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सकारात्मक और नकारात्मक रिइनफोर्समेंट: व्यवहार परिवर्तन की प्रभावी तकनीक

 
  सकारात्मक और नकारात्मक रिइनफोर्समेंट: व्यवहार परिवर्तन की प्रभावी तकनीक
मनोविज्ञान में व्यवहार को समझने और उसे सकारात्मक दिशा में बदलने के लिए कई सिद्धांत दिए गए हैं। इनमें रिइनफोर्समेंट थ्योरी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस सिद्धांत को प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक B. F. Skinner ने विस्तार से समझाया। उनके अनुसार व्यक्ति का व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि किसी कार्य के बाद उसे कैसी प्रतिक्रिया या परिणाम मिलता है। यदि किसी कार्य के बाद सकारात्मक अनुभव या लाभ मिलता है, तो व्यक्ति उस व्यवहार को दोहराने की कोशिश करता है।
रिइनफोर्समेंट मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—पॉजिटिव रिइनफोर्समेंट और नेगेटिव रिइनफोर्समेंट।
पॉजिटिव रिइनफोर्समेंट का अर्थ है किसी अच्छे व्यवहार के बाद व्यक्ति को कोई इनाम, प्रशंसा या प्रोत्साहन देना, ताकि वह व्यवहार और मजबूत हो जाए। उदाहरण के लिए, यदि कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छे अंक प्राप्त करता है और माता-पिता उसे उपहार या प्रशंसा देते हैं, तो यह पॉजिटिव रिइनफोर्समेंट है। इसी प्रकार यदि शिक्षक कक्षा में सही उत्तर देने वाले छात्र की प्रशंसा करते हैं, तो छात्र भविष्य में भी अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होता है। यह तकनीक शिक्षा और बच्चों के विकास में बहुत प्रभावी मानी जाती है।
दूसरी ओर, नेगेटिव रिइनफोर्समेंट का अर्थ है किसी अप्रिय या असुविधाजनक स्थिति को हटा देना, ताकि सही व्यवहार को बढ़ावा मिले। इसमें सज़ा नहीं दी जाती, बल्कि परेशानी को कम किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि बच्चा समय पर अपना होमवर्क पूरा कर लेता है और शिक्षक उसे अतिरिक्त कार्य से छूट दे देते हैं, तो यह नेगेटिव रिइनफोर्समेंट कहलाता है। इसी तरह कार में सीट बेल्ट लगाने पर चेतावनी की आवाज बंद हो जाती है, जो व्यक्ति को सही व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
दोनों प्रकार की रिइनफोर्समेंट का उद्देश्य एक ही होता है—व्यक्ति के सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना। शिक्षा, काउंसलिंग और पालन-पोषण में इन तकनीकों का सही उपयोग बच्चों और युवाओं के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

— कंचन मेहता, सिरसा