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खेजड़ी संरक्षण को लेकर कुमारी सैलजा की चिंता, सोलर परियोजनाओं में वृक्ष कटाई पर उठाए सवाल

 
  खेजड़ी संरक्षण को लेकर कुमारी सैलजा की चिंता, सोलर परियोजनाओं में वृक्ष कटाई पर उठाए सवाल
सिरसा/बीकानेर/जयपुर।
राजस्थान में खेजड़ी (Prosopis cineraria) सहित अन्य वृक्षों की कटाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कुमारी सैलजा ने कहा है कि सोलर परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई पर्यावरण, जनभावनाओं और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर संवेदनशीलता और संतुलन के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि विकास आवश्यक है, परंतु वह प्रकृति के विनाश की कीमत पर नहीं होना चाहिए। सैलजा ने प्रश्न उठाया कि क्या सोलर प्लांटों के लिए ऐसे वैकल्पिक स्थान चिन्हित नहीं किए जा सकते, जहाँ वृक्षों और पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुँचे।
बीकानेर क्षेत्र में चल रहे विरोध और संत समाज के आमरण अनशन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन विकास के विरोध में नहीं, बल्कि उन नीतियों के विरोध में है जो पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक विरासत की अनदेखी करती प्रतीत होती हैं।
सैलजा ने कहा कि खेजड़ी राजस्थान की जीवनदायिनी वृक्ष प्रजाति है, जो मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, पशुधन, ग्रामीण जीवन और लोक आस्था से गहराई से जुड़ी है। ऐसे में किसी भी परियोजना से पहले व्यापक पर्यावरणीय आकलन, स्थानीय समुदायों से संवाद और विकल्पों की गंभीर पड़ताल आवश्यक है।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि सोलर ऊर्जा जैसे हरित विकल्पों को बढ़ावा देते समय वृक्षों की रक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, ताकि विकास और पर्यावरण—दोनों साथ-साथ चल सकें।