डॉ. अंबेडकर के सामाजिक न्याय के सपने को साकार करने के लिए जातिगत जनगणना अनिवार्य: एडवोकेट खोवाल

हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश में जातिगत जनगणना को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ कराना अब समय की मांग है। संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान के अनुच्छेद 340 के माध्यम से पिछड़ों और वंचितों के सशक्तिकरण का जो सपना देखा था वर्तमान सरकार डेटा छिपाकर उस पर चोट कर रही है। एडवोकेट खोवाल ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण के नाम पर देश को गुमराह किया जा रहा है क्योंकि जब तक इसमें दलितों और ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित नहीं होता तब तक यह बाबा साहेब के 'समानुपातिक प्रतिनिधित्व' के सिद्धांत के खिलाफ है।उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने हमेशा महिलाओं और पिछड़ों को सत्ता की मुख्यधारा में लाने की वकालत की थी लेकिन भाजपा इसे परिसीमन की आड़ में उलझाकर देरी कर रही है। यह अत्यंत चिंताजनक है कि सरकार जनगणना और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कदमों से बचती रही है, जिससे पिछड़े वर्गों का वास्तविक डेटा सामने ही नहीं आ पा रहा। बिना सही आंकड़ों के न तो न्याय संभव है और न ही समानता।
पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या और स्थिति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए।सरकार को यह समझना होगा कि संविधान केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि देश के करोड़ों वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की गारंटी है। यदि इन अधिकारों की अनदेखी की जाती है, तो यह सीधे-सीधे संविधान की अवमानना है।हम सरकार से मांग करते हैं कि वह राजनीतिक लाभ के बजाय संवैधानिक दायित्वों का पालन करे और अनुच्छेद 340 की भावना के अनुरूप ठोस कदम उठाए, ताकि देश में वास्तविक सामाजिक न्याय स्थापित हो सके।नेता विपक्ष राहुल गांधी और हरियाणा में कुमारी सैलजा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी यह मांग करती है कि जातिगत जनगणना तुरंत कराकर दलितों और ओबीसी वर्ग को उनकी वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में संवैधानिक हक दिया जाए और महिला आरक्षण में ओबीसी कोटे को तुरंत शामिल किया जाए।

