दयालू योजना के नाम पर हो रहा है भ्रष्टाचार: सैलजा
हरियणाा में दलाली और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है दयालु योजना
Oct 6, 2025, 21:03 IST
25 से 30 प्रतिशत कमीशन लेकर दयालु योजना का लाभ दिला देते हैं दलाल
पल पल न्यूज: चंडीगढ़, 06 अक्तूबर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महसचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार की तथाकथित दयालु योजना अब दया नहीं, बल्कि दलाली और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है। हाल ही में उजागर हुआ सच बेहद शर्मनाक और पीड़ादायक है। जिन परिवारों को किसी सदस्य की मृत्यु पर सहारा और संवेदना मिलनी चाहिए, उनसे अब सरकारी सहायता के नाम पर 25- 30 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जा रहा है। यह सुनकर मन व्यथित हो जाता है कि दु:ख की घड़ी में भी अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से गरीब परिवारों का शोषण हो रहा है।
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार की दयालु योजना के तहत जिन परिवारों की वार्षिक आय एक लाख 80 हजार से कम होती है यानि बीपीएल परिवार में एक साल से 60 साल के किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर एक से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान है। पर सरकार की योजना भी उसकी लापरवाही के चलते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यह स्थिति न केवल शासन की असंवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि भाजपा सरकार के शासनकाल में भ्रष्टाचार किस कदर गहराई तक पैठ चुका है। दयालु योजना जैसी संवेदनशील योजना को भी मुनाफाखोरी का माध्यम बना दिया गया है। फाइल पास कराने के नाम पर दलाल पहले से रकम तय कर लेते हैं अगर पैसे न दिए जाएं तो फाइल पर आपत्ति लगाकर या उसे रद्द कर पीडि़त परिवार को त्रासदी के दूसरे दौर से गुजरना पड़ता है। गरीब की पीड़ा पर लाभ कमाना केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मानवता पर कलंक है। सरकार पर यह कलंक तब तक रहेगा जब तक वह इन दलालों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं करती और पीडि़त परिवारों को बिना किसी रिश्वत के उनका हक नहीं दिलाती। जब किसी बीपीएल परिवार में कोई मौत हो जाती है कि दलाल पहले पहुंचते है, गरीब की मौत पर वे संवेदना व्यक्त करने नहीं जाते बल्कि मौत पर कमाई करने जाते है। जो पीडि़त परिवार से 25 से 30 प्रतिशत कमीशन लेकर आर्थिक मदद दिलाते है। जब यह सच्चाई उजागर हुई तो पता चला कि इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी की भूमिका में सीएससी संचालक है। जो परिवार पहचान पत्र में आय भी कम करवाने का दावा करते है और शुरू होता है कमीशन खोरी का खेल। दलाल पीडि़त परिवार से कहते है कि मौत का कारण करंट बताना होगा क्योंकि इससे आर्थिक मदद जल्द मिल जाती है। होता है कि अगर कोई पीडि़त इ्रमानदारी से इस योजना का लाभ हासिल करने के लिए फाइल जमा करता है तो उसकी फाइल रोक दी जाती है और उसे दलालों के पास भेज दिया जाता है, ये दलाल तेरहवीं (रस्म पगडी/अंतिम अरदास)से पहले ही पीडि़त परिवार के पास पहुंचकर सौदा करने लगते है। सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि शोक में डूबे परिवारों की मदद करना उसका कर्तव्य है, कोई अवसर नहीं। सांसद सैलजा ने कहा कि उजागर हुई यह सच्चाई साबित करती है कि हरियाणा में प्रशासनिक मशीनरी मानवता से अधिक कमीशन के प्रति संवेदनशील हो चुकी है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि दयालु योजना में हो रहे इस भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को तत्काल दंडित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास शासन में दोबारा स्थापित हो सके। गरीब की आंखों के आंसू से मुनाफा कमाने वाली व्यवस्था को जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा सरकार का मौन उसकी मिली भगत का प्रमाण बन चुका है।
फोटो सैलजा
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार की दयालु योजना के तहत जिन परिवारों की वार्षिक आय एक लाख 80 हजार से कम होती है यानि बीपीएल परिवार में एक साल से 60 साल के किसी भी व्यक्ति की मौत होने पर एक से पांच लाख रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान है। पर सरकार की योजना भी उसकी लापरवाही के चलते भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यह स्थिति न केवल शासन की असंवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि भाजपा सरकार के शासनकाल में भ्रष्टाचार किस कदर गहराई तक पैठ चुका है। दयालु योजना जैसी संवेदनशील योजना को भी मुनाफाखोरी का माध्यम बना दिया गया है। फाइल पास कराने के नाम पर दलाल पहले से रकम तय कर लेते हैं अगर पैसे न दिए जाएं तो फाइल पर आपत्ति लगाकर या उसे रद्द कर पीडि़त परिवार को त्रासदी के दूसरे दौर से गुजरना पड़ता है। गरीब की पीड़ा पर लाभ कमाना केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मानवता पर कलंक है। सरकार पर यह कलंक तब तक रहेगा जब तक वह इन दलालों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं करती और पीडि़त परिवारों को बिना किसी रिश्वत के उनका हक नहीं दिलाती। जब किसी बीपीएल परिवार में कोई मौत हो जाती है कि दलाल पहले पहुंचते है, गरीब की मौत पर वे संवेदना व्यक्त करने नहीं जाते बल्कि मौत पर कमाई करने जाते है। जो पीडि़त परिवार से 25 से 30 प्रतिशत कमीशन लेकर आर्थिक मदद दिलाते है। जब यह सच्चाई उजागर हुई तो पता चला कि इस खेल के सबसे बड़े खिलाड़ी की भूमिका में सीएससी संचालक है। जो परिवार पहचान पत्र में आय भी कम करवाने का दावा करते है और शुरू होता है कमीशन खोरी का खेल। दलाल पीडि़त परिवार से कहते है कि मौत का कारण करंट बताना होगा क्योंकि इससे आर्थिक मदद जल्द मिल जाती है। होता है कि अगर कोई पीडि़त इ्रमानदारी से इस योजना का लाभ हासिल करने के लिए फाइल जमा करता है तो उसकी फाइल रोक दी जाती है और उसे दलालों के पास भेज दिया जाता है, ये दलाल तेरहवीं (रस्म पगडी/अंतिम अरदास)से पहले ही पीडि़त परिवार के पास पहुंचकर सौदा करने लगते है। सैलजा ने कहा कि भाजपा सरकार को यह समझना होगा कि शोक में डूबे परिवारों की मदद करना उसका कर्तव्य है, कोई अवसर नहीं। सांसद सैलजा ने कहा कि उजागर हुई यह सच्चाई साबित करती है कि हरियाणा में प्रशासनिक मशीनरी मानवता से अधिक कमीशन के प्रति संवेदनशील हो चुकी है। सांसद ने सरकार से मांग की है कि दयालु योजना में हो रहे इस भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को तत्काल दंडित किया जाए, ताकि जनता का विश्वास शासन में दोबारा स्थापित हो सके। गरीब की आंखों के आंसू से मुनाफा कमाने वाली व्यवस्था को जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा सरकार का मौन उसकी मिली भगत का प्रमाण बन चुका है।
फोटो सैलजा

