पारंपरिक कागजी नींबू की किस्म को बचाने की सराहनीय पहल, किसानों तक पहुंचाई जा रही कलमें

सिरसा 30 सितंबर जट्ट भाईचारा वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य सरदार गुरविंदर सिंह घुम्मण ने पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सराहनीय पहल की है।
घुम्मण जी के पिता स्वर्गीय सरदार गुलजार सिंह जी ने वर्ष 1986 में कागजी नींबू की एक पारंपरिक किस्म का पौधा लगाया था। इस पुरानी किस्म को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से गुरविंदर सिंह घुम्मण ने उसी पौधे से कलमें तैयार कर नए पौधे विकसित किए हैं। अब इन पौधों को जट्ट भाईचारा वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों के साथ-साथ अन्य मेहनती और उद्यमी किसानों तक भी पहुंचाया जा रहा है।
इस पहल के तहत आज मुझे भी गुरविंदर सिंह घुम्मण जी की ओर से कागजी नींबू के पौधे प्राप्त हुए। उन्होंने इस पहल के माध्यम से किसानों को अपनी पारंपरिक किस्मों को बचाने और कृषि में आत्मनिर्भर बनने का संदेश दिया है।
घुम्मण जी का कहना है कि जो किसान इन पौधों को लगाएंगे, वे आगे चलकर इनकी कलमें तैयार कर अन्य किसानों तक पहुंचाएं। इससे पारंपरिक और पुरानी किस्मों का संरक्षण होगा तथा किसान केवल हाइब्रिड बीजों और पौधों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थानीय किस्मों को स्वयं विकसित और संरक्षित कर सकेंगे।
यह पहल न केवल किसानी की पुरानी विरासत को बचाने, बल्कि किसानों को अपने बलबूते पर पौध तैयार करने और कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

