कांग्रेस ने सरकार पर लगाया इसरो की भूमिका सीमित करने का आरोप, रमेश बोले- वैज्ञानिकों की मेहनत को निजी क्षेत्र को सौंपने चिंता की बात

नई दिल्ली, 06 सितंबर कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के नाम पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की भूमिका सीमित कर रही है। उन्होंने कहा कि छह दशकों में वैज्ञानिकों और इसरो कर्मचारियों की मेहनत से विकसित क्षमताओं को निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया गंभीर चिंता का विषय है।
जयराम रमेश ने रविवार को एक्स पर एक अखबार की कटिंग साझा की, जिसमें इसरो के नौ कर्मचारी संगठनों की ओर से निजीकरण को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख है। साथ ही उन्होंने राज्यसभा में इसी मुद्दे पर दिए अपने पुराने राज्यसभा भाषण का वीडियो भी साझा किया। इसमें उन्होंने अंतरिक्ष कार्यक्रम के सार्वजनिक स्वरूप और वैज्ञानिक संस्थानों की स्वतंत्रता पर जोर दिया था।
जयराम रमेश ने कहा कि इसरो समुदाय के भीतर से निजीकरण को लेकर आवाज उठना सराहनीय है। उन्होंने हालिया जीएसएलवी प्रक्षेपण की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इसरो की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एक पूर्व इसरो अध्यक्ष ने भी निजीकरण को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी हैं और अन्य वैज्ञानिकों को भी चुप नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरिक्ष कार्यक्रम में आक्रामक निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। रॉकेट विकास और निर्माण में इसरो की भूमिका सीमित करने तथा उपग्रह संबंधी संसाधनों को निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने की तैयारी है। उन्होंने तमिलनाडु के कुलशेखरपट्टिनम में बन रहे नए अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र और श्रीहरिकोटा के भविष्य को लेकर भी सवाल उठाए।
जयराम रमेश ने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का समर्थन किया जा सकता है, लेकिन इसका मतलब इसरो को कमजोर करना नहीं होना चाहिए। इसरो देश की वैज्ञानिक विरासत है और भारत अपनी वैज्ञानिक रीढ़ के साथ समझौता नहीं कर सकता।

