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एक साल से लंबित शिकायतों पर सीएम की सख्ती छुट्टी वाले दिन दफ्तर में आकर निपटाएंगे लंबित शिकायतें, एक जैसी शिकायतों के लिए पॉलिसी बनाने के निर्देश

 
 एक साल से लंबित शिकायतों पर सीएम की सख्ती  छुट्टी वाले दिन दफ्तर में आकर निपटाएंगे लंबित शिकायतें, एक जैसी शिकायतों के लिए पॉलिसी बनाने के निर्देश

 चंडीगढ़, 26 सितंबर  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जन शिकायतों के समाधान में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने लंबित शिकायतों पर अधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही, निर्देश दिए हैं कि छुट्टी वाले दिन दफ्तर में पहुंचकर अधिकारी और कर्मचारी शिकायतों का निपटान करेंगे।
सीएम मुख्यमंत्री सैनी ने सीएम विंडो, जनसंवाद, एसएमजीटी और समाधान शिविरों की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए कि जैसी व्यापक शिकायतों के समाधान के लिए सरकार पॉलिसी तैयार की जाए। सीएम ने एक साल से लंबित शिकायतों के निपटारे के लिए छुट्टी वाले कार्यालय लगाने और सोमवार तक रिपोर्ट देने की कड़ी हिदायत दी।
जनसंवाद के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापक स्तर पर मिली एक जैसी समस्याओं के लिए सरकार द्वारा पॉलिसी बनाई जाएगी ताकि जनता को व्यापक राहत दी जा सके। उन्होंने कहा कि फैमिली आईडी में सुधार के संबंध में काफी शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिनके समाधान के लिए सभी जिलों में अतिरिक्त उपायुक्तों को (आय को छोडक़र) व्यापक अधिकार दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र परिवारों को मकान व फ्लैट देने के मामलों में भी उनकी आय तथा अन्य पात्रता की तसदीक ग्राम पंचायतों के माध्यम से करवाई जाए, क्योंकि पंचायत को सभी की वास्तविक स्थिति पता होती है और ऐसा करने से पात्र व्यक्तियों को मकान मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में नीचे के कर्मचारियों ने गलत तसदीक करके अपात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है उनकी रिपोर्ट सभी उपायुक्त मुख्य सचिव को भिजवाएं ताकि ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
उन्होंने कहा कि आमजन से प्राप्त होने वाली शिकायतों व समस्याओं के समाधान के लिए सभी उपायुक्त नियमित रूप से फालोअप लें तथा मुख्यालय को एटीआर भिजवाएं। यदि कोई अधिकारी निर्धारित समय सीमा में समस्या का समाधान नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनसंवाद पर प्राप्त जिन शिकायतों पर एक साल से कार्रवाई नहीं हुई उनमें संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। उन्होंने कहा कि उनकी अध्यक्षता में आयोजित बैठकों में निर्देश देने और आवश्यक बजट उपलब्ध करवाने के बाद भी यदि समस्याओं के समाधान में देरी हुई हैं तो संबंधित अधिकारी उसका भी स्पष्टीकरण दें।