एचपीएससी ने 35 प्रतिशत क्राइटेरिया बनाकर आरक्षित वर्ग के लिए नौकरियों के दरवाजे बंद किए: सैलजा

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव, पूर्व मंत्री तथा सिरसा से लोकसभा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) ने क्लास-वन और क्लास-टू की भर्तियों में 35 प्रतिशत का क्राइटेरिया लागू कर चयन की जगह रिजेक्शन की नीति अपना ली है। इससे न केवल आरक्षित वर्ग के युवाओं के लिए नौकरियों के दरवाजे बंद किए जा रहे हैं, बल्कि सामान्य वर्ग के युवाओं के लिए भी सरकारी सेवाओं में प्रवेश लगभग असंभव बना दिया गया है। इस फैसले से प्रदेश भर में युवाओं में भारी रोष है।
आज मीडिया को जारी एक बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने इसके लिए एचपीएससी के अध्यक्ष को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि चूंकि आयोग के अध्यक्ष हरियाणा से बाहर के हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश के युवाओं की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। वे नहीं चाहते कि हरियाणा के युवाओं को प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी की नौकरियों में अवसर मिले। उन्होंने कहा कि हाल ही में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए गए असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की मुख्य परीक्षा के परिणामों से स्थिति पूरी तरह उजागर हो गई है। विभिन्न विषयों के 1010 पदों के मुकाबले केवल 336 अभ्यर्थियों को ही उत्तीर्ण किया गया, जबकि नियमों के अनुसार 2020 अभ्यर्थियों को पास किया जाना चाहिए था। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ तो और भी बड़ा अन्याय किया गया है। सभी आरक्षित श्रेणियों में मिलाकर केवल 166 अभ्यर्थियों को पास किया गया, जबकि 1016 अभ्यर्थियों को पास किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यदि अंग्रेजी विषय की बात करें, तो आरक्षित वर्ग के लिए 301 पद विज्ञापित किए गए थे, जिनमें से मात्र 16 अभ्यर्थियों को ही पास किया गया और शेष 285 पद खाली छोड़ दिए गए। इसी प्रकार, अंग्रेजी विषय में अनुसूचित जाति के ओएससी और डीएससी वर्ग के लिए 120 पदों का विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन इन श्रेणियों से केवल तीन अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण किए गए। अंग्रेजी विषय में कुल 613 पद विज्ञापित थे, जिनके मुकाबले केवल 151 अभ्यर्थियों को पास किया गया, जबकि शेष सभी को रिजेक्ट कर दिया गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हरियाणा लोक सेवा आयोग ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए दरवाजे लगभग पूरी तरह बंद कर दिए हैं। सांसद ने कहा कि इसी तरह, सामान्य वर्ग के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर के 502 पद विज्ञापित किए गए थे, लेकिन इनके मुकाबले केवल 336 अभ्यर्थियों को ही पास किया गया, जबकि 1004 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था। कुमारी सैलजा ने कहा कि यही स्थिति एएमओ और पीजीटी की भर्तियों में भी देखने को मिली है, जहां 35 प्रतिशत क्राइटेरिया की दीवार खड़ी कर अधिकांश पद खाली छोड़ दिए गए और अभ्यर्थियों को साक्षात्कार तक पहुंचने ही नहीं दिया गया।
उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की कि सब्जेक्ट नॉलेज परीक्षा में कुल पदों के कम से कम दो गुना अभ्यर्थियों को पास कर साक्षात्कार के लिए बुलाया जाए तथा सभी विज्ञापित पदों को भरा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावे के लिए भर्तियों के विज्ञापन जारी करती है, जबकि वास्तविकता में पद खाली छोड़ दिए जाते हैं, जो प्रदेश के युवाओं के साथ सीधा धोखा है। इसके साथ-साथ कुमारी सैलजा ने मांग की कि हरियाणा लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर हरियाणा के ही किसी योग्य और शिक्षित व्यक्ति को नियुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इस अत्यंत महत्वपूर्ण भर्ती आयोग पर राज्य से बाहर के व्यक्ति की नियुक्ति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
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अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना जनता की लड़ाई बन गया है
सिरसा की सांसद व उत्तराखंड की प्रभारी, कांग्रेस की महासचिव कुमारी सैलजा ने कहा कि उत्तराखंड की सड़को पर उतरी जनता यह साफ संदेश दे रही है कि बेटी अंकिता भंडारी के साथ हुआ अन्याय अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देश के सामने साक्ष्य आने के बावजूद भाजपा सरकार की चुप्पी और ढुलमुल रवैया यह दर्शाता है कि सत्ता के संरक्षण में दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य सरकार की भूमिका न्याय दिलाने की नहीं, बल्कि मामले को दबाने की प्रतीत हो रही है। न तो ठोस कार्रवाई हुई और न ही किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई। यह रवैया न केवल उत्तराखंड की जनता, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था का भी अपमान है। अब आधे-अधूरे कदम स्वीकार्य नहीं हैं। अंकिता भंडारी को सच्चा न्याय तभी मिल सकता है जब इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सीबीआई से कराई जाए। कुमारी सैलजा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मांग को लेकर उत्तराखंड की जनता के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और न्याय मिलने तक आवाज़ बुलंद करती रहेगी।

