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सिरसा जिला में दसवीं पास बने सबसे ज्यादा सरपंच

बारह  सरपंच हैं गे्रजूएट और पोस्टग्रेजूएट, कालेज में अध्ययनरत एक छात्र और एक छात्रा भी चुने गए है सरपंच
 
सिरसा जिला में दसवीं पास बने सबसे ज्यादा सरपंच
एमएससी, एमसीए, एमकॉम, एमबीए और बीई डिग्रीधारक चुने गए सरपंच,ओढा़ खंड के मतदाताओं ने उच्च  शिक्षित सरपंचों  चुनकर दिया पूरा मान सम्मान

सिरसा, 17 नवंबर। सिरसा की सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच निर्वाचित हो चुके है, जिनका शपथ ग्रहण 27 नवंबर के बाद ही होगा।  सिरसा के 339 सरपंचों में से 173 पुरूष, 169 महिलाएं हैं। इनमें से 121 अनुसूचित जाति से, 61 बीसी और ओबीसी से और 157 सामान्य और अन्य जातियों से हैं। सिरसा में किसी भी ट्रांसजेंडर ने चुनाव नहीं लड़ा। शैक्षिक योग्यता की दृष्टि से 53 आठवीं पास,  146 दसवीं पास, 89 बारहवीं पास और 12 गे्रजूएट और पोस्ट ग्रेजूएट है। इसमें से पांच सरपंच एमएससी, एमसीए, एमबीए, बीई और बीएड हैं। दो सरपंच ऐसे है जो अभी कालेज में अध्ययनरत है इनमें एक छात्र और एक छात्रा हैं। चुने गए सरपंचों की औसत आयु 37 वर्ष है यानि मतदाताओं ने इस बार युवाओं पर भरोसा जताया है। इस चुनाव में एक बात सामने आई है कि जिस गांव में जो राजनीतिक दल काफी प्रभावी रहा है वहां उसक े विरोधी ने जीत हासिल की है। बड़े गांवों में तो चुनाव परिणाम उम्मीद से उलट आया है। ओढा़ खंड के मतदाताओं ने सबसे अधिक शिक्षित उम्मीदवारों को पूरा मान सम्मान दिया है। इस क्षेत्र से चुने गए चार सरपंच एमएससी, एमबीए, एमसीए और बीएबीड हैं। सिरसा खंड के मतदातों ने दसवीं और बारहवीं पास सरपंचों पर भरोसा जताया है। सिरसा जिला में सरपंचों के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों के समर्थक चुनाव मैदान में थे, किसी ने भी चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं लड़ा बस पार्टी समर्थित कहा गया। भाजपा सत्ता में है पर उसे इस चुनाव में उतना लाभ नहीं मिला  जितना एक सत्ताधारी राजनीतिक दल को मिलता आया है।  इस चुनाव में एक बात सामने आई है कि जिस गांव में जो राजनीतिक दल काफी प्रभावी रहा है वहां उसक े विरोधी ने जीत हासिल की है। बड़े गांवों में तो चुनाव परिणाम उम्मीद से उलट आया है।

SIRSA MAP
SIRSA MAP

गांव चौटाला सबसे बड़े गांव में शुमार है और राजनीतिक दृष्टि से  प्रदेश का सबसे बड़ा गांव है। पूर्व मुख्यमंत्री चौ.ओमप्रकाश चौटाला, विधायक, अभय सिंह चौटाला, डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, जेजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. अजय सिंह चौटाला, उनकी धर्मपत्नी विधायक नैना चौटाला, प्रदेश के बिजली मंत्री चौ.रणजीत सिंह और विधायक अमित सिहाग चौटाला से ही संबधित है। चौटाला गांव इनेलो का गढ़ रहा है पर यहां पर इस बार इनेलो को हार का सामना करना पड़ा। यहां से सुभाषचंद विजयी हुए। चौटाला के बाद आबादी के हिसाब से गांव जमाल का नंबर आता है जहां पर जेजेपी के नंदलाल का  दबदबा रहा पर इस बार जेजपी के धुरविरोधी ने चुनाव जीतकर नई राजनीतिक गाथा लिखी कि  मतदाता कुछ भी कर सकता है।  चुने गए सरपंचों की शैक्षणिक योग्यता को देखा जाए तो दसवीं पास ने ज्यादा जीत हासिल की है। शैक्षिक योग्यता की दृष्टि से 53 आठवीं पास,  146 दसवीं पास, 89 बारहवीं पास और 12 गे्रजूएट और पोस्ट ग्रेजूएट है। इसमें से पांच सरपंच एमएससी, एमसीए, एमबीए, बीई और बीएड हैं। दो सरपंच ऐसे है जो अभी कालेज में अध्ययनरत है इनमें एक छात्र और एक छात्रा हैं। चुने गए सरपंचों की औसत आयु 37 वर्ष है यानि मतदाताओं ने इस बार युवाओं पर भरोसा जताया है। बडागुढ़ा खंड के गांव भीवां से चुने गए सरपंच वरिंद्र सिंह, गांव कर्मगढ़ से चुनी गई भतेरी, गांव सुब्बाखेडा से गुरप्रीत कौर, गांव पंजुआना से प्रेरणा गे्रजूएट है जबकि फग्गू से चुने गए सरपंच रविंद्र पाल सिंह पोस्टगे्रजूएट है। डबवाली खंड के गांव गंगा से चुने गए सरपंच हरचरण सिंह, गांव मुन्नावाली से पूनम रानी,गेजूएट और गांव मटदादू से चुने गए सरपंच गगनदीप चीमा और गांव राजपुरा से चुने गए सरपंच चंद्र सिंह पोस्टगे्रजूएट हैं। ऐलनाबाद खंड के गांव भुर्टवाला से चुनी गई सरपंच सुमन, गांव बूढीमेडी से चुने गए सरपंच सुखबाज सिंह, गांव मल्लेकां से चुने गए सरपंच सुखदेव सिंह, गांव मिठी सुरेरां से चुने गए सरपंच सत्यनारायण गे्रजएट है जबकि इसी खंड के गांव कांसी का बास से चुनी गई सरपंच विनोद कुमार और गांव खारी सुरेरां से चुने गए सरपंच जसवंत सिंह पोस्ट ग्रेजूएट हैं। खंड नाथुसरी चोपटा के गांव बरासरी से चुने गए सरपंच अमर सिंह,गांव चाहरवाला से चुनी गई कविता, गांव गुडियाखेडा़ से चुनी गई मंजूबाला, गांव माखोसरानी से चुने गए सुभाषचंद्र,रायपुर से कविता रानी, गांव रंधावा से सुभाष सिंह, गांव तरंकावंाली से ओमप्रकाश, गे्रजूएट और इसी खंड के गांव जसानिया से चुने गए सरपंच राजेंद्र सिंह,  गांव जोगीवाला से चुनी गई शमिष्ठा, गांव शेरपुरा से चुनी गई सीमा पोस्टग्रेजूएट है। ओढां खंड के गांव धर्मपुरा से चुने गए सरपंच कुलदीप सिंह एमसीए (मास्टर आफ कंप्यूटर)है जबकि खतरांवा से चुने गए  अमनदीप एमबीए, मलिकपुरा से चुनी गई सरपंच अर्शदीप कौर एमएससी (मास्टर आफ साइंस)है, गांव सालमखेड़ा से चुनी गई अमनदीप कौर बीए बीएड है। गांव गदराना से चुनी गई सरपंच समरपाल कौर पोस्टग्रेजूएट हैं। रानियां खंड के गांव हरिपुरा से सरपंच चुने गए कर्मजीत सिंह बीई (बैचलर आफ इंजीनियरिंग), बीटैक (बैचलर आफ टैक्रोलॉजी) है। इसके साथ ही गांव ढूंढियांवाली की सरपंच अनीता,गांव गिदंडावाली की परमजीत कौर,गांव गोबिंदपुरा की किरणबाला, ग्रेजूएट है जबकि  गांव मौजदीन से चुनी गई सरपंच पवनदीप कौर पोस्टग्रेजूएट हैंसिरसा खंड के गांव मुसाहिबवाला से सरपंच चुनी गई गुंजन, गांव शहीदांवाली से सरपंच चुने गए सीताराम, गांव संगर सरिस्ता से सरपंच चुने गए अमनदीप गे्रजूएट है जबकि गांव बरूवाली प्रथम से सरपंच चुनी गई सीता कंबोज, गांव पनिहारी से सरपंच चुनी गई नीतूरानी पोस्टगे्रजूएट हैै। ओढा़ खंड के मतदाताओं ने सबसे अधिक शिक्षित उम्मीदवारों को पूरा मान सम्मान दिया है। इस क्षेत्र से चुने गए चार सरपंच एमएससी, एमबीए, एमसीए और बीएबीड हैं। सिरसा खंड के मतदातों ने दसवीं और बारहवीं पास सरपंचों पर भरोसा जताया है।
 

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