सकारात्मक सोच और रोजगारोन्मुखी शिक्षा से नई पहचान बना रहा है चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय : प्रो. विजय कुमार
2028 तक नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय, कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम होंगे शुरू : प्रो. विजय कुमार

सिरसा, 20 जून।
चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने कहा है कि विश्वविद्यालय में सकारात्मक वातावरण विकसित करने और विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विश्वविद्यालय में ऐसा कार्य-संस्कृति (कल्चर) विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है जिसमें सकारात्मक सोच को बढ़ावा मिले और नकारात्मकता से दूरी बनाई जाए।
पल-पल समाचार के प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया द्वारा लिए गए विशेष पॉडकास्ट साक्षात्कार में कुलगुरु प्रो. विजय कुमार ने विश्वविद्यालय की वर्तमान उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश चोपड़ा भी उपस्थित रहे।
प्रो. विजय कुमार ने कहा कि वर्ष 2003 में स्थापित चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय अभी युवावस्था में है। विश्वविद्यालय ने 23 वर्षों की यात्रा पूरी कर ली है और वर्ष 2028 में अपने 25 वर्ष पूर्ण करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पास पर्याप्त आधारभूत संरचना, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता तथा आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं मौजूद हैं। रेडियो स्टेशन, वीडियो एडिटिंग लैब तथा कंप्यूटर लैब को आधुनिक बनाया गया है ताकि विद्यार्थियों को समयानुकूल शिक्षा और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स तथा साइबर सिक्योरिटी जैसे नए पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से बीएससी नर्सिंग तथा एमएससी फॉरेंसिक साइंस जैसे महत्वपूर्ण रोजगारपरक पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक शिक्षा (वोकेशनल स्टडीज) को भी बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रयोगशालाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त हो सके।
प्रो. विजय कुमार ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता केवल भवनों और सुविधाओं से नहीं बल्कि समाज के सहयोग, शिक्षकों की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों की उपलब्धियों से तय होती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय भी समाज के सहयोग से निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि समाज निर्माण का केंद्र होता है। उन्होंने कहा कि इंसान जन्म से केवल मनुष्य होता है, लेकिन उसे एक बेहतर इंसान बनाने का कार्य शिक्षा करती है। शिक्षा ही व्यक्ति को संस्कार, अनुभव और समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराती है।
जगदीश चोपड़ा ने विश्वविद्यालय की स्थापना के संघर्षपूर्ण दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय क्षेत्र के लोगों ने विश्वविद्यालय के लिए अनेक प्रयास किए थे। उन्होंने कहा कि उस दौर में यह भावना थी कि "रोटी आधी खाएंगे, लेकिन विश्वविद्यालय पूरा बनाएंगे।" आज जब विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कुलगुरु प्रो. विजय कुमार की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसकी इमारतों से नहीं होती, बल्कि उसकी शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और दूरदर्शी नेतृत्व से होती है। उनके अनुसार प्रो. विजय कुमार के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक नींव और अधिक मजबूत हुई है तथा आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय नई उपलब्धियों को प्राप्त करेगा।
पॉडकास्ट के दौरान प्रधान संपादक सुरेंद्र भाटिया ने युवाओं के कौशल विकास, रोजगार, नए पाठ्यक्रमों तथा विश्वविद्यालय की भविष्य की योजनाओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर देते हुए कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं बल्कि उन्हें रोजगार और जीवन की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2028 तक चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा तथा क्षेत्र के युवाओं के लिए अवसरों का प्रमुख केंद्र

