हर राज्य में बने वृक्षों का जीवंत संग्रहालय, दुनिया देखे रंग-बिरंगा भारत

*राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के किनारे योजनाबद्ध वृक्षारोपण से बढ़ेगी हरियाली, प्रत्येक राज्य में विकसित हों विशिष्ट वृक्ष प्रजातियों के उद्यान*
*बच्चों और विद्यार्थियों के लिए प्रकृति भ्रमण कार्यक्रम, जनजागरूकता और जनसहभागिता से साकार होगा हरित भारत का सपना*
*लेखक : गुरविंदर सिंह घुम्मन*
चिंतक, लेखक एवं समाजसेवी, सिरसा
भारत प्राकृतिक विविधताओं से समृद्ध देश है। यहां अलग-अलग राज्यों की जलवायु, मिट्टी और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार हजारों प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि इस प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को इससे परिचित करवाया जाए। यदि प्रत्येक राज्य में वृक्षों का जीवंत संग्रहालय विकसित किया जाए तो देश की हरियाली बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
देश में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों का लगातार विस्तार हो रहा है। इन सड़कों के दोनों ओर काफी भूमि वृक्षारोपण के लिए उपयोगी हो सकती है। यदि क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुसार उचित प्रजातियों का चयन करके वैज्ञानिक ढंग से पौधे लगाए जाएं तो आने वाले वर्षों में सड़कें हरे-भरे वृक्षों से आच्छादित दिखाई देंगी। इससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा और यात्रियों को प्राकृतिक सुंदरता का आनंद भी प्राप्त होगा।
### प्रत्येक राज्य में विकसित हों विशेष वृक्ष उद्यान
देश के प्रत्येक राज्य में कम से कम एक या दो ऐसे उद्यान विकसित किए जाने चाहिए, जहां स्थानीय, दुर्लभ, फलदार, फूलदार, छायादार और औषधीय वृक्षों की विभिन्न प्रजातियां संरक्षित हों। प्रत्येक वृक्ष के साथ उसका नाम, विशेषताएं, उपयोगिता और पर्यावरणीय महत्व बताने वाली जानकारी उपलब्ध करवाई जाए। इन उद्यानों को बच्चों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए प्रकृति शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
### विद्यालयों में शुरू हों प्रकृति भ्रमण कार्यक्रम
आज अधिकांश बच्चे पेड़-पौधों की पहचान पुस्तकों अथवा मोबाइल के माध्यम से करते हैं। यदि विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित प्रकृति भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो विद्यार्थी वृक्षों को नजदीक से देखकर उनकी उपयोगिता समझ सकेंगे। इससे उनमें पर्यावरण के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और संरक्षण की भावना विकसित होगी।
### जनसहभागिता से सफल होगा अभियान
वृक्षारोपण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वन विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों, पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक संस्थाओं, नर्सरी संचालकों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रत्येक क्षेत्र में उपयुक्त प्रजातियों का चयन, पौधों की नियमित देखभाल और उनके जीवित रहने की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।
### ब्यूटीफुल इंडिया से कलरफुल इंडिया तक
वर्ष 2018 में सिरसा से शुरू किया गया मेरा सपना अब पूरे भारत के लिए एक व्यापक संकल्प है। कल्पना कीजिए, जब देश के शहरों, गांवों, सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर विभिन्न रंगों के फूलों तथा हरी-भरी पत्तियों वाले वृक्ष दिखाई देंगे, तब भारत की प्राकृतिक सुंदरता कितनी अद्भुत होगी।
*आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें कि हर घर में उपयुक्त वृक्ष, हर गांव में विविध हरियाली और हर राज्य में उसकी प्राकृतिक विरासत का जीवंत संग्रहालय विकसित हो। यही सुंदर, समृद्ध और रंग-बिरंगे भारत की वास्तविक पहचान बनेगी।*

