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विद्यालयों में खिलेंगे ग्राम स्वराज के पुष्प

 
 विद्यालयों में खिलेंगे ग्राम स्वराज के पुष्प
 - डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान -

अपने भारत की पहचान गाँवों से है। गाँव केवल खेत-खलिहानों और घरों का समूह नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और स्वाभिमान का आधार हैं। गाँधीजी ने कहा था-भारत की आत्मा गाँवों में बसती है।
इसी आत्मा को जगाने और झंकृत करते हुए नई पीढ़ी को उससे जोड़ने का एक नया प्रयोग शुरू हो रहा है, जिसका नाम केंद्र के पंचायती राज मंत्रालय ने ' मॉडल युवा ग्राम सभा' रखा है।

पहली बार हो रहा है यह प्रयोग

भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने इसे एक विशेष परियोजना के रूप में तैयार किया है। इस वर्ष अक्टूबर से पूरे देश के जवाहर नवोदय विद्यालयों और एकलव्य विद्यालयों में इसकी शुरुआत होगी। महाराष्ट्र और कर्नाटक के राज्य बोर्ड के विद्यालय भी इसमें जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं। योजना है कि अगले वर्ष इसे पीएम श्री विद्यालयों तक ले जाया जाए और अंततः यह एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले।

युवा संसद और मॉडल यूएन से अलग

अब तक हमारे विद्यार्थियों ने युवा संसद और मॉडल यूएन में भाग लिया। ये कार्यक्रम बोलने, बहस करने और तर्क रखने की कला तो सिखाते हैं, पर वे कहीं न कहीं कक्षा और मंच तक सीमित रह जाते हैं।
युवा ग्राम सभा उससे कहीं आगे है। विद्यार्थी सरपंच से ले कर ग्राम सचिव और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तक की भूमिका को केवल अभिनीत नहीं करेंगे बल्कि बारीकी से समझने के बाद लगभग असल ग्राम सभा की तरह हर कार्य करेंगे। यह पूरी तरह व्यावहारिक है। यहाँ विद्यार्थी गाँव की वास्तविक समस्याओं पर विचार करेंगे। सफाई, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, नशा मुक्ति, शिक्षा की गुणवत्ता पर मंथन होगा। और सबसे महत्त्वपूर्ण, इन विषयों को पंचायत और प्रशासन तक पहुँचाकर धरातल पर कार्यवाही कराई जाएगी।

युवाओं की आवाज़, गाँव का एजेंडा

अब गाँव का भविष्य केवल बड़े-बुज़ुर्ग तय नहीं करेंगे। और ग्राम्य जीवन में बदलाव में अपनी सीधी भूमिका के लिए स्कूली छात्रों को वयस्क होने का इंतजार नहीं करना होगा। विद्यार्थियों की आवाज़ युवा ग्राम सभा के माध्यम से उस भविष्य का हिस्सा बनेगी। जी हाँ ,अब विद्यार्थी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए अठारह बरस का होने का इंतजार नहीं करेंगे।

प्रतिस्पर्धा और पुरस्कार

भारत सरकार ने इसे और प्रेरक बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा का रूप भी दिया है। हर विद्यालय की युवा ग्राम सभा का मूल्यांकन होगा।देश भर की सर्वश्रेष्ठ सभाओं और विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार दिए जाएँगे। यह स्वस्थ स्पर्धा विद्यार्थियों को और भी जोश और ज़िम्मेदारी से जोड़ेगी।

शिक्षकों और विद्यार्थियों की भूमिका

इस अभिनव कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए देश भर में शिक्षकों का प्रशिक्षण हो रहा है। पहले चरण में गुरुजन ग्राम सभा संचालन की बारीकियाँ सीख रहे हैं।
फिर वे अपने विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेंगे। इन्हें ही फिर अपने अपने स्कूलों को ग्राम- स्वराज का संस्कार केंद्र बनाना है।


स्वदेशी सोच और भविष्य

यह प्रयोग हमें अपनी जड़ों की ओर ले चलेगा। यह याद दिलाएगा कि भारत का बल गाँवों में है और गाँव का बल उसकी युवा पीढ़ी में।आज के विद्यार्थी जब ग्राम सभा में बोलना और निर्णय लेना सीखेंगे,तो कल वही आगे चलकर गाँव, समाज और राष्ट्र के नेतृत्व की धुरी बनेंगे।
यह पहल आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मज़बूत करेगी। मॉडल युवा ग्राम सभा केवल एक शैक्षिक गतिविधि नहीं है। यह लोकतंत्र की नई पाठशाला बने यह अपेक्षा है। यह ग्राम स्वराज का संस्कार देने में कितनी सफल होगी यह तो समय बताएगा मगर सरकार की यह पहल अभिनंदनीय है।