ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच सीबीआई अपने हाथ में लेगी, सुप्रीम कोर्ट में बोले सॉलिसिटर जनरल
May 25, 2026, 14:31 IST

नई दिल्ली, 25 मई मध्यप्रदेश की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) मामले की जांच अपने हाथ में लेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे रिकॉर्ड पर लिया। मुख्य न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि सीबीआई तुरंत मामला अपने पास लेकर जांच करेगी।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। आज सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार और अन्य लोगों के पास न जाएं, जांच अपने तरीके से होने दीजिए। सास पूर्व जिला जज हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि न्यायपालिका का दुरुपयोग किया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमें पुलिस या सीबीआई पर कोई संदेह नहीं है। दोनों निष्पक्षता से काम करेंगी, लेकिन हम नैरेटिव को लेकर चिंतित हैं जो शुरू हो गई है, इसलिए हम चाहते हैं कि सीबीआई मामले की जांच अपने हाथ में ले।
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने कहा कि सास एक चैनल (मीडिया) से दूसरे चैनल पर जा रही हैं। वह पुलिस के सामने अपना बयान नहीं दे रही हैं। वह सहयोग नहीं कर रही हैं। पीड़िता के परिवार के वकील ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई। हर दिन सबूत प्रभावित हो रहे हैं। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम आपको आश्वस्त करते हैं कि सब कुछ किया जाएगा, मीडिया में मत जाइए, हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह इस तरह के बयान न ले, हमें भी मीडिया से ही इसके बारे में पता चला, लेकिन मीडिया में समय से पहले बयान न दें। अपना बयान सीबीआई के सामने दर्ज कराएं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम जनता से अनुरोध करते हैं कि वह अटकलों से बचे और सबसे शीर्ष जांच एजेंसी पर भरोसा एवं विश्वास रखे। यह स्पष्ट किया जाता है कि हमने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। सभी पहलुओं की जांच करना जांच एजेंसी पर निर्भर है।
उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। आज सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वह पीड़िता के परिवार और अन्य लोगों के पास न जाएं, जांच अपने तरीके से होने दीजिए। सास पूर्व जिला जज हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि न्यायपालिका का दुरुपयोग किया जा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हमें पुलिस या सीबीआई पर कोई संदेह नहीं है। दोनों निष्पक्षता से काम करेंगी, लेकिन हम नैरेटिव को लेकर चिंतित हैं जो शुरू हो गई है, इसलिए हम चाहते हैं कि सीबीआई मामले की जांच अपने हाथ में ले।
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार ने कहा कि सास एक चैनल (मीडिया) से दूसरे चैनल पर जा रही हैं। वह पुलिस के सामने अपना बयान नहीं दे रही हैं। वह सहयोग नहीं कर रही हैं। पीड़िता के परिवार के वकील ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई। हर दिन सबूत प्रभावित हो रहे हैं। तब उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम आपको आश्वस्त करते हैं कि सब कुछ किया जाएगा, मीडिया में मत जाइए, हम मीडिया से भी अनुरोध करते हैं कि वह इस तरह के बयान न ले, हमें भी मीडिया से ही इसके बारे में पता चला, लेकिन मीडिया में समय से पहले बयान न दें। अपना बयान सीबीआई के सामने दर्ज कराएं।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हम जनता से अनुरोध करते हैं कि वह अटकलों से बचे और सबसे शीर्ष जांच एजेंसी पर भरोसा एवं विश्वास रखे। यह स्पष्ट किया जाता है कि हमने आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। सभी पहलुओं की जांच करना जांच एजेंसी पर निर्भर है।

