Pal Pal India

जनभागीदारी से सिरसा का विकास-7

उपायुक्त के रूप में श्री वी. उमाशंकर का कार्यकाल जनभागीदारी का उत्कृष्ट कार्यकाल था
 
 जनभागीदारी से सिरसा का विकास-7

हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2006 के आरंभ में आईएएस अधिकारी श्री वी. उमाशंकर को सिरसा के उपायुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल सिरसा के विकास एवं शांति को बनाए रखने में जनभागीदारी का देश में उत्कृष्ट नमूना था। श्री वी. उमाशंकर ने सिरसा में लगभग तीन महीने के कार्यकाल उपरांत स्थानीय लोगों से बातचीत के माध्यम से जिला की जन समस्याओं को जाना व उन्हें दूर करने के लिए न केवल व्यक्तिगत प्रयास किए बल्कि उसके लिए उन्होंने सिरसा के प्रमुख लोगों का सहयोग लेना आरंभ किया। दुर्भाग्यवश वर्ष 2006 से ही उत्तर भारत में डेरा व सिख विवाद आरंभ होने के कारण श्री वी. उमाशंकर के कार्यकाल में उतने विकास कार्य नहीं हो पाए जितने विकास कार्य करवाने की क्षमता श्री वी. उमाशंकर में थी, उनका बहुत अधिक समय सिरसा जिला को शांत बनाए रखने में बीता। 
डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने 12 मई 2007 को शाह सतनाम जी रूहानी धाम राजगढ़ सलाबतपुरा (बठिंडा) में इंसानियत को जिंदा करने के उद्देश्य से जाम-ए-इन्सां पिलाकर साध-संगत को 47 नियम मानने का संकल्प दिलवाया था, लेकिन बठिंडा निवासी राजिन्द्र सिंह सिद्धू ने उनके खिलाफ गुरू गोबिन्द सिंह की पोशाक पहनकर उनकी नकल करने और धार्मिक भावना भड़काने को लेकर कोतवाली थाने में 20 मई 2007 को मामला दर्ज करवा दिया। रूहानी जाम के नाम पर विवाद खड़ा कर कुछ तत्वों ने पंजाब-हरियाणा व हिमाचल के अलावा श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में भी हिंसा शुरू कर दी। इस हिंसा की आग सबसे अधिक सिरसा जिला में फैलने लगी। सिरसा में सिक्खों द्वारा एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें प्रकाश सिंह सहूवाला, बाबा गुरमीत सिंह तिलोकेवाला, बाबा प्रीतम सिंह मलड़ी, शेर सिंह मैनेजर सहित अन्य सिक्ख नेता व साध संगत शामिल हुई थी। उस समय सिरसा के उपायुक्त वी. उमाशंकर ने सिरसा के प्रमुख लोगों को बुलाकर एक शांति समिति का गठन किया जिसमें सभी राजनीतिक लोगों के साथ-साथ नगर के प्रमुख लोगों को शामिल किया गया। इनमें मुख्य रूप से सर्वश्री जगदीश चोपड़ा, सुरेंद्र भाटिया, स्वर्ण सिंह विर्क, वीरभान मेहता, हीरालाल शर्मा, आनंद बियाणी, जसबीर सिंह जस्सा, रमेश मेहता, जंटा सिंह पटवारी, पूर्व विधायक बलकौर सिंह सहित दो दर्जन लोगों को शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त संवेदनशील गांवों में भी शांति समितियों का गठन किया गया। इस दौरान राजस्थान से सिरसा वापिस आते समय जब डेरा मुखी गांव घुकांवाली पहुंचे तो उन पर कुछ शरारती लोगों ने हमला करने की कोशिश की। जिसके बाद ऐसा लगने लगा कि डेरा अनुयायियों व सिख संगत के बीच खूनी टकराव हो सकता है, मगर इस दौरान वी. उमाशंकर ने आम लोगों से न केवल  अपना संवाद बनाए रखा बल्कि किसी भी समय आम लोगों को उनसे संपर्क करने की अपील की। शांति समिति को श्री. वी. उमाशंकर ने मुख्य चेहरा बनाकर डेरा मुखी से बातचीत करने व सिख समाज के अग्रणी लोगों से बातचीत का रास्ता अपनाया। अनेक बार शांति समिति के प्रयासों से टकराव होते-होते बचा। सिरसा नगर के अतिरिक्त ओढां में भी सिख संगत व डेरा समर्थकों के बीच टकराव होते-होते बचा, तब शांति समिति व प्रशासन के प्रयासों से दोनों पक्षों को शांत किया गया व सिख समाज के अनेक लोगों को गिरफ्तार करके फतेहाबाद की पुलिस लाइन ले जाया गया, जहां शाम को उन्हें रिहा किया गया। इस बीच जब डबवाली में टकराव की स्थिति आई तो वी उमाशंकर तलवारों से हमला करने वाले कुछ व्यक्तियों के बीच जाकर एक व्यक्ति को सुरक्षित बचा लाए। इस दौरान शांति समिति ने वर्ष 2007 के आरंभ महीनों में गांव-गांव जाकर शांति की अपील की व तीन लाख लोगों के हस्ताक्षर करवाए। सिरसा के लोगों के तीन लाख हस्ताक्षर वाला एक ज्ञापन जो वास्तव में शांति की अपील थी, डेरा मुखी को सौंपा गया। इस प्रतिनिधिमंडल में शांति समिति के श्री जगदीश चोपड़ा, श्री सुरेंद्र भाटिया, श्री स्वर्ण सिंह विर्क, श्री वीरभान मेहता, श्री हीरालाल शर्मा, श्री आनंद बियाणी, श्री जसबीर सिंह जस्सा, श्री रमेश मेहता, श्री जंटा सिंह पटवारी, पूर्व विधायक बलकौर सिंह सहित शहर के लोग गणमान्य शामिल थे। इसके अतिरिक्त शांति समिति का एक प्रतिनिधिमंडल 14 जुलाई 2007 को अमृतसर गया व उस समय के अकाल तख्त के मुख्य ग्रंथी ज्ञानी जोगेंद्र सिंह वेदांती से मिला तथा उन्हें भी तीन लाख हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपा। शांति समिति के सदस्य अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी जोगेंद्र सिंह वेदांती से मिलने के बाद श्री हरमिंदर साहब में माथा टेकने पहुंचे व उसके बाद जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन किया। जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन करने के बाद शांति समिति के सदस्य श्री दुर्गयाना मंदिर पहुंचे जहां मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री रमेश शर्मा, श्री सुरेंद्र बिल्ला द्वारा शांति समिति के सदस्यों को सिरोपा भेंट करके सिरसा जिला के साथ-साथ हरियाणा व पंजाब में शांति स्थापित करने के प्रयासों की सराहना की। जिन लोगों को सिरोपा भेंट किया गया उनमें जगदीश चोपड़ा, सुरेंद्र भाटिया, का. स्वर्ण सिंह विर्क, स. सुरेंद्र सिंह वैदवाला, विनोद मित्तल, स. अवतार सिंह, कामरेड जयचंद सहारणी, हीरालाल शर्मा, डॉ. वेद बेनीवाल,  डॉ. गुलाब सिंह सिहाग, ओपी बिश्नोई, किरणदीप, बलकौर सिंह, रमेश मेहता, वीरभान मेहता, महंत बलदेव दास, स. अजैब सिंह, डॉ. भीम शर्मा, स. गुरमेल सिंह आदि शामिल थे। शांति समिति के सदस्य इसके बाद भारत-पाक सीमा पर सीमा सुरक्षा बल द्वारा प्रतिदिन की जाने वाली शानदार परेड को देखने भी पहुंचे। शांति समिति के सदस्यों के अमृतसर प्रवास के दौरान वर्तमान में फरीदाबाद के एसडीएम व उस समय ऐलनाबाद के तहसीलदार श्री परमजीत सिंह चहल व लोकसंपर्क अधिकारी सतीश मेहरा भी सरकारी प्रतिनिधि के रूप में शांति समिति के सदस्यों के साथ अमृतसर गए। अमृतसर दौरे के दौरान शांति समिति ने उनसे सिख संगत को तनाव के इस माहौल में शांत रहने की अपील की। शांति समिति ने डेरा मुखी व श्री अकाल तख्त के ग्रंथी से मिलने के अतिरिक्त पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल व हरियाणा के मुख्यमंत्री चौ. भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी मुलाकात की तथा सिरसा की शांति के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग रखी।

डेरा-सिख विवाद को शांत करने में नगर में निकाला शांति मार्च

B


सिरसा के इतिहास में शायद 27 जून 2008 का दिन विशेष दिन था, जब नगर के समस्त सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा शांति समिति के नेतृत्व में एक बड़ा शांति मार्च किया गया। इस शांति मार्च में सिरसा नगर की आईएमए, दिशा, पीपीए, सहारा वेलफेयर क्लब, सौगात, सहयोग, साक्षरता मिशन, शिवशक्ति ब्लड बैंक, शिव शक्ति रक्तदाता समिति, तर्कशील सोसायटी, गुरूनानक सेवा समिति, विश्व हिंदू परिषद, स. सुरजन सिंह मैमोरियल युवा क्लब तख्ताल, भारत विकास परिषद, आर्य समाज मंदिर, टीचर्स एसोसिएशन, सीएमके नॉन टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन, जय श्री राम जनसेवा समिति, मारुति भंडारा ट्रस्ट, ट्रेड ऑर्गेनाइजेशंस, नामधारी साध संगत, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन, हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल, श्री हनुमंत फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। यह शांति मार्च सिरसा की अनाज मंडी के गांधी पार्क से प्रात: 9 बजे आरंभ होकर नगर के मुख्य बाजारों से होता हुआ लालबती चौक पर समाप्त हुआ। इस शांति मार्च को करने का मुख्य उद्देश्य आम लोगों में व्याप्त भय के वातावरण को दूर करना व जिला प्रशासन को यह भरोसा दिलाना था कि सिरसा के लोग शांति चाहते हैं। इस शांति मार्च में नागरिक परिषद द्वारा सिरसा के लोगों से दो घंटे के समय का दान मांगते हुए उस समय कहा गया था कि जिला सिरसा में पनप रहे वातावरण से प्रत्येक जागरूक नागरिक बेहद चिंतित है। ऐसे माहौल में हम सभी की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है। आज देशभक्त नागरिकों की आवाज बुलंद होना बहुत जरूरी है। अत: चारों ओर अमन, सौहार्द व परस्पर भाईचारे का संदेश देने के लिए आप से केवल दो घंटें के समय का दान मांगते हैं। सिरसा के तत्कालीन उपायुक्त श्री वी. उमाशंकर शांति मार्च के प्रतिनिधियों से ज्ञापन लेने स्वयं सिरसा के टाऊन पार्क पहुंचे। उन्होंने उस समय सिरसा के लोगों की शांति मार्च में भाग लेने व जिला में शांति की पहल करने के लिए नागरिक परिषद सहित नगर की सभी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

जिला में अशांत वातावरण के बावजूद जनभागीदारी से करवाए अनेक विकास कार्य

C


सिरसा में श्री वी. उमाशंकर का कार्यकाल जहां डेरा-सिख विवाद के अशांत वातावरण के बावजूद जिला के लोगों में शांति कायम रखने के लिए याद किया जाएगा, वहीं इस दौरान उन्होंने जनभागीदारी से अनेक विकास कार्य भी करवाए। श्री वी. उमाशंकर के समय सिरसा का हेलन केयर नेत्र विद्यालय इसका जीता जागता उदाहरण है जिसमें शहर के प्रमुख लोगों को भागीदार बनाकर लगभग 50 लाख रुपए एकत्रित किए। आज सिरसा जिला उन जिलों में शामिल है, जहां नेत्रहीनों के लिए विशेष विद्यालय चल रहा है। इसके अतिरिरक्त गौरक्षा समिति का गठन करके सिरसा नगर को लगभग बेसहारा पशुओं से मुक्त कर दिया था। उस समय सिरसा के लोगों ने वी. उमाशंकर की अपील पर लगभग 70 लाख रुपए एकत्रित करके जिला की गौशालाओं को दान के रूप में राशि प्रदान की व उन्हें बेसहारा गौवंश रखने के लिए प्रेरित किया। इस कार्य में उस समय के पुलिस अधीक्षक श्री विकास अरोड़ा का भी विशेष योगदान था। श्री वी. उमाशंकर ने उस समय सिरसा को सिटी बस भी प्रदान की थी, हालांकि वह अब बंद पड़ी है, लेकिन उन्होंने अपनी ओर से आम लोगों के लिए सिटी बस सेवा आरंभ की। इसके साथ-साथ श्री वी. उमाशंकर ने अपने कार्यकाल में सिरसा को ई-दिशा, सिरसा के पहले रेलवे ओवरब्रिज व अधूरी पड़ी मिनी बाइपास को पूरा करने के जनता के सुझाव को भी अमलीजामा पहनाया। उनके कार्यकाल में सिरसा के सिविल अस्पताल में करोड़ों रुपयों की सरकारी खरीद के लिए आईएमए के डॉ. वैद बैनीवाल व नागरिक परिषद के सुरेंद्र भाटिया व व्यापार मंडल के हीरालाल शर्मा को निगरान समिति का सदस्य बनाया, जब सिरसा रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण आरंभ हुआ तो उसके लिए 20 सदस्यीय निगरानी समिति बनाई गई जिसमें नागरिक परिषद के अनेक सदस्यों को शामिल किया गया। इसी प्रकार चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के निर्माण में जब दो अधिकारियों के बीच विवाद हुआ तो विश्वविद्यालय द्वारा श्री वी. उमाशंकर की सलाह पर सिरसा जिला के 6 गणमान्य लोगों स. मलकीत सिंह खोसा, श्री सुरेंद्र भाटिया, श्री आनंद बियानी, डॉ. गुलाब सिंह, श्री हीरालाल शर्मा, श्री रमेश गोयल को सदस्य बनाया। यही नहीं, सिरसा जिला में विकास कार्यों के लिए नागरिक परिषद के सुझाव को महत्व देते हुए सिरसा के पंचायत भवन में 14 मार्च 2007 व 23 अगस्त 2007 को विशेष बैठकों का आयोजन किया जिसमें नागरिक परिषद के सदस्यों द्वारा सिरसा नगर की समस्याओं की वीडियोग्राफी करवाकर जिला के अधिकारियों को दिखाई गई जिसमें अनेक समस्याओं का मौके पर व अनेक समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए।  

जल संरक्षण के लिए श्री वी. उमाशंकर ने सिरसा में पहल की
ग्लोबल वार्मिंग व भूमिगत जल के गिरते स्तर के लिए वर्ष 2006 में ही श्री वी. उमाशंकर ने सिरसा में पहल की थी जब नागरिक परिषद की ओर से लेखक सुरेंद्र भाटिया ने उनके समक्ष सिरसा के बाल भवन सहित नगर के कुछ स्थानों पर जलभराव की समस्या से निपटने के लिए भूमिगत जल संरक्षण के लिए वाटर रिचार्ज कुएं बनाने का सुझाव रखा तो उन्होंने इस सुझाव को तुरंत मानते हुए इसके लिए लगभग दो लाख रुपए की राशि उपलब्ध करवाकर सिरसा के उपमंडलाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसमें लेखक श्री सुरेंद्र भाटिया को शामिल करते हुए इस काम को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। सिरसा की बरनाला रोड पर बाल भवन के पास मामूली सी वर्षा के बाद कई-कई दिन तक जलभराव रहता था। इसी प्रकार सिरसा के आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व मंडी क्षेत्र में भी ऐसे ही हालात थे। उपायुक्त श्री वी.उमाशंकर के निर्देश पर कमेटी द्वारा बालभवन, आर्य वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय व दो अन्य स्थानों पर लगभग 20 वाटर रिचार्ज कुंओं का निर्माण किया गया और यह प्रयोग सफल रहा तथा कई वर्षों तक इन स्थानों पर जलभराव की समस्या से न केवल निपटा गया बल्कि गिरते भूमिगत जल स्तर को बचाने में मदद मिली। इसी प्रयोग के बाद प्रदेश के अनेक विभागों ने भूमिगत जल संरक्षण के लिए गहरे कुएं बनाने की योजना बनाई। 

सिरसा में रेलवे ओवरब्रिज की निगरान समिति बनाई, नागरिक परिषद के सुझाव पर एक नई  सड़क का किया निर्माण

D


सिरसा नगर के बीचोंबीच गुजरती हिसार-बठिंडा रेलवे लाइन के कारण नगर दो भागों में बंटकर रह गया था तथा घंटों तक सड़क जाम रहती थी। इस दौरान श्री वी. उमाशंकर ने व्यक्तिगत प्रयास करके उस समय की सरकार को रेलवे ओवरब्रिज बनाने के लिए न केवल सहमत किया बल्कि उसमें आने वाली अड़चनों को भी दूर किया। जब अंबेडकर चौक से डॉ. भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा हटाने पर कुछ लोगों ने विरोध आरंभ किया तो उन्होंने नई दिल्ली जाकर रेलवे ओवरब्रिज की ड्राइंग में बदलाव करवाए। यही नहीं रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में जनभागीदारी के लिए एक निगरान समिति का गठन किया जिसमें पं. होशियारी लाल शर्मा, श्री पवन डिंगवाला, श्री जगदीश चोपड़ा, श्री हीरालाल शर्मा, श्री  वीरभान मेहता, श्री जयनारायण तायल, श्री भूपेश मेहता, श्री सुरेंद्र सिंह वैदवाला, डॉ. आरएस सांगवान, डॉ. वेद बैनीवाल, श्री सुरेंद्र भाटिया, श्री भूपेंद्र धर्माणी, श्री अरुण मेहता, श्री सुभाष बांसल, श्री बाबू राम फुटेला, श्री महेश शारदा, श्री जी.सी. अग्रवाल, श्री पंकज खेमका, श्री विक्रमजीत सिंह, श्री प्रवीण बागला थे।

सिरसा में हॉकी एस्टोटर्फ मैदान तैयार करवाया
अप्रैल 2008 में मलेशिया में संपन्न हुए अजलान शाह हॉकी कप में भारत द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बाद जब टीम के प्रमुख सदस्य व भारत के पूर्व कप्तान सरदारा सिंह सिरसा आए तो नागरिक परिषद सिरसा द्वारा पंचायत भवन में सरदारा सिंह के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन के मुख्यातिथि उस समय के सिरसा के उपायुक्त श्री वी. उमाशंकर थे। नागरिक परिषद के अध्यक्ष श्री जगदीश चोपड़ा व सचिव श्री सुरेंद्र भाटिया ने सरदारा सिंह को सम्मानित करते हुए उपायुक्त के समक्ष सिरसा में हॉकी एस्टोटर्फ  लगाने की मांग की जिस पर श्री वी. उमाशंकर ने सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में हॉकी एस्टोटर्फ  लगाने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त उन्होंने सरदारा सिंह को एक लाख रुपए की राशि भी प्रदान की। यही नहीं, 15 अगस्त 2008 को उस समय की हरियाणा सरकार द्वारा रेवाड़ी में सरदारा सिंह को सम्मानित करते हुए 10 लाख रुपए की राशि प्रदान की व नागरिक परिषद सिरसा द्वारा रखे गए प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सिरसा में 5 करोड़ रुपए की लागत से एस्टोटर्फ लगाने की स्वीकृति प्रदान की। पंचायत भवन में आयोजित कार्यक्रम में श्री वी. उमाशंकर ने सरदारा सिंह को उचित सरकारी पद दिलाने की भी घोषणा की। उन्हीं की अनुशंसा से सरकार द्वारा सरदारा सिंह को उप पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया। 

सिरसा में महिला विंग की स्थापना की व छात्राओं को घर से लाने के लिए महिला चालक नियुक्त किए
वर्ष 2007 में जहां प्रदेश के अनेक स्थानों पर 200 छात्राओं पर महिला महाविद्यालय खोल दिए गए थे वहीं सिरसा के राजकीय महाविद्यालय में 600 से अधिक छात्राओं के होने के बावजूद सिरसा नगर में राजकीय महिला कॉलेज की स्थापना सरकार द्वारा नहीं की गई, जिस कारण सिरसा के अनेक लोग अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा से वंचित रखते थे क्योंकि प्राइवेट महाविद्यालय उनकी पहुंच से दूर थे और वे सहशिक्षा में चल रहे महाविद्यालयों में अपनी बेटियों को शिक्षा के लिए नहीं भेजते थे। ऐसे में जब नागरिक परिषद के कुछ लोगों ने तत्कालीन उपायुक्त श्री वी. उमाशंकर के समक्ष जब तक महिला महाविद्यालय आरंभ नहीं होता तब तक अलग से महिला विंग बनाने का सुझाव रखा। श्री वी. उमाशंकर जो स्वयं महिला शिक्षा के पक्षधर थे, ने नागरिक परिषद की इस मांग को तुरंत मानते हुए महिला विंग के लिए उचित स्थान तलाशने की जिम्मेदारी अधिकारियों के साथ-साथ नागरिक परिषद के लोगों को दी। ऐसे में सिरसा की पुरानी तहसील कार्यालय के स्थान का जब सुझाव सामने आया तो श्री वी. उमाशंकर इसके लिए न केवल तैयार हो गए बल्कि इस पुराने भवन की मरम्मत के लिए उन्होंने डी प्लान से चार लाख रुपए की राशि प्रदान की व इसकी जिम्मेदारी नागरिरक परिषद के सचिव व लेखक सुरेंद्र भाटिया को सौंपी। इसके बाद अक्तूबर 2007 में पुराने भवन की मरम्मत करवाकर महिला विंग आरंभ करवा दिया गया। वर्ष 2015 में यही महिला विंग राजकीय महिला कॉलेज के रूप में परिवर्तित किया गया। महिला विंग की स्थापना के साथ-साथ ही श्री वी. उमाशंकर ने पहल करते हुए छात्राओं को ग्रामीण क्षेत्रों से आने-जाने के लिए डी-प्लान से चार बसें उपलब्ध करवाई। इसके साथ-साथ उन बसों पर महिला चालक व परिचालक नियुक्त किए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित हो सके।

देश में पहली बार 8 अक्तूबर 2008 को आम नागरिकों ने मनाया 75वां वायुसेना दिवस

E


भारतीय वायुसेना के गठन के 75 वर्ष पूरे होने पर सिरसा देश का एकमात्र ऐसा नगर था, जहां वायुसेना के सम्मान में नागरिकों द्वारा जिला प्रशासन, वायुसेना स्टेशन सिरसा व नागरिक परिषद सिरसा द्वारा सिरसा के चौ. दलबीर सिंह इंडोर स्टेडियम में एक भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन के मुख्यातिथि सीबीआई के पूर्व निदेशक स. जोगेंद्र सिंह थे। इस कार्यक्रम में जहां भारतीय वायुसेना के सिरसा स्टेशन द्वारा आम लोगों के समक्ष भारतीय वायुसेना के गौरवशाली इतिहास की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। वहीं श्री वी. उमाशंकर द्वारा जिला प्रशासन की ओर से, नागरिक परिषद और सिरसा के लोगों द्वारा वायुसेना अधिकारियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में अनेक सामान्य विद्यालयों के बच्चों के साथ-साथ स्वयंसेवी  संस्था दिशा के दिव्यांग बच्चों ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस प्रकार श्री वी. उमाशंकर का कार्यकाल जनभागीदारी का प्रदेश में उत्कृष्ट उदाहरण है।