जीएसटी सुधार और व्यापारियों के हितों को लेकर हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल की बैठक आयोजित
Nov 17, 2025, 14:35 IST

सिरसा, 17 नवंबर। जीएसटी प्रणाली में सुधार और व्यापारियों की समस्याओं पर चर्चा के लिए हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक सिरसा क्लब में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मंडल के प्रदेश अध्यक्ष अनिल भाटिया ने की। इस दौरान व्यापारियों पर बढ़ते कर भार और जीएसटी अनुपालन की जटिलताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। संगठन की ओर से नेशनल ट्रेडर्स वेलफेयर बोर्ड (भारत सरकार) के अध्यक्ष सुनील सिंघी को मांग पत्र सौंपा गया। बैठक को संबोधित करते हुए अनिल भाटिया ने कहा कि ठीक उसी प्रकार जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने आई थी और अंतत: भारत को गुलाम बना लिया था, आज विदेशी ऑनलाइन ट्रेडिंग कंपनियाँ भी देश में अपना वर्चस्व बढ़ा रही हैं। इससे भारतीय व्यापारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और युवा वर्ग को भी रोजगार के नाम पर कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद भी वैट का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सरकार ने कुछ जीएसटी दरें कम अवश्य की हैं, जिसके लिए व्यापारी वर्ग सरकार का आभार व्यक्त करता है। लेकिन जीएसटी कंप्लायंस की जटिलता में अभी तक कोई अहम सुधार नहीं हुआ है। ईमानदार व्यापारियों को अकाउंटेंट और कंसल्टेंट को भारी शुल्क देना पड़ता है, साथ ही उन्हें ग्रॉस प्रॉफिट पर जीएसटी और नेट प्रॉफिट पर आयकर देना होता है, जो दोहरी कराधान है और व्यापारी वर्ग के साथ अन्याय है। हरियाणा उद्योग व्यापार हित मंडल ने सरकार को दिए सुझाव में कहा है कि जीएसटी को उत्पादन स्तर पर ही एक बार लगाया जाए और वैल्यू एडिशन टैक्स को समाप्त किया जाए। इससे टैक्स चोरी रुकेगी, व्यापारियों को राहत मिलेगी और प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकार उत्पादन स्तर पर ध्यान केंद्रित करे तो व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है। बैठक में ललित मोहन सैनी, जोगेंद्र सैनी (प्रदेश महासचिव), अनिल बजाज (प्रदेश सचिव), मोहनलाल (प्रदेश कोषाध्यक्ष), संजय चुघ (प्रदेश सचिव), गुलशन उप्पल (प्रदेश उपाध्यक्ष), आर.के. गौर (नेशनल जनरल सेक्रेटरी), राजेंद्र गोयनका (पूर्व वाइस प्रेसिडेंट), राजेश्वर टेंडर्स और कृष्ण (फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया के हैदराबाद वाइस अध्यक्ष) प्रमुख रूप से मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने इस बात पर चिंता जताई कि विदेशी ऑनलाइन कंपनियाँ भारतीय खुदरा व्यापार को कमजोर कर रही हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मेक इन इंडिया को मार्केट बाय इंडियन में परिवर्तित किया जाए, जिससे देश का व्यापार, दुकानदार और अर्थव्यवस्था सुरक्षित रहें।

