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किसानों का जीटी रोड जाम करने का ऐलान

अंबाला में 24 नवंबर को रोकेंगे नेशनल हाइवे, रेलवे ट्रैक बंद करने का प्रोग्राम टाला

 
 किसानों  का जीटी रोड जाम करने का ऐलान
चंडीगढ़/रोहतक, 17 नवंबर  हरियाणा के अंबाला में रेल चक्का जाम को लेकर किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने ब?ा ऐलान किया है। चढूनी ने कहा है कि किसानों की चेतावनी के बाद रेलवे ने दर्ज सभी केस वापस ले लिए हैं, इसलिए अब 24 नवंबर को रेल का चक्का जाम नहीं होगा। अब इस दिन मोहड़ा अनाज मंडी के पास जीटी रोड को जाम किया जाएगा। चढूनी ने कहा कि गृह मंत्री अनिल विज का किसानों के साथ मीटिंग को लेकर दिया गया बयान गुमराह करने वाला है।
हरियाणा सरकार कर रही वादाखिलाफी
किसान नेता चढूनी ने कहा कि हरियाणा सरकार ने अभी तक अपने वादे अनुसार सभी केस वापस नहीं किए हैं। कई केस ऐसे हैं जिनको वापस लेने की प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई, जैसे एफआईआर नंबर 206 व 77, जबकि आंदोलन के समझौते के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री ने किसानों के शिष्टमंडल से ये केस वापस लेने का वायदा किया था। करीब 32 से अधिक मुकदमे आंदोलन के पहले के ऐसे हैं जो आंदोलन समझौते के दौरान वादा करने के बावजूद वापस नहीं हुए हैं। किसान नेता ने बताया कि हरियाणा में दर्ज बहुत से मुकदमे अभी अदालतों में लंबित हैं, हालांकि हरियाणा सरकार ने ज्यादातर केसों में रद करने की सिफारिश कर दी है। उसके बावजूद बहुत संख्या में केस अदालतों में विचाराधीन हैं। जिस कारण से बहुत से लोगों के शस्त्र लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं और पासपोर्ट भी नहीं बनाए जा रहे हैं।
भाकियू का दावा, अभी रद्द नहीं हुए 35 केस
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) की ओर से दावा किया गया है कि सरकार अपने वादे पर खरी नहीं उतरी है। अभी तीनों कृषि आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमों में 35 केस अभी भी रद्द नहीं किए गए हैं। मजबूरी में फिर से भाकियू को किसानों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन का रुख अख्तियार करना पड़ रहा है।
सरकार ये कर रही दावा
किसानों नेताओं के दावों के विपरीत हरियाणा सरकार का कहना है कि आंदोलन के दर्ज हुए मुकदमे वापस ले लिए गए। अब तक 294 केस रद किए जा चुके हैं। कुछ प्रक्रिया में हैं। प्रशासन का दावा है कि 164 केस ऐसे हैं जिनकी सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। कोर्ट की ओर से 98 मामलों को रद्द करने के लिए मंजूरी दे दी है।
पूर्व राज्यपाल भी आंदोलन के पक्ष में
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक फिर से आंदोलन शुरू करने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस तो ले लिए, लेकिन अभी किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया गया। हरियाणा में राज्य और केंद्र सरकार जातिवाद फैलाने का काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि किसान आंदोलन दोबारा शुरू करते हैं तो वह उनका साथ देंगे।
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