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अंधेरे में भी सड़क पर पत्थर से अलर्ट करके हादसे रोकेगा 'स्मार्ट हेलमेट'

 'सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026के दूसरे दिन इनोवेशन, रिसर्च मॉडल्स की धूम
 
 अंधेरे में भी सड़क पर पत्थर से अलर्ट करके हादसे रोकेगा 'स्मार्ट हेलमेट' 
  गुरुग्राम। श्री गुरु गोबिंद सिंह ट्राईसेंटेनरी यूनिवर्सिटी 

(एसजीटीयू) में तीन दिवसीय 'सिनर्जी-ज्ञानोत्सव-2026' में विविध स्टॉल्स पर विज्ञान, चिकित्सा, पैरामेडिकल, आयुर्वेद, डेंटल और मेंटल हेल्थ, हैप्पीनेस, वेल बीइंग, वीजा समेत दर्जनों इनोवेटिव मॉडल, डिवाइसेज, उपकरण डिस्प्ले के लिए रखे गए। इतनी वैरायटी थी, मानो 'मिनी साइंस वर्ल्ड' एसजीटी यूनिवर्सिटी के प्रांगण में उतर आया हो।
इनोवेशन, ज्ञान, ऊर्जा के संगम स्थल पर हर ओर  'फ्यूचर रेडी सॉल्यूशंस' दिखाई दे रहे थे।
'जय अनुसंधान' हर प्रतिभागी के दिल-दिमाग पर छाया हुआ था।
टेक होराइजन, शेपिंग  टुमारो'ज वर्ल्ड, एआई,एमएल,ब्लॉक चेन, बिग डाटा, एआई ड्रिवन हेल्थकेयर सिस्टम आदि पर  अनुसंधान व कड़ी मेहनत के चलते हर स्टॉल इनोवेशन हब जैसी प्रतीत हुई।
 बाइक सवारों का कवच 
 सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एसजीटी विश्वविद्यालय ने ऐसा 'स्मार्ट हेलमेट' विकसित किया है जो कोहरे, अंधेरे और खराब मौसम के बावजूद बाइक सवार के लिए 'कवच' का काम करेगा। कम दृश्यता वाली परिस्थितियों में भी यह हादसे रोक कर प्राणरक्षक साबित होगा।
इस हेलमेट में कई उन्नत स्मार्ट फीचर्स शामिल हैं, जैसे कि कम दृश्यता में सड़क पर पत्थर या अन्य वस्तुओं का पता लगाने के लिए इन्फ्रारेड थर्मल इमेजिंग डिवाइस सक्रिय रहेगी। बाधाओं की दूरी मापने के लिए डिस्टेंस सेंसिंग यूनिट काम करेगी। एक केंद्रीय प्रोसेसिंग यूनिट इन सभी डेटा का विश्लेषण कर खतरे का आकलन करेगी है, जिससे बचाव के लिए त्वरित और सटीक निर्णय संभव हो पाएगा। सवारों को विजुअल अलर्ट, बोन कंडक्शन स्पीकर्स के माध्यम से ऑडियो फीडबैक और हैप्टिक वाइब्रेशन के जरिए चेतावनी दी जाती है, जिससे वे बिना ध्यान भटकाए अपना बचाव कर सकते हैं। यह सिस्टम लगातार आसपास के वातावरण की निगरानी करता है और जोखिम की स्थिति में  अलर्ट सक्रिय करता है।
यह प्रोजेक्ट स्कूल ऑफ इमर्जिंग मीडिया, कम्युनिकेशन एंड फिल्म स्टडीज, स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और स्कूल ऑफ डिजाइन के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। 
'स्मार्ट हेलमेट' को पेटेंट करवाने के लिए आवेदन भी कर दिया गया है।

टीम के सदस्य:
प्रधान अन्वेषक: डॉ. सूरज दास
सह-प्रधान अन्वेषक : डॉ. अभिषेक दुबे, डॉ. विरेंद्र कुमार, डॉ. अतुल कुमार मिश्रा
टीम सदस्य:  संदीप कौर,  हर्षिता शर्मा व निशा।

 *बाढ़ से बचाएगी
पारदर्शी 'फ्लड वॉल'* 

स्कूल ऑफ एप्लाइड एंड बेसिक साइंसेज की टीम ने
शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए एक अभिनव समाधान प्रस्तुत किया है। उनका सेंसर आधारित ऑटोमैटिक फ्लड प्रोटेक्शन वॉल सिस्टम उन्नत तकनीक और व्यावहारिक डिजाइन का समन्वय करते हुए जलभराव से होने वाले नुकसान से बचाने में सक्षम है।
यह प्रणाली अल्ट्रासोनिक और वाटर सेंसर की मदद से लगातार जलस्तर की निगरानी करती है और पानी के स्तर के बढ़ते ही स्वतः एक रिट्रेक्टेबल (स्वतः ऊपर उठने वाली) पारदर्शी 'फ्लड वॉल' सक्रिय होकर आने वाले पानी को रोक देती है। इसमें लगा इन-बिल्ट वाटर पंप और भूमिगत जलाशय (रिजर्वायर) सिस्टम अतिरिक्त पानी को नियंत्रित आउटलेट पाइपों के माध्यम से बाहर निकालता है, जिससे ओवरफ्लो का खतरा कम हो जाता है।
 

 घटनास्थल पर नहीं खराब होंगे साक्ष्य, जुटाना आसान 

स्कूल ऑफ बेसिक एंड एप्लाइड साइंस की टीम ने एक अभिनव फोरेंसिक उपकरण “लेटेंट फ्यूमिंग गन” प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य घटनास्थल पर साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। यह पोर्टेबल और हैंड-हेल्ड डिवाइस आयोडीन सब्लिमेशन तकनीक का उपयोग करती है, जिससे उत्पन्न वाष्प उंगलियों के निशानों में मौजूद लिपिड अवशेषों के साथ प्रतिक्रिया करके अस्थायी रूप से रेखाओं (रिज पैटर्न) को उजागर करती है, बिना साक्ष्य को नुकसान पहुंचाए।
इस उपकरण में हीटिंग एलिमेंट, रोटेटिंग फैन, यूवी/विजिबल लाइट स्विच और आईआर/विजन कैमरा जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं, जो घटनास्थल पर ही तेज और सुरक्षित तरीके से लेटेंट फिंगरप्रिंट विकसित करने में सक्षम बनाती हैं। इससे लैब प्रोसेसिंग की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
यह उपकरण न केवल फिंगरप्रिंट पहचान में बल्कि इम्प्रेशन मार्क्स का पता लगाने और गुप्त लेखन को पढ़ने में भी उपयोगी साबित हो सकता है। यह फोरेंसिक तकनीक और अपराध जांच की दक्षता में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।