Pal Pal India

दिल्ली बनाम केंद्र मामले पर सीजेआई ने कहा

-सुनवाई के बीच बड़ी बेंच में भेजने की मांग क्यों 
 
  दिल्ली बनाम केंद्र मामले पर सीजेआई ने कहा 
नई दिल्ली, 18 जनवरी। दिल्ली बनाम केंद्र मामले में प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच सुनवाई कर रही है। सुनवाई पूरी होने से पहले केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को बड़ी बेंच में भेजने की मांग की। इस पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब सुनवाई पूरी होने वाली है तब ऐसी मांग कैसे की जा सकती है।

इससे पहले 17 जनवरी को सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा था कि उपराज्यपाल के खिलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गैर जरूरी विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, वो भी तब जब संवैधानिक बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। मेहता ने कहा था कि जब सुप्रीम कोर्ट दिल्ली सरकार या केंद्र सरकार में से दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग सहित सेवाओं को नियंत्रित करने का अधिकार किसके पास है, इस मामले पर सुनवाई कर रहा है, तो इस तरह का प्रदर्शन करना उचित नहीं है। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि हम इस मामले में नहीं जा रहे हैं। हम केवल यहां संवैधानिक पहलू पर विचार करेंगे।

चीफ जस्टिस ने केंद्र पर सवाल उठाते हुए मेहता से कहा था कि आपकी इस दलील को मंजूर करना मुश्किल है कि संघवाद केवल राज्यों और केंद्र पर लागू होता है। यहां हाइब्रिड संघवाद भी हो सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा था कि केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्र के बीच संघवाद की अलग स्थित हो सकती है। संघवाद के सभी लक्षण भले न हों लेकिन कुछ हो भी सकते हैं।

चीफ जस्टिस ने कहा था कि केंद्रशासित प्रदेशों को संघ के नियंत्रण में रखा जाता है, क्योंकि प्रत्येक केंद्रशासित प्रदेश के अलग-अलग सामरिक महत्व के कारण यह रक्षा या ऐसे ही अन्य महत्व के होते हैं। तब मेहता ने कहा था कि दिल्ली का देश की राजधानी होने का अपना अलग महत्व है। इसलिए संविधान ने दिल्ली को इतने बड़े देश की राजधानी होने के लिए एक सामान्य स्थान दिया है और बहुत सचेत रूप से अपनी शक्तियों को केवल उन प्रविष्टियों तक सीमित कर दिया है जो केंद्रशासित प्रदेश पर लागू हो सकती हैं।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा था कि दिल्ली में हाइब्रिड संघवाद क्यों नहीं हो सकता? कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली को अन्य राज्यों के जितने अधिकार नहीं लेकिन उसके जैसे कुछ हक दिए जा सकते हैं। अगर नौकरशाहों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का हक दिल्ली सरकार के पास न हो तो यह दिल्ली सरकार के नियंत्रण को कम नहीं करता है। कोर्ट ने पूछा था कि जब जम्मू-कश्मीर में पब्लिक सर्विस कमीशन है तो दिल्ली में क्यों नहीं।