जीवन नगर में भव्य होला मोहल्ला कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, संत समाज का लिया आशीर्वाद

सिरसा की पावन धरती संतों और महापुरुषों की तपोभूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिरसा की पावन भूमि संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है। वर्ष 1507 में प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के चरण इसी धरती पर पड़े थे। उनकी शिक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए यहां गुरुद्वारा श्री चिल्ला साहिब की स्थापना की गई।
उन्होंने कहा कि बाबा सरसाईं नाथ, बाबा भूमण शाह जैसे अनेक संतों ने इसी भूमि से समाज को आध्यात्मिकता, सेवा और मानवता का संदेश दिया। इन संतों की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा प्रदान कर रही हैं।
होला मोहल्ला साहस, भक्ति और सामाजिक समरसता का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि होला मोहल्ला केवल एक उत्सव नहीं बल्कि हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति, वीरता और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह पर्व हमें जीवन में साहस और भक्ति दोनों के संतुलन की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि यह उत्सव केवल रंगों का त्योहार नहीं है बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने के संकल्प और पुरुषार्थ का प्रतीक भी है। दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने होली के उत्साह के साथ खालसा परंपराओं को मजबूत करने और समाज में भाईचारे व एकता की भावना को बढ़ावा देने के लिए होला मोहल्ला मनाने की परंपरा शुरू की थी।
नामधारी समाज का इतिहास त्याग और बलिदान की प्रेरणादायक गाथा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नामधारी समाज का इतिहास त्याग, तपस्या और बलिदान से भरा हुआ है। सतगुरु राम सिंह जी महाराज द्वारा शुरू किया गया कूका आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने कहा कि जब देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था, तब नामधारी समाज ने स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का जो संदेश दिया, उसने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा देने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने उन वीर नामधारी शहीदों को भी नमन किया जिन्होंने मलेरकोटला में तोपों के सामने खड़े होकर हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी, लेकिन सत्य और स्वाभिमान का मार्ग नहीं छोड़ा।
देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के होला मोहल्ला कार्यक्रम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक भौतिकवादी दौर में भी लोगों की आस्था अपनी आध्यात्मिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाएं समाज को सकारात्मक दिशा देती हैं और लोगों को सेवा, सद्भाव और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
'सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर आगे बढ़ रही सरकार
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र के साथ कार्य कर रही है। यह विचारधारा नामधारी पंथ के ‘सरबत दा भला’ और मानव सेवा के सिद्धांतों से मेल खाती है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार महापुरुषों की शिक्षाओं को समाज तक पहुंचाने के लिए उनकी जयंती राज्य स्तर पर मनाती है और इसके लिए ‘संत-महापुरुष सम्मान विचार प्रचार एवं प्रसार योजना’ चलाई जा रही है।
नशामुक्ति, समाज सुधार और कृषि क्षेत्र में नामधारी समाज का योगदान सराहनीय
मुख्यमंत्री ने कहा कि नामधारी समाज ने आध्यात्मिक क्षेत्र के साथ-साथ समाज सुधार, गौ-सेवा, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय कार्य किए हैं। युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखकर उन्हें खेलों और संगीत से जोड़ना समाज के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।
उन्होंने कहा कि नामधारी पंथ ने खेती-किसानी और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे हरियाणा आज देश में अन्न और दूध उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है।
सरकार समाज के हर धार्मिक और सामाजिक प्रयास में साथ
मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि हरियाणा सरकार समाज के हर धार्मिक और सामाजिक प्रयास में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। चाहे बुनियादी ढांचे का विकास हो या जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना, सरकार पूरी पारदर्शिता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने संतों से आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि हम सभी मिलकर एक ऐसे विकसित हरियाणा और विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करें, जहां हर व्यक्ति खुशहाल, सुरक्षित और आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित जीवन जी सके।
इस अवसर पर सांसद श्री रामचन्द्र जांगड़ा, पूर्व सांसद श्रीमति सुनीता दुग्गल, सरदार जसपाल सिंह, सरदार सुखदेव सिंह, पूर्व विधायक श्री रामचंद्र कंबोज, जिला अध्यक्ष श्री यतिंद्र सिंह, श्री जगदीश चोपड़ा, श्री देव कुमार शर्मा, श्री शीशपाल कंबोज, श्री अमीरचंद मेहता, श्रीमती निताशा सिहाग सहित संत समाज के प्रतिनिधि, नामधारी संगत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

