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अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस पर नारंग हॉस्पिटल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 
 अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस पर नारंग हॉस्पिटल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 सिरसा, 26 जून। अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर नारंग न्यूरोसाइकियाट्री हॉस्पिटल एवं नशा मुक्ति केंद्र, सिरसा में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. अमित नारंग, डॉ. अंजली नारंग एवं रीहैबिलिटेशन काउंसलर एवं साइकोलॉजिस्ट रेणु शेखावत ने नशे के दुष्प्रभावों एवं नशा मुक्ति के प्रभावी उपायों पर अपने विचार व्यक्त किए।

अपने संबोधन में डॉ. अमित नारंग ने कहा कि नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक जीवन पर गंभीर दुष्प्रभाव डालता है। अवैध ड्रग्स शरीर के विभिन्न अंगों के साथ-साथ मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित करती हैं, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, निर्णय लेने की शक्ति, स्मरण शक्ति एवं व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि नशा केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। इसलिए समय पर उपचार एवं जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम के दौरान नारंग हॉस्पिटल से सफलतापूर्वक नशा छोड़ चुके कई व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डॉ. नारंग ने उन्हें समाज की “रियल आर्मी” बताते हुए कहा कि जिन्होंने अपने मन और नशे की लत पर विजय प्राप्त की है, वे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। सभी ने “Say No to Drugs” का संकल्प लिया तथा केक काटकर नशा मुक्ति का संदेश दिया।

रीहैबिलिटेशन काउंसलर एवं साइकोलॉजिस्ट रेणु शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि नशा शुरू होने के पीछे कई कारण होते हैं, जैसे तनाव, गलत संगति, जिज्ञासा एवं भावनात्मक समस्याएं। जिस प्रकार नशा करने के पीछे कोई कारण होता है, उसी प्रकार नशा छोड़ने के लिए भी व्यक्ति को अपने जीवन में एक मजबूत कारण और लक्ष्य निर्धारित करना होगा। उन्होंने कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास से ही नशे पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने उपस्थित लोगों को सलाह दी कि जिस समय नशा करने की इच्छा होती है, उस समय के लिए एक साप्ताहिक चार्ट तैयार करें। एक दिन शारीरिक गतिविधियां, दूसरे दिन मेडिटेशन तथा अन्य सकारात्मक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और कम से कम एक सप्ताह तक नियमित रूप से इसका पालन करें। साथ ही उन्होंने संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

हॉस्पिटल के फार्मासिस्ट संजय वर्मा ने बताया कि नशा मुक्ति उपचार के दौरान मरीजों को नियमित रूप से जागरूक किया जाता है तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार धीरे-धीरे दवाइयों की मात्रा कम करने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि सही उपचार, नियमित फॉलो-अप और सकारात्मक जीवनशैली अपनाकर मरीज पूरी तरह स्वस्थ जीवन की ओर लौट सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान नशा छोड़ चुके कई लोगों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि नशे की लत ने किस प्रकार उनके स्वास्थ्य, परिवार, आर्थिक स्थिति एवं सामाजिक जीवन को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार, परिवार के सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने नशे से मुक्ति प्राप्त की। उनके अनुभवों ने उपस्थित लोगों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।

अंत में हॉस्पिटल के मैनेजर मोहन पुनिया, परगत सिंह, समस्त नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई तथा सभी ने समाज को नशा मुक्त बनाने का संकल्प लेते हुए लोगों से नशीले पदार्थों से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाना, नशे से मुक्त हुए लोगों का सम्मान करना तथा युवाओं सहित सभी नागरिकों को स्वस्थ, सकारात्मक एवं नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना था।