कांग्रेस महासचिव ने केंद्र सरकार पर बजट में आम जनता को नजरअंदाज करने का लगाया आरोप
Feb 11, 2026, 20:14 IST

नई दिल्ली, 11 फ़रवरी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर आम लोगों के मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल एक पैकेजिंग है, जो वास्तविक संकट को छिपाकर जनता के दर्द को नजरअंदाज करती है।
वेणुगोपाल ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में कहा कि रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर है और एक डॉलर की कीमत 91 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे कम में से एक है। असमानता चरम पर है। शीर्ष 10 प्रतिशत लोग देश की कुल जीडीपी का 58 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं, जबकि आधी आबादी केवल 15 प्रतिशत पर जीवित है। लगभग 34 प्रतिशत भारतीय रोजाना 100 रुपये से भी कम पर जीवन गुजारते हैं। देश में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है और शहरी युवाओं में यह 18 प्रतिशत से अधिक है। नियमित वेतनभोगी रोजगार घटकर 22.8 प्रतिशत से 21.7 प्रतिशत हो गया है। लगभग 40 प्रतिशत वेतनभोगी अस्थायी अनुबंध पर हैं और आधे से अधिक के पास न तो छुट्टी है और न ही सामाजिक सुरक्षा। महिलाओं की स्थिति और भी खराब है। ग्रामीण महिलाओं में केवल 10.5 प्रतिशत सेवा क्षेत्र में काम करती हैं और शहरी युवतियों में से हर चार में से एक को नौकरी नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इंटर्नशिप योजना पर साल 2025-26 में 526 करोड़ रुपये में से केवल 64.91 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। 82 हजार छात्रों को ऑफर दिए गए लेकिन केवल 28 हजार युवाओं ने स्वीकार किया और जनवरी 2026 तक केवल 3,417 इंटर्न ही योजना पूरी कर पाए। बजट को 10,831 करोड़ से घटाकर 526 करोड़ कर दिया गया। यह दिखाता है कि सरकार को भी इस योजना पर भरोसा नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि साल 2014 में स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि केरल में एम्स बनेगा लेकिन 12 साल बीत गए और अब तक कुछ नहीं हुआ। इसी तरह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा हुई लेकिन केरल को नजरअंदाज किया गया। हाल ही में केंद्र सरकार ने केरल सरकार को पत्र लिखकर धान किसानों को दी जाने वाली 6.1 रुपये प्रति किलो की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बंद करने को कहा। कारण बताया गया कि अतिरिक्त उत्पादन बोझ बन रहा है।
वेणुगोपाल ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा में कहा कि रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर है और एक डॉलर की कीमत 91 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया में सबसे कम में से एक है। असमानता चरम पर है। शीर्ष 10 प्रतिशत लोग देश की कुल जीडीपी का 58 प्रतिशत नियंत्रित करते हैं, जबकि आधी आबादी केवल 15 प्रतिशत पर जीवित है। लगभग 34 प्रतिशत भारतीय रोजाना 100 रुपये से भी कम पर जीवन गुजारते हैं। देश में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है और शहरी युवाओं में यह 18 प्रतिशत से अधिक है। नियमित वेतनभोगी रोजगार घटकर 22.8 प्रतिशत से 21.7 प्रतिशत हो गया है। लगभग 40 प्रतिशत वेतनभोगी अस्थायी अनुबंध पर हैं और आधे से अधिक के पास न तो छुट्टी है और न ही सामाजिक सुरक्षा। महिलाओं की स्थिति और भी खराब है। ग्रामीण महिलाओं में केवल 10.5 प्रतिशत सेवा क्षेत्र में काम करती हैं और शहरी युवतियों में से हर चार में से एक को नौकरी नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इंटर्नशिप योजना पर साल 2025-26 में 526 करोड़ रुपये में से केवल 64.91 करोड़ रुपये ही खर्च हुए। 82 हजार छात्रों को ऑफर दिए गए लेकिन केवल 28 हजार युवाओं ने स्वीकार किया और जनवरी 2026 तक केवल 3,417 इंटर्न ही योजना पूरी कर पाए। बजट को 10,831 करोड़ से घटाकर 526 करोड़ कर दिया गया। यह दिखाता है कि सरकार को भी इस योजना पर भरोसा नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि साल 2014 में स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था कि केरल में एम्स बनेगा लेकिन 12 साल बीत गए और अब तक कुछ नहीं हुआ। इसी तरह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा हुई लेकिन केरल को नजरअंदाज किया गया। हाल ही में केंद्र सरकार ने केरल सरकार को पत्र लिखकर धान किसानों को दी जाने वाली 6.1 रुपये प्रति किलो की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बंद करने को कहा। कारण बताया गया कि अतिरिक्त उत्पादन बोझ बन रहा है।

