सरकारी स्कूलों में लगातार घटते दाखिलें शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न: सैलजा

सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि सरकारी स्कूलों में लगातार घटते दाखिलों के ताज़ा आंकड़े स्पष्ट संकेत है कि आम जनता का भरोसा सरकारी शिक्षा व्यवस्था से धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। अगर सरकार की शिक्षा नीति बेहतर होती तो सरकारी स्कूलों में अविभावक बच्चों का दाखिल कराने के लिए आगे आते पर हो इसका उलट रहा है अविभावक सरकारी स्कूलों से बच्चों को निकालकर प्राइवेट स्कू लों में दाखिला करवा रहे हैं। आंकड़े स्पष्ट संकेत दे रहे है कि शहरी क्षेत्रों खासकर महानगरों के स्कूलों में दाखिलों में बड़ी कमी आई है। फरीदाबाद, गुरूग्राम, करनाल, पानीपत, हिसार, भिवानी जींद, सिरसा, फतेहाबाद इसके ताजा उदाहरण है। सरकार को इन आंकडों से ही सबक लेकर जल्द प्रभावी कदम उठाना चाहिए। अगर सरकार ने शुरू में ही सरकारी स्कूलों में दाखिलों को लेकर अभियान चलाकर अविभावकों को भरोसे में लिया होता इतनी गंभीर स्थिति न होती।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा प्रवेश उत्सव जैसे अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं। यदि वास्तव में शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती, तो स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ती, न कि इस प्रकार घटती। कई सरकारी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं कहीं पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं, तो कहीं शौचालय, पेयजल और डिजिटल संसाधनों की भारी कमी है। सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई सीधे प्रभावित हो रही है। एक ओर सरकार शिक्षा सुधार की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्कूलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे हालात में अभिभावक मजबूर होकर निजी स्कूलों की ओर रुख कर रहे हैं।
कुमारी सैलजा ने चिराग योजना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह नीति सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार स्वयं बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जो शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने जैसा है। यह नीति गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।उन्होंने विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में मुख्य रूप से गरीब, वंचित और पिछड़े वर्ग के बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं। यदि इन स्कूलों की स्थिति लगातार खराब होती रही, तो समाज के इन वर्गों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना अधूरा रह जाएगा। यह सामाजिक असमानता को और बढ़ाने का कार्य करेगा, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। सांसद ने हरियाणा सरकार से मांग की कि वह तुरंत प्रभाव से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए। शिक्षकों के खाली पदों को शीघ्र भरा जाए, बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि हर बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, ताकि वह देश और समाज के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।
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भाजपा सांसद की टिप्पणी पर कुमारी सैलजा का तीखा विरोध
सांसद कुमारी सैलजा ने भाजपा की राज्यसभा सांसद द्वारा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री के प्रति की गई टिप्पणी को निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों को अपने शब्दों का चयन जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए, क्योंकि ऐसी टिप्पणियां लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक मर्यादा को आहत करती हैं। शैलजा ने कहा कि भजनलाल जी 36 बिरादरी के सम्मानित नेता रहे हैं और चंद्रमोहन बिश्नोई को जनता ने कई बार विधायक चुनकर उनके प्रति अपना विश्वास जताया है। उन्होंने से इस बयान पर सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए भविष्य में इस तरह की भाषा से परहेज करने की अपील की।

