40 साल पुराने नींबू के वृक्ष से तैयार करवाए एक हजार पौधे, वृक्षारोपण का अनूठा प्रयोग बना मिसाल

सिरसा के पर्यावरण प्रेमी गुरविंदर सिंह घुम्मन ने वर्ष 2018 में शुरू किया था सात प्रकार के वृक्षों के पौधे तैयार करने का अभियान, अनुभव और जनभागीदारी से हरियाली बढ़ाने की अनूठी पहल
नर्सरियों में पौधे उपलब्ध, लेकिन उन्हें लेने वाले कम; बुजुर्गों की पसंद के फलदार, फूलदार, छायादार और औषधीय पौधे लगाने पर दिया जोर
विशेष लेख | भाग–3
लेखक : गुरविंदर सिंह घुम्मन, चिंतक, लेखक एवं समाजसेवी, सिरसा
वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों की सही प्रजाति का चयन, उनकी देखभाल और उन्हें बड़ा वृक्ष बनाने की जिम्मेदारी भी समाज को निभानी होगी। यदि लोगों को उनकी पसंद और आवश्यकता के अनुसार पौधे उपलब्ध करवाए जाएं तो वृक्षारोपण का अभियान अधिक सफल हो सकता है। इसी सोच के साथ मैंने वर्ष 2018 में सिरसा शहर में सात प्रकार के वृक्षों के पौधे तैयार करवाने का प्रयोग शुरू किया था। इस प्रयोग के दौरान मुझे अनेक महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त हुए, जिनसे यह विश्वास और मजबूत हुआ कि कम लागत, सही जानकारी और जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
वर्ष 2018 में मैंने सिरसा शहर में सात प्रकार के वृक्षों का पौधारोपण करवाया था। इस दौरान पौधों की उपलब्धता, उनकी प्रजातियों और लोगों की पसंद का अध्ययन करने का अवसर मिला। मुझे पता चला कि अधिकांश वृक्ष प्रजातियों के बीज आसानी से उपलब्ध हैं। यदि इन बीजों को सही तरीके से अंकुरित किया जाए तो बहुत कम लागत में बड़ी संख्या में पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे वृक्षारोपण पर होने वाला खर्च कम होगा और अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा सकेगा।
### 1986 में लगाया नींबू का पौधा बना प्रयोग का आधार
मेरे पिताजी वर्ष 1986 में कागजी और बीज रहित नींबू का एक पौधा लेकर आए थे। मेरी माताजी ने लगभग 40 वर्षों तक उस पौधे की सेवा और देखभाल की। आज भी वह वृक्ष परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है। मैंने उसी पुराने नींबू के वृक्ष के नींबुओं का उपयोग करके पौधे तैयार करवाने का प्रयोग किया। इसके अंतर्गत लगभग एक हजार पौधे तैयार करवाए गए। यह अनुभव मेरे लिए अत्यंत उत्साहजनक रहा।
इस प्रयोग से यह समझ विकसित हुई कि घरों में लगे पुराने फलदार वृक्ष भी नई पौध तैयार करने के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं। हालांकि बीज से तैयार पौधों में मूल वृक्ष जैसे गुण हमेशा नहीं मिलते, इसलिए अच्छी गुणवत्ता और समान विशेषताओं वाले फलदार पौधे तैयार करने के लिए कलम तथा ग्राफ्टिंग जैसी वैज्ञानिक विधियों का उपयोग भी आवश्यक है।
### सात प्रकार के वृक्षों पर किया प्रयोग
वर्ष 2018 में सिरसा में शुरू किए गए अभियान के दौरान फूलदार, छायादार, फलदार, औषधीय और शोभाकार वृक्षों के पौधे तैयार करने तथा लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। मेरा उद्देश्य केवल पौधों की संख्या बढ़ाना नहीं था, बल्कि ऐसे वृक्षों को प्रोत्साहित करना था जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करें।
फूलदार वृक्ष वातावरण की सुंदरता बढ़ाते हैं, छायादार वृक्ष गर्मी से राहत देते हैं, फलदार वृक्ष पौष्टिक फल उपलब्ध करवाते हैं और औषधीय महत्व वाले वृक्ष स्वास्थ्य तथा जैव विविधता की दृष्टि से उपयोगी होते हैं। इसलिए वृक्षारोपण में विभिन्न प्रजातियों का संतुलन आवश्यक है।
### नर्सरियों में पौधे हैं, लेकिन लेने वाले नहीं आते
वृक्षारोपण अभियान के दौरान मैंने कई नर्सरियों का निरीक्षण किया। वहां समय-समय पर नई प्रजातियों के पौधे तैयार किए जाते हैं, लेकिन कई बार उन्हें लेने वाले पर्याप्त लोग नहीं पहुंचते। परिणामस्वरूप पौधे दो से तीन वर्षों तक नर्सरियों में पड़े रहते हैं और उनकी उपयोगिता सीमित हो जाती है।
इस समस्या का समाधान केवल अधिक पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि पौधों की मांग और वितरण के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। नर्सरी संचालकों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और स्थानीय नागरिकों को मिलकर ऐसा प्रयास करना चाहिए, जिससे तैयार पौधे सही समय पर जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकें।
### बुजुर्गों की पसंद का सम्मान करना जरूरी
मेरे अनुभव में अनेक बुजुर्ग पारंपरिक वृक्षों को लगाना अधिक पसंद करते हैं। वे नींबू, अमरूद, अनार और अन्य फलदार पौधों के साथ ऐसे वृक्ष लगाना चाहते हैं, जिनसे आने वाली पीढ़ियों को भी लाभ मिले। बुजुर्गों का वृक्षों से भावनात्मक लगाव होता है। वे पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी करते हैं।
यदि वृक्षारोपण अभियान में बुजुर्गों की पसंद और अनुभव को महत्व दिया जाए तो पौधों के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है। इसके साथ युवाओं और बच्चों को भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण पारिवारिक और सामाजिक संस्कार का हिस्सा बन सके।
### बीज से पौधे तैयार करना आसान और कम खर्चीला
देशभर में विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों के बीज उपलब्ध हैं। उचित मौसम, मिट्टी, नमी और अंकुरण की वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके कम लागत में पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं में छोटी-छोटी पौधशालाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे न केवल पौधों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि विद्यार्थियों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
### लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
वृक्षारोपण की सफलता के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सा पौधा किस क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल है। हर स्थान पर एक जैसी प्रजातियां लगाना उचित नहीं है। सिरसा जैसे गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क क्षेत्र में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तथा कम पानी में विकसित होने वाले वृक्षों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सरकार, वन विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, नर्सरी संचालकों और सामाजिक संस्थाओं को मिलकर नागरिकों को सही पौधों के चयन, रोपण की विधि और देखभाल के संबंध में जागरूक करना चाहिए।
### वृक्ष लगाएं, पौधे नहीं भविष्य लगाएं
वृक्षारोपण केवल सरकारी अभियान या एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक परिवार अपनी पसंद का एक पौधा लगाकर उसे बड़ा वृक्ष बनाने का संकल्प ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन संभव है।
मेरा मानना है कि वृक्षारोपण की वास्तविक सफलता लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि जीवित रहकर बड़े वृक्ष बनने वाले पौधों से मापी जानी चाहिए। अनुभव, वैज्ञानिक जानकारी और जनता की भागीदारी से हरियाली बढ़ाने का सपना साकार किया जा सकता है।
वृक्ष लगाएं, पौधे नहीं भविष्य लगाएं — ब्यूटीफुल इंडिया, कलरफुल इंडिया की ओर एक कदम।

