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हर अधिकारी एक ‘अमृत सरोवर’ गोद ले : डॉ. चौहान

 
 हर अधिकारी एक ‘अमृत सरोवर’ गोद ले : डॉ. चौहान
 नीलोखेड़ी :15 फरवरी  राज्य की हर जिले में विकसित अमृत सरोवर सतत संभाल के अभाव में फिर से मृत मृत प्राय जोहड़ बन सकते हैं। ऐसा होने से रोकना है तो जल संरक्षण के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न परियोजनाओं के अधिकारियों को एक एक अमृत सरोवर को अपनाना होगा। स्वयं प्रेरणा से एक एक सरोवर के पालक और संरक्षक की भूमिका अदा करते हुए ग्रामीण समुदाय को जल स्रोतों के संरक्षण के आंदोलन से जोड़ने के कार्य करना समय की आवश्यकता है। यह कहना है हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान का। वे संस्थान में पांच दिन चले एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों से संवाद कर रहे थे। 

डॉ चौहान ने कहा कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि व्यवहारिक क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्थान में जलागम विकास घटक – प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत “प्रबंधन सूचना प्रणाली के प्रभावी उपयोग” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंत में हिसार मंडल के विभिन्न जिलों से आए हुए प्रतिभागियों से डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने अमृत सरोवरों को संभालने में पूर्ण मनोयोग से मदद करने का आवाहन किया।डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने सभी प्रतिभागियों को संकल्प दिलवाया कि वे अपने जिले में कम से कम एक “अमृत सरोवर” गोद लेकर उसके संरक्षण, सौंदर्यीकरण एवं जल संचयन क्षमता बढ़ाने की दिशा में ठोस कार्य करेंगे। 

कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर कमलदीप सांगवान रहे। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान हैदराबाद से के. राजेश्वर विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रोफेसर कमलदीप सांगवान एवं के. राजेश्वर ने मुख्य अतिथि डॉ. चौहान का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

डॉ. चौहान ने कहा कि जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के अंतर्गत जलागम विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु प्रबंधन सूचना प्रणाली का सही, पारदर्शी एवं उत्तरदायी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।
उन्होंने प्रतिभागियों से अपेक्षा जताई कि वे प्रशिक्षण में अर्जित ज्ञान और कौशल को अपने-अपने जिलों में लागू कर ग्रामीण विकास को नई दिशा देंगे तथा जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देंगे।

उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक अधिकारी एक जलस्रोत को मॉडल के रूप में विकसित करे, तो जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से सलाहकार गुरबिंदर सिंह सहित विभिन्न जिलों से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सक्रिय भागीदारी की।