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धर्म तोडऩे की नहीं, जोडऩे की देते है शिक्षात्न गुरमीत राम रहीम

- धर्म एक ऐसी चट्टान जिसे ना तो बादल हटा सकता है और ना ही कोई तुफान
- धर्म इंसान को इंसान व इंसान को भगवान और इंसान को सृष्टि से जोडऩे का करते हैं काम
 
धर्म तोडऩे की नहीं, जोडऩे की देते है शिक्षात्न गुरमीत राम रहीम 

हमारे देश में कुछ ऐसी संस्कृति भी आई जिन्होंने हमारी संस्कृति को खत्म करने की कोशिश की। लेकिन यह सच है कि जो धर्म होता है वह ऐसी चट्टान होता है जिसे ना बादल, ना धूप, ना तूफान ना हिला सकता था, ना हिला सका है और ना ही कभी हिला सकेगा। हालांकि धर्म को मानने वाले बदल जाते है, यह हकीकत है। कई लोग धर्म का दिखावा करते हैं, ढोंग करते हैं। अगर कोई सच्चे दिल से धर्म को मानता है तो पता चलता है कि धर्म तो जोडऩे का नाम है, तोडऩे का नाम नहीं। धर्म इंसान को इंसान से, इंसान को भगवान से और इंसान को सृष्टि से जोडऩे का काम करते हैं। यह है हमारा धर्म। तोडऩा तो धर्म में कहीं भी लिखा ही नहीं है। हमने सभी धर्मों पर रिसर्च कर ली है और उनमें तोडऩा शब्द कही भी नहीं लिखा है। ये विचार  संत  गुरमीत राम रहीम सिंह  इंसां ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के जिला बागपत स्थित शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा से ऑनलाइन गुरुकुल के माध्यम से जुड़ी देश-विदेश की साध-संगत को संबोधित करते हुए फरमाए। उन्होंने  ऑनलाइन रूहानी सत्संग के दौरान आह्वान किया कि इंसान धर्म की सुने और जो धर्मों में लिखा गया है उसको जरूर माने। लोग कहते हैं कि मैं धर्म का नुमाइंदा हूँ, यह अच्छी बात है। लेकिन क्या वह धर्म को मानता भी है, कभी उसे यह भी देख लेना चाहिए। हालांकि वह धर्म का पहनावा पहनता है तथा सरनेम भी लगाता है धर्म का। लेकिन क्या वह धर्म की बात को मानता है। आजकल लोग में मुंह में सिगरेट रखते है और शराब भी पीते है, ऐसा करने की किसी भी धर्म में शिक्षा नहीं दी गई है। आज इंसान धर्मों को मानता नहीं, बल्कि उनको बदनाम कर रहा है। नशा करने की किसी भी धर्म में इजाजत ही नहीं है, फिर क्यूं लोग ऐसे बुरे कर्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म को मानकर देखो, धर्म पर चलकर देखो, इस पल धर्म को मान लो तो अगले पल इस धरती पर राम की चर्चा होने लगेगी और प्यार मोहब्बत की गंगा बहने लगेगी। सभी लोग अपने अपने धर्म को मान लो, सभी धर्म एक ही हैं। धर्म को बदलने में कुछ नहीं पड़ा, इसलिए इंसान को धर्म नहीं बल्कि अपनी सोच को बदलना चाहिए। आज चंद पैसे के लिए इंसान एक-दूसरे के पीछे भाग खड़े होते है और अपने वंश को झूठला देते है, यह सब गलत है।  इसलिए इंसान को चाहिए कि वह धर्म को पढऩे के साथ-साथ धर्म में जो लिखा हुआ है उसको भी जरूर माने। उन्होंने  कहा कि हमारा जो धर्मो में लिखा है उसको बताना हमारा फर्ज है, मानो या ना मोनो ये आपकी मर्जी है।

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