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भाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।

 शासन प्रशासन व अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें: लाल बहादुर खोवाल
 
  भाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
   हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करेंभाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
शासन प्रशासन व अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें: लाल बहादुर खोवाल।
    हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करेंभाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
शासन प्रशासन व अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें: लाल बहादुर खोवाल।
    हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करेंभाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
शासन प्रशासन व अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें: लाल बहादुर खोवाल।
    हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करेंभाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
शासन प्रशासन व अधिकारी प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें: लाल बहादुर खोवाल।
    हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करेंभाजपा सरकार द्वारा यूट्यूबर व रिपोर्टर्स पर दबाव प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला : लाल बहादुर खोवाल।
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    हिसार 26 अगस्त : लोकतंत्र में स्वतंत्र मीडिया चौथा स्तंभ है और यह समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा सरकार अब यूट्यूबर रिपोर्टर्स पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश कर रही है। स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ झूठी, मनमानी एफआईआर दर्ज करना और उन्हें बिना कोई नोटिस या कानूनी प्रक्रिया के पुलिस थानों में रोकना, स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है। जो संविधान में दिए अधिकारों के खिलाफ है। यह बात एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल प्रदेश अध्यक्ष,  हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट एवं पीसीसी डेलीगेट ने कही। 
    एडवोकेट खोवाल कहा कि इस तरह की कार्रवाई केवल व्यक्तिगत उत्पीडऩ नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर हमला है। कानून का उपयोग पत्रकारों को दबाने के लिए किया जाना, प्रेस की स्वतंत्रता पर अवैध रोक है। पत्रकारों को किसी भी राजनीतिक दबाव या पक्षपात के बिना तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। स्वतंत्र रिपोर्टर को डराने-धमकाने, या उनके रिपोर्टिंग दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव बनाने की कोशिश है जो न्यायालय में चुनौती के देने योग्य है। मैं शासन प्रशासन व सभी संबंधित अधिकारियों से उम्मीद करता हूं  कि वे तत्काल ऐसे उत्पीडऩ को रोकें और प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित करें