग करते समय कपड़े का चुनाव डिजाइन के अनुसार होना चाहिए। हल्के और अच्छी फॉल वाले कपड़ों से काउल, गेदर और सॉफ्ट प्लीट जैसे डिजाइन आसानी से बनाए जा सकते हैं, जबकि अपेक्षाकृत मजबूत कपड़े संरचनात्मक आकार देने में उपयोगी होते हैं।

विद्यार्थियों को अभ्यास के दौरान यह समझना चाहिए कि प्रत्येक फैब्रिक ड्रेस फॉर्म पर अलग व्यवहार करता है। कपड़े की मोटाई, वजन, लचक और ग्रेन लाइन अंतिम डिजाइन के स्वरूप को प्रभावित करते हैं।

रचनात्मक परिधान तैयार करने की प्रक्रिया

सबसे पहले डिजाइन की थीम और मूल विचार निर्धारित किया जाता है। इसके बाद उपयुक्त कपड़े का चयन करके सेंटर फ्रंट, सेंटर बैक और ग्रेन लाइन को ध्यान में रखते हुए कपड़ा ड्रेस फॉर्म पर लगाया जाता है।

फिर डिजाइन की आवश्यकता के अनुसार प्लीट, गेदर, काउल, टक या असममित फॉल विकसित की जाती है। पिनिंग करते समय फिटिंग और संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। डिजाइन संतोषजनक होने के बाद सीम लाइन और अन्य आवश्यक निशान लगाए जाते हैं। इसके आधार पर अंतिम पैटर्न तैयार करके वास्तविक कपड़े में परिधान बनाया जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

ड्रेपिंग विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच और कपड़े को समझने की क्षमता विकसित करती है। इसमें डिजाइनर अपनी कल्पना को तुरंत ड्रेस फॉर्म पर प्रयोग करके देख सकता है। यदि कोई डिजाइन अपेक्षा के अनुरूप न लगे तो उसे उसी समय बदलना भी संभव है।

नियमित अभ्यास से विद्यार्थी यह समझने लगते हैं कि शरीर की संरचना और कपड़े की विशेषताओं के बीच संतुलन बनाकर किस प्रकार आकर्षक परिधान तैयार किया जा सकता है। ड्रेपिंग केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि कल्पना को वास्तविक परिधान में बदलने की रचनात्मक कला है।

कंचन मेहता
एम.ए. फैशन डिजाइनिंग
इंस्ट्रक्टर, चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, सिरसा