हरियाणा कांग्रेस में नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बावजूद गुटबाजी का ख़तरा बना रहेगा
कुछ जगहों पर वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी से कार्यकर्ताओं की नाराजग़ी पड़ सकती है भारी
Aug 13, 2025, 13:41 IST

सिरसा, 13 अगस्त। हरियाणा में आखिरकार 11 साल बाद कांगे्रस हाईकमान ने 32 जिला अध्यक्षों की सूची जारी कर दी है। हाईकमान ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की राय और वरिष्ठ नेताओं की सिफारिश को ध्यान में रखते हुए नामों का ऐलान किया है। जिसमें हुड्डा गुट से 15, कुमारी सैलजा गुट से 12, सुरजेवाला गुट से एक, दो तटस्थ, दो राहुल गांधी के कोटे नियुक्त किए गए है, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात करने वाली कांगे्रस ने जिला अध्यक्षों की सूची में एक ही महिला को स्थान दिया है। कांगे्रस ने जातीय समीकरणों को साधने का प्रयास तो किया है पर कुछ जातियों के साथ नाइंसाफी भी क ी गई है। इस सूची से साफ लग रहा है कि हाईकमान गुट बाजी खत्म करने की दिशा में कोई खास कदम उठा सका। अब भी पार्टी में गुटबाजी का ख़तरा बना हेगा। चुनावी टिकट बंटवारे के समय गुटबाज़ी फिर से उभर सकती है। कांगे्रस जनता के मुद्दों को लगातार उठाकर पार्टी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पा सकती है। यह सब तभी संभव होगा जब संगठन में एकता, अनुशासन और ज़मीनी सक्रियता बनी रहे। आखिर काफ ी लंबे इंतजार के बाद कांगे्रस हाईकमान ने हरियाणा कांगे्रस के जिला अध्यक्षों के नाम की घोषण कर ही दी। लेकिन इसमें कोई चौकाने वाली बात सामने नहीं आई है। हरियाणा कांगे्रस की सबसे बड़ी समस्या गुटबाजी है जो इस सूची के बाद भी खत्म होती नहीं दिख रही है। हार्ईकमान ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों की राय को पहले स्थान पर रखा, दूसरे स्थान पर वरिष्ठ नेताओं की सिफारिश को रखा और उसके बाद ही नाम फ ाइनल किए गए। कांगे्रस की ओर से 32 जिला अध्यक्षों के नाम की घोषणा की गई है कई जिलों में शहरी और ग्रामीण अध्यक्ष चुने गए है। हाईकमान ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट के 15, कुमारी सैलजा गुट के 12, तटस्थ दो, एक रणदीप सुरजेवाला गुट से और दो राहुल गांधी के करीबियों को चुना गया है। इन्हीं में एक एक चौ. बिजेंद्र सिंह का समर्थक भी है। कांगे्रस सदैव जातीय जनगणना की बात करती है ऐसे में उसने जातीय समीकरण साधते हुए भी नामों को सूची में शामिल किया। ओबीसी के 10, पंजाबी वर्ग से दो, राजपूत दो, सिख एक, जाट छह, एससी पांच, मुसलिम एक और पांच ब्राहमणों औेर एक वैश्य को शामिल किया गया है। हाईकमान ने हरियाणा की सभी बैल्ट में कांगे्रस के जनाधार को ध्यान में रखते हुए प्रतिनिधित्व दिया गया है। जीटी बैल्ट के छह जिलों में से 05 प्रधान हुड्डा और 05 सैलजा गुट से है। बांगर बैल्ट के पंाच जिलों से चार प्रधान सैलजा गुट के और तीन हुड्डा गुट के, अहीरवाल बैल्ट में छह में से तीन हुड्डा गुट के, देशवाली बैल्ट में सभी प्रधान हुड्डा गुट से चुने गए है।
कांग्रेस हाईकमान ने इस बार यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह गुटबाजी को कम करके सभी बड़े नेताओं को साथ लेकर चलना चाहती है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने उनके जनाधार और संगठनात्मक ताकत को स्वीकार किया। कुमारी सैलजा गुट को 11 जिलों की कमान देकर उनका सम्मान बरकरार रखा गया, जिससे दलित और महिला वोटबैंक में संदेश जाएगा क्योंकि विधानसभा चुनाव में कुमारी सैलजा की अनदेखी कांगे्रस को इतनी भारी पड़ी कि सत्ता आते आते उसके हाथ से फिसल गई थी। अन्य वरिष्ठ नेता जैसे रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय यादव के समर्थकों को भी जगह मिली, ताकि कोई गुट उपेक्षित महसूस न करे।
नई सूची में स्थानीय नेतृत्व को अवसर प्रदान किया
इस सूची के जारी होने से लंबे समय बाद संगठनात्मक संरचना पूरी हुई है। 11 वर्षों से जिला स्तर पर संगठन में खालीपन था, जिसे भरने से अब पार्टी के पास ज़मीनी स्तर पर सक्रिय नेतृत्व होगा। गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। सभी बड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर आपसी टकराव को कम करने की कोशिश की गई है पर टिकटों के बंटवारे के समय गुटबाजी फि र चरम पर पहुंच सकती है। हाईकमान ने स्थानीय नेतृत्व को अवसर प्रदान किया है। उसे लगता है कि नए अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ बढ़ाने के लिए सक्रिय होंगे। हाईकमान ने अगले विधानसभा और लोकसभा की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए यह सूची जारी की है, उसे लगता है कि यह संगठनात्मक मजबूती चुनाव में अहम होगी। जिला अध्यक्षों के पाँं क्षेत्रीय मुद्दों को सीधे प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का अवसर होगा।
कई चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा कांगे्रस को
हाईकमान मानता है कि इस सूची में शामिल किए नामों से गुटबाजी कम होगी पर गुटबाजी का ख़तरा बना ही रहेगा। भले ही संतुलन साधा गया हो, लेकिन चुनावी टिकट बंटवारे के समय गुटबाज़ी फिर से उभर सकती है। कुछ जिलों में अनुभवहीन नेतृत्व प्रदान किया गया है। कई नए चेहरे संगठनात्मक कामकाज में पूरी तरह पारंगत नहीं हैं, जिससे शुरुआती दौर में गति धीमी रह सकती है। इसके साथ ही पार्टी को स्थानीय असंतोष का सामना भी करना पडेगा। कुछ जगहों पर वरिष्ठ नेताओं या पुराने कार्यकर्ताओं को नजऱअंदाज़ करने से नाराजग़ी हो सकती है। अधिकतर जिलों में जिनके नाम जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रभावशाली माने जा रहे थे उनका पत्ता ही साफ कर दिया गया। उनकी नाराजगी का देर सवेर सामना करना ही पडेगा क्योंकि वरिष्ठ कार्यकर्ता या नेता पार्टी से सम्मान की अपेक्षा रखता है अगर वह न मिले तो उसके मन में कसक रहती ही है। इस सूची में कुछ समुदायों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। इसका आभाष पार्टी को आगे चुनाव में जाकर ही पता चलेगा।
कांगे्रस का जमीनी पकड़ में सुधार का एक प्रयास सूची
हाईकमान ने ये सूची जारी करते हुए शायद यही सोचा होगा कि अब उसकी जमीनी पकड़ में सुधार होगा। नए अध्यक्ष घर-घर पहुंचकर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करेंगे। अब कार्यकर्ताओं सक्रियता बढ़ेगी और ऐसे में जनता के मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। विपक्ष की प्रभावी भूमिका भी कांगे्रस अच्छे ढंग से निभा सकती है। हर जिले में सक्रिय अध्यक्ष होने से भाजपा और अन्य दलों की नीतियों पर तीखा विरोध किया जा सकेगा। समय रहते संगठन को सक्रिय करने से अगले चुनावों में बेहतर तालमेल और समन्वय होगा।
कांगे्रस की विपक्ष की भूमिका निभाने की क्षमता बढेगी
नई टीम बनने के बाद कांग्रेस के पास प्रदेश के हर जिले में एक फोकल प्वाइंट होगा, जिससे विपक्ष की आवाज़ और मजबूत होगी। वे स्थानीय मुद्दों पर तुरंत आंदोलन और विरोध प्रदर्शन आयोजित कर पाएंगे। सोशल मीडिया और जमीनी प्रचार में सामंजस्य बैठाकर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जा सकेगा। विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों के लिए जिलों से प्रत्यक्ष फीडबैक मिलेगा। अगर कांग्रेस इस संगठनात्मक बदलाव का सही इस्तेमाल करती है, तो वह 2029 के लोकसभा चुनाव में मजबूती से उतर सकती है। 2030 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने कड़ी टक्कर दे सकती है। जनता के मुद्दों को लगातार उठाकर पार्टी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पा सकती है। हालांकि, यह सब तभी संभव होगा जब संगठन में एकता, अनुशासन और ज़मीनी सक्रियता बनी रहे।
फोटो कांगे्रस का हाथ
कांग्रेस जिला अध्यक्षों की सूची
कांग्रेस पार्टी ने जो सूची जारी की है उसमें अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी सुशील धनक, फरीदाबाद बलजीत कौशिक, फतेहाबाद अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी पंकज दावर, हिसार ग्रामीण लाल बहादुर खोवाल, हिसार शहरी बजरंग दास गर्ग, झज्जर संजय यादव, जींद ऋषि पाल, कैथल रामचंदर गुज्जर को जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार करनाल ग्रामीण राजेश वैद, करनाल शहरी पराग गाबा, कुरुक्षेत्र मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ सत्यवीर यादव,. मेवात (नूंह) शाहिद खान, पलवल नेत्रपाल अढाना, पंचकूला संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण सुभाष चंद चौहरी, रेवाड़ी शहरी प्रवीन चौधरी, रोहतक ग्रामीण बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी कुलदीप सिंह, सिरसा संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी कमल देवेन, यमुनानगर ग्रामीण नरपाल सिंह व यमुनानगर शहरी देवेंद्र सिंह को बनाया गया है।
कांग्रेस हाईकमान ने इस बार यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह गुटबाजी को कम करके सभी बड़े नेताओं को साथ लेकर चलना चाहती है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा गुट को सबसे अधिक प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने उनके जनाधार और संगठनात्मक ताकत को स्वीकार किया। कुमारी सैलजा गुट को 11 जिलों की कमान देकर उनका सम्मान बरकरार रखा गया, जिससे दलित और महिला वोटबैंक में संदेश जाएगा क्योंकि विधानसभा चुनाव में कुमारी सैलजा की अनदेखी कांगे्रस को इतनी भारी पड़ी कि सत्ता आते आते उसके हाथ से फिसल गई थी। अन्य वरिष्ठ नेता जैसे रणदीप सिंह सुरजेवाला और अजय यादव के समर्थकों को भी जगह मिली, ताकि कोई गुट उपेक्षित महसूस न करे।
नई सूची में स्थानीय नेतृत्व को अवसर प्रदान किया
इस सूची के जारी होने से लंबे समय बाद संगठनात्मक संरचना पूरी हुई है। 11 वर्षों से जिला स्तर पर संगठन में खालीपन था, जिसे भरने से अब पार्टी के पास ज़मीनी स्तर पर सक्रिय नेतृत्व होगा। गुटों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। सभी बड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व देकर आपसी टकराव को कम करने की कोशिश की गई है पर टिकटों के बंटवारे के समय गुटबाजी फि र चरम पर पहुंच सकती है। हाईकमान ने स्थानीय नेतृत्व को अवसर प्रदान किया है। उसे लगता है कि नए अध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ बढ़ाने के लिए सक्रिय होंगे। हाईकमान ने अगले विधानसभा और लोकसभा की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए यह सूची जारी की है, उसे लगता है कि यह संगठनात्मक मजबूती चुनाव में अहम होगी। जिला अध्यक्षों के पाँं क्षेत्रीय मुद्दों को सीधे प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने का अवसर होगा।
कई चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा कांगे्रस को
हाईकमान मानता है कि इस सूची में शामिल किए नामों से गुटबाजी कम होगी पर गुटबाजी का ख़तरा बना ही रहेगा। भले ही संतुलन साधा गया हो, लेकिन चुनावी टिकट बंटवारे के समय गुटबाज़ी फिर से उभर सकती है। कुछ जिलों में अनुभवहीन नेतृत्व प्रदान किया गया है। कई नए चेहरे संगठनात्मक कामकाज में पूरी तरह पारंगत नहीं हैं, जिससे शुरुआती दौर में गति धीमी रह सकती है। इसके साथ ही पार्टी को स्थानीय असंतोष का सामना भी करना पडेगा। कुछ जगहों पर वरिष्ठ नेताओं या पुराने कार्यकर्ताओं को नजऱअंदाज़ करने से नाराजग़ी हो सकती है। अधिकतर जिलों में जिनके नाम जिलाध्यक्ष पद के लिए प्रभावशाली माने जा रहे थे उनका पत्ता ही साफ कर दिया गया। उनकी नाराजगी का देर सवेर सामना करना ही पडेगा क्योंकि वरिष्ठ कार्यकर्ता या नेता पार्टी से सम्मान की अपेक्षा रखता है अगर वह न मिले तो उसके मन में कसक रहती ही है। इस सूची में कुछ समुदायों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। इसका आभाष पार्टी को आगे चुनाव में जाकर ही पता चलेगा।
कांगे्रस का जमीनी पकड़ में सुधार का एक प्रयास सूची
हाईकमान ने ये सूची जारी करते हुए शायद यही सोचा होगा कि अब उसकी जमीनी पकड़ में सुधार होगा। नए अध्यक्ष घर-घर पहुंचकर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करेंगे। अब कार्यकर्ताओं सक्रियता बढ़ेगी और ऐसे में जनता के मुद्दों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। विपक्ष की प्रभावी भूमिका भी कांगे्रस अच्छे ढंग से निभा सकती है। हर जिले में सक्रिय अध्यक्ष होने से भाजपा और अन्य दलों की नीतियों पर तीखा विरोध किया जा सकेगा। समय रहते संगठन को सक्रिय करने से अगले चुनावों में बेहतर तालमेल और समन्वय होगा।
कांगे्रस की विपक्ष की भूमिका निभाने की क्षमता बढेगी
नई टीम बनने के बाद कांग्रेस के पास प्रदेश के हर जिले में एक फोकल प्वाइंट होगा, जिससे विपक्ष की आवाज़ और मजबूत होगी। वे स्थानीय मुद्दों पर तुरंत आंदोलन और विरोध प्रदर्शन आयोजित कर पाएंगे। सोशल मीडिया और जमीनी प्रचार में सामंजस्य बैठाकर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाया जा सकेगा। विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों के लिए जिलों से प्रत्यक्ष फीडबैक मिलेगा। अगर कांग्रेस इस संगठनात्मक बदलाव का सही इस्तेमाल करती है, तो वह 2029 के लोकसभा चुनाव में मजबूती से उतर सकती है। 2030 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने कड़ी टक्कर दे सकती है। जनता के मुद्दों को लगातार उठाकर पार्टी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पा सकती है। हालांकि, यह सब तभी संभव होगा जब संगठन में एकता, अनुशासन और ज़मीनी सक्रियता बनी रहे।
फोटो कांगे्रस का हाथ
कांग्रेस जिला अध्यक्षों की सूची
कांग्रेस पार्टी ने जो सूची जारी की है उसमें अंबाला कैंट से परविंदर परी, अंबाला सिटी से पवन अग्रवाल, अंबाला ग्रामीण दुष्यंत चौहान, भिवानी ग्रामीण अनिरुद्ध चौधरी, भिवानी शहरी प्रदीप गुलिया, चरखी दादरी सुशील धनक, फरीदाबाद बलजीत कौशिक, फतेहाबाद अरविंद शर्मा, गुरुग्राम ग्रामीण वर्धन यादव, गुरुग्राम शहरी पंकज दावर, हिसार ग्रामीण लाल बहादुर खोवाल, हिसार शहरी बजरंग दास गर्ग, झज्जर संजय यादव, जींद ऋषि पाल, कैथल रामचंदर गुज्जर को जिम्मेदारी दी गई है। इसी प्रकार करनाल ग्रामीण राजेश वैद, करनाल शहरी पराग गाबा, कुरुक्षेत्र मेवा सिंह, महेंद्रगढ़ सत्यवीर यादव,. मेवात (नूंह) शाहिद खान, पलवल नेत्रपाल अढाना, पंचकूला संजय चौहान, पानीपत ग्रामीण रमेश मलिक, रेवाड़ी ग्रामीण सुभाष चंद चौहरी, रेवाड़ी शहरी प्रवीन चौधरी, रोहतक ग्रामीण बलवान सिंह रंगा, रोहतक शहरी कुलदीप सिंह, सिरसा संतोष बेनिवाल, सोनीपत ग्रामीण संजीव कुमार दहिया, सोनीपत शहरी कमल देवेन, यमुनानगर ग्रामीण नरपाल सिंह व यमुनानगर शहरी देवेंद्र सिंह को बनाया गया है।

